एक्जिट पोल से पहले यह अनुमान लगाया जा रहा था कि असम में कांग्रेस को अपनी सरकार बचाने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ सकती है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और तरुण गोगोई के नेतृत्व में कांग्रेस लगातार तीसरी बार सत्ता में वापस आ गई. असम को लेकर एक सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर ऐसी क्या वजह है कि तरुण गोगोई तीसरी बार कांग्रेस को जिता ले गए. जबकि उन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप भी लगे थे और असम की जनता की समस्याएं भी अपनी जगह जस की तस मुंह बाए खड़ी थीं. दरअसल, गोगोई को जिस चीज का सबसे ज्यादा फायदा मिला, वह यह है कि असम में विपक्ष कहीं नहीं दिखा. अगर दिख भी रहा है तो बिखरा हुआ और असंगठित. चाहे वह असम गण परिषद हो या भारतीय जनता पार्टी. हां, ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट का प्रदर्शन ठीक रहा, लेकिन अंतत: एक मजबूत विपक्ष की कमी ने कांग्रेस को एक और मौका दे दिया.
दरअसल, गोगोई को जिस चीज का सबसे ज्यादा फायदा मिला, वह यह है कि असम में विपक्ष कहीं नहीं दिखा. अगर दिख भी रहा है तो बिखरा हुआ और असंगठित. चाहे वह असम गण परिषद हो या भारतीय जनता पार्टी. हां, ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट का प्रदर्शन ठीक रहा, लेकिन अंतत: एक मजबूत विपक्ष की कमी ने कांग्रेस को एक और मौका दे दिया.
इस चुनाव परिणाम से असम गण परिषद काफी कुछ सीख सकता है. खासकर, प्रफुल्ल कुमार महंत. उन्होंने चुनाव से पूर्व एक महागठबंधन बनाने की कोशिश की थी, जो असफल साबित हुई. बहरहाल, कांग्रेस को जीत तो मिल गई, लेकिन अब उसे अपना ध्यान जनता की समस्याओं पर केंद्रित रखना होगा. घुसपैठ का मामला यहां हमेशा से विवाद और हिंसा का कारण बनता रहा है. इस मुद्दे पर सिर्फ राजनीति होती रही है. कांग्रेस पर तो यह आरोप भी लगता रहा है कि बांग्लादेशी घुसपैठिए उसका वोट बैंक हैं. इसके अलावा अल्पसंख्यकों की हालत भी दयनीय है. बाढ़ का मुद्दा ऐसा है, जिससे असम की जनता हर साल प्रभावित होती है. सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह है कि मनमोहन सिंह असम से ही राज्यसभा में आते हैं. ऐसे में असम की जनता को कांग्रेस से काफी उम्मीदें हैं, जिन्हें निश्चित तौर पर पूरा किया जाना चाहिए.
कहां-कहां कितनी सीटें |
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| पश्चिम बंगाल कुल सीटें-294 | |
| तृणमूल कांग्रेस | 184 |
| कांग्रेस | 42 |
| सीपीआई (एम) | 40 |
| सीपीआई | 02 |
| एआईएफबी | 11 |
| आरएसपी | 07 |
| सपा | 01 |
| अन्य | 07 |
| असम कुल सीटें-126 | |
| कांग्रेस | 78 |
| एआईयूडीएफ | 18 |
| एजीपी | 10 |
| बीपीएफ | 12 |
| भाजपा | 05 |
| तृणमूल | 01 |
| अन्य | 02 |
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