देवभूमि में भोजपुरी की गूंज

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उत्तराखंड के मैदानी भाग से लेकर पहाड़ तक भोजपुरी समाज की आबादी लगातार बढ़ती जा रही है. इसके बावजूद सूबे के मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक वादा करके भी दसवें राष्ट्रीय भोजपुरी सम्मेलन में नहीं आए. इससे भोजपुरी समाज में उनकी जमकर किरकिरी हुई. आयोजक निशंक पर भोजपुरियों की उपेक्षा का आरोप लगाकर ख़ूब बिफरे. सम्मेलन में राजधानी देहरादून से लेकर नैनीताल तक, धर्म नगरी हरिद्वार से लेकर पावन बद्री-केदार तक भोजपुरिया लोगों की मौजूदगी और राज्य के विकास में उनके योगदान की जमकर चर्चा हुई.

मॉरीशस से आए डॉ. सबिता बुद्धू ने भोजपुरी साहित्य और भोजपुरी समाज की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए वहां भोजपुरी समाज की उपलब्धियों का बखान किया. संस्था के अंतरराष्ट्रीय महासचिव अरुणेश त्रिपाठी ने विश्व में भोजपुरी संस्कृति के प्रचार-प्रसार के बारे में प्रकाश डाला. इस अवसर पर भोजपुरी में प्रकाशित स्मारिका सखी का विमोचन किया गया.

सम्मेलन के आख़िरी दिन पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने पहुंच कर जो समां बाधा, उससे देश-विदेश से आए भोजपुरी प्रतिनिधि काफी गदगद दिखे. तिवारी तीन बार अविभाजित उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. उन्होंने भोजपुरी भाषा की मधुरता और स्वतंत्रता आंदोलन में भोजपुरी समाज के योगदान की सराहना करके उपस्थित जनसमूह का आदर प्राप्त किया. इस अवसर पर तिवारी भी भोजपुरी समाज के मध्य पूरे रौब में दिखे. उन्होंने मंच से भोजपुरी गीत, जिसने अंग्रेजी हुकूमत के ख़िला़फ स्वतंत्रता आंदोलन का बिगुल बजाया था, सुनाकर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया. उनके द्वारा गाए भोजपुरी गीत, राजा तोरी राजशहिया मिटाई देबई….ने खूब वाहवाही बटोरी. तिवारी ने भोजपुरी भाषा की ख़ूबियों की सराहना करते हुए कहा कि इस भाषा की मिठास सभी को आकर्षित करती है. भोजपुरी को एक ओजस्वी भाषा बताते हुए उन्होंने इसके संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया. मॉरीशस से आए डॉ. सबिता बुद्धू ने भोजपुरी साहित्य और भोजपुरी समाज की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए वहां भोजपुरी समाज की उपलब्धियों का बखान किया. संस्था के अंतरराष्ट्रीय महासचिव अरुणेश त्रिपाठी ने विश्व में भोजपुरी संस्कृति के प्रचार-प्रसार के बारे में प्रकाश डाला. इस अवसर पर भोजपुरी में प्रकाशित स्मारिका सखी का विमोचन किया गया. डॉ. अशोक त्रिपाठी ने भोजपुरी पर आयोजित वार्ता का सफल संयोजन किया.

सम्मेलन के पहले दिन लोक गायिका मालिनी अवस्थी द्वारा गाए भोजपुरी गीत, पिया को लिए जाए रे…रतिया बैरन, सुंदर सभूमि भैया भारत की…पर श्रोता थिरकते रहे. मिर्जापुर से आईं अंतरराष्ट्रीय कजरी गायिका उर्मिला श्रीवास्तव द्वारा प्रस्तुत कजरी गीत, मां की आराधना सुनकर श्रोता भावविभोर हो गए. भोजपुरी गीत, हमें मेंहदी लियाई द मोतीझील से जाई के साइकिल से ना…पर उन्होंने ख़ूब तालियां बटोरीं. उमिर्र्ला ने कजरी का संबंध प्रकृति और हरियाली से जोड़ते हुए कहा कि मां विंध्यवासिनी की आराधना के साथ ही कजरी हरियाली गीत भी है. इस धरती पर जब तक हरियाली रहेगी, तब तक कजरी भी रहेगी. इसी रात त्रिवेणी घाट पर पूर्वांचल नृत्य नाटिका मेघदूत एवं भिखारी ठाकुर भोजपुरिया लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रही. सम्मेलन में चर्चित गायक हीरालाल यादव द्वारा गाए बिरहा और परमहंस चौरसिया द्वारा गाए निर्गुन ने खासी सराहना हासिल की. अंत में सभी कलाकारों को स्मृति चिन्ह एवं सम्मानपत्र दिए गए. पूर्व केंद्रीय मंत्री दुर्गा प्रसाद मिश्र, अशोक सिंह, अजीत दूबे, सतीश त्रिपाठी, राजा वशिष्ठ, आचार्य पंकज, सुरेश त्रिपाठी, दीप शर्मा एवं आरती गौड़ समेत बड़ी संख्या में भोजपुरी समाज के लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और हम किसी से कम नहीं का आभास कराते हुए सम्मेलन को सफल बनाया. उद्घाटन सांसद कलराज मिश्र, समाज के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष सतीश चंद्र त्रिपाठी एवं मनोहरकांत ध्यानी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलित करके किया. यह पहला अवसर है कि अल्प सूचना पर ही भोजपुरी समाज के दिग्गजों ने अपने संसाधनों से ॠषिकेश पहुंच कर सम्मेलन में हिस्सा लिया.

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