दिल्ली का बाबूः अगला कैबिनेट सचिव कौन

नए कैबिनेट सचिव के नाम की घोषणा बहुत जल्द होने वाली है और इस वजह से बाबुओं के बीच कयासबाजी का दौर जारी है. यद्यपि पुलोक चटर्जी का नाम इस पद की दौड़ में सबसे आगे है, फिर भी और कई नाम भी इसमें शामिल हैं. इसमें बिहार के मुख्य सचिव अनूप मुखर्जी के नाम की संभावना सबसे ज़्यादा दिख रही है. कुछ पर्यवेक्षकों का मानना है कि उनका नाम पुलोक चटर्जी के विकल्प के तौर पर बेहतर साबित हो सकता है. इस बार एक महिला को कैबिनेट सचिव पद पर लाए जाने की बात पर भी विचार किया जा रहा है. ऐसी स्थिति में वित्त सचिव सुषमा नाथ और कार्मिक सचिव अलका सिरोही का नाम भी सामने आ रहा है. ज़ाहिर है, जल्द ही एक अंतिम नाम सबके सामने आ जाएगा. दिलचस्प रूप से सरकर में ऊंचे ओहदे पर महिला को नियुक्त किए जाने की चर्चा तबसे ज्यादा जोर पकड़ती गई, जब निरूपमा राव विदेश सचिव बनीं. अभी तक भारत सरकार के कैबिनेट सचिव के पद पर कभी किसी महिला को नियुक्त नहीं किया गया है. सरकार के 150 सचिवों में से महज दस ही महिलाएं हैं और निरूपमा राव, जो जल्द ही रिटायर होने वाली हैं, के बाद यह संख्या और घट जाएगी. सूत्रों का कहना है कि निरूपमा की जगह किसी महिला को ही लाया जाएगा. कई लोग इस पद के लिए रंजन मथाई, एस सभ्भरवाल और आलोक प्रसाद के नाम पर भी कयास लगा रहे हैं, लेकिन अभी कुछ भी अंतिम रूप से कहना जल्दबाजी होगा.

बाबु बनाम नेता

वर्ष 2002 के गुजरात दंगे और उस दौरान नेताओं द्वारा पुलिस वालों पर दबाव बनाने के मामले अब एक-एक करके सामने आ रहे हैं. वरिष्ठ पुलिस अधिकारी संजीव भट्ट ने दंगे के समय नरेंद्र मोदी की भूमिका पर जो सवाल उठाए हैं, उनसे गुजरात पुलिस के आला अफसरों में हलचल मच गई है. सुप्रीम कोर्ट में एक शपथ पत्र देकर संजीव भट्ट ने मोदी को तो घेरे में लिया ही, साथ ही उन्होंने दंगे की जांच करने वाली टीम (एसआईटी) की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं. इस सबसे मोदी पर तो धब्बा लगा ही, साथ ही विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी सकते में आ गए. पर्यवेक्षकों के मुताबिक, मुख्यमंत्री की अपने बाबुओं और प्रशासन पर सख्त पकड़ है, लेकिन फिर भी ऐसा नहीं लगता कि भट्ट को अलग-थलग किया जा सकता है. पूर्व पुलिस महानिदेशक के चक्रवर्ती भले ही भट्ट के बयान पर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन भट्ट को अपने सहकर्मियों (सिविल सर्विस से जुड़े सहयोगी) की ओर से पर्याप्त समर्थन मिलता दिख रहा है. निलंबित आईएएस अधिकारी प्रदीप शर्मा, जो खुद जमीन घोटाले के आरोप का सामना कर रहे हैं, ने एसआईटी के सामने उपस्थित होकर यह खुलासा करने की इच्छा जताई है कि कैसे उन पर यह दबाव डाला गया कि वह अपने एक आईपीएस भाई को अपना कर्तव्य निभाने से रोकें. सबसे खास बात यह है कि एक पूर्व उच्च पुलिस अधिकारी आर बी श्रीकुमार भी भट्ट के समर्थन में खुलकर सामने आए हैं और गृहमंत्री पी चिदंबरम ने भी भट्ट के शपथपत्र को अपना समर्थन देने का संकेत दिया है. ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि गुजरात में शक्तिशाली मोदी से मुकाबला करने के लिए और कौन-कौन लोग सामने आते हैं.