गुजरात सबसे आगे है

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भारत की अर्थव्यवस्था पिछले दो दशकों से निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है. आज भारत विकासशील देशों की सूची में सिर्फ चीन से पीछे है और अटकलें लगाई जाती हैं कि वह चीन को भी जल्दी ही पीछे छोड़ देगा. भारत के विकास की कहानी में भी विश्व की तरह तीन तरीके के पात्र हैं. पहले वे प्रदेश हैं, जो विकास की सीढ़ी के पहले पायदान पर हैं. उन्हें बीमारू प्रदेश भी कहते हैं. वैसे इनमें भी बदलाव की बयार तेज़ हो चुकी है. दूसरे वे प्रदेश हैं, जो विकासशील कहे जा सकते हैं. भारत के कुछ चुनिंदा प्रदेश, जहां की अर्थव्यवस्था ने भारत की अर्थव्यवस्था में सबसे अधिक योगदान दिया है, उनमें गुजरात का नाम प्रमुख है.

गुजरात सबसे आगे होने की वजह से पूर्णतया विकसित हो चुका है. अभी भी राज्य में वही सारी समस्याएं हैं, जिन्होंने पूरे देश को परेशान कर रखा है. इस कारण अभी भी गुजरात को आम आदमी के लिए बहुत कुछ करना बाकी है. भले ही गुजरात ने भारत के अन्य राज्यों की अपेक्षा बेहतर प्रदर्शन किया हो, लेकिन अभी भी बहुत कुछ करना शेष है.

51वें वर्ष में प्रवेश के अवसर पर गुजरात सहित विभिन्न देशों में रहने वाले गुजराती लोगों ने स्वर्णिम जयंती महोत्सव का आयोजन किया. विश्व भर में फैले गुजरातियों के लिए गुजरात क्विज का ऑनलाइन ग्लोबल कंपटीशन शुरू करने की भी घोषणा हुई. इस मौक़े पर ग्लोबल गुजरात कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया गया. स्वर्णिम जयंती समापन वर्ष के शानदार महोत्सव में केन्या के उपराष्ट्रपति डॉ. स्टीफन कॉलोंजो मूस्योका मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद थे. यह बात दर्शाती है कि गुजरात किस तरह दूसरे देशों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. यह सब इसलिए हो पाया है, क्योंकि विकास को इस राज्य ने अपना मूल मंत्र बना लिया है.

गुजरात सांप्रदायिक दंगों के लिए बदनाम हुआ, लेकिन अब स्थिति में बदलाव आया है. भले ही गुजरात इस धब्बे को कभी न मिटा पाए, लेकिन आज देश में सभी राज्यों की कानून व्यवस्था के संदर्भ में गुजरात सबसे ऊपर है. देश या विदेश, सभी जगहों से गुजरात में लाखों करोड़ रुपये का निवेश आ रहा है और इसीलिए गुजरात को देश का निवेश राज्य कहा जा सकता है. गुजरात में निवेश चुंबक की तरह खिंचा चला आ रहा है, क्योंकि संभवतः सबसे बड़ी बात है यहां की चाक चौबंद कानून व्यवस्था. अभी कुछ महीने पहले हुए वाइब्रेंट गुजरात निवेश मेले में, जो इस मेले का पांचवा साल था, लगभग 20,83,000 करोड़ रुपये मूल्य के निवेश मिले. इस मेले में लगभग 101 देशों के लोगों ने हिस्सा लिया. मुद्दे की बात यह है कि सिर्फ भारत के बाहर से ही नहीं, गुजरात को देश के सभी बड़े उद्योगपतियों ने दूसरे राज्यों की तुलना में वरीयता दी है. टाटा का नैनो प्रोजेक्ट हो या रिलायंस या रुईआ के निवेश, सभी गुजरात में अपना पैसा लगाना चाहते हैं. इसी कारण जहां पिछली बार वाइब्रेंट गुजरात मेले में 45 देशों के लोग आए थे और 240 बिलियन डॉलर के मसौदे हुए थे, इस बार इतनी बड़ी रकम के मसौदे हुए. ज़ाहिर सी बात है कि कुछ तो ऐसा हो रहा है कि पूंजीपति, जो मुनाफे के लिए काम करते हैं, इतनी बड़ी संख्या में गुजरात के प्रति आकर्षित हो रहे हैं.

गुजरात की विकास गाथा अपने आप में एक मिसाल है. गुजरात देश के सबसे विकसित राज्यों में से एक है. यहां का प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पादन देश के सामान्य उत्पादन से 3.2 गुना है. अगर गुजरात एक अलग देश होता तो विश्व का 67वां सबसे अमीर देश होता और चीन से भी आगे होता. गुजरात ने देश की विकास यात्रा में कई नए प्रतिमान बनाए हैं. यहां देश की सिर्फ 5 फीसदी जनता रहती है, लेकिन देश का 13 फीसदी औद्योगिक उत्पादन गुजरात करता है. यह राज्य भारत के कुल निर्यात के 22 फीसदी का हिस्सेदार है. भारत का 24 फीसदी सूती कपड़ा उत्पादन गुजरात में होता है. देश भर की 35 फीसदी दवाइयां गुजरात में बनती हैं. पेट्रोलियम पदार्थों का 51 फीसदी हिस्सा गुजरात से आता है. अलंग में भारत का सबसे बड़ा पोत तोड़ने का कारखाना है. गैस द्वारा ऊर्जा उत्पादन में गुजरात देश में अग्रणी है. भारत के शेयर मार्केट की 35 फीसदी पूंजी गुजरातियों के पास है. गुजरात के लोगों ने विदेशों में भी भारत का गौरव बढ़ाया है. उत्तरी अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों में 60 फीसदी संख्या गुजरातियों की है. वहां पर किसी भी गुजराती परिवार की आमदनी किसी अमेरिकी परिवार से कम से कम तीन गुनी है.

अब यदि इन बातों को ध्यान में रखा जाए तो कोई आश्चर्य की बात नहीं कि गुजरात को भारत में विकास के इंजन की उपाधि दी गई है. गुजरात में देश के किसी भी राज्य से अधिक हवाई अड्डे हैं, जिनमें एक अंतरराष्ट्रीय और 6 अंतरराज्यीय हवाई अड्डे शामिल हैं.  इसलिए दूर देशों से भी संपर्क बनाए रखने के लिए किसी जद्दोजहद की ज़रूरत नहीं होती. गुजरात में देश की सबसे अच्छी सड़कें और रेल लाइनों का जाल भी समुचित मात्रा में है. गुजरात ने आर्थिक सुधारों को बहुत तेज़ी से लागू किया है. इस कारण राज्य में महंगाई नियंत्रण में है और मूल ढांचे को सुदृढ़ किया गया है. राज्य में आर्थिक निवेश को सरल और सुडौल बनाने के लिए कई प्रयास किए गए हैं. गुजरात ने इस दिशा में आधुनिक तकनीक का सहारा बड़ी सूझबूझ से लिया है और सिंगल विंडो मॉडल को आगे बढ़ाया है. निवेश करने वालों की सुविधा के लिए मूल ढांचे के बारे में तालुका स्तर तक की सूचनाएं उपलब्ध हैं.

निवेश के लिए समुचित माहौल बनाने के उद्देश्य से गुजरात ने अपने कामगारों की क्षमता बढ़ाने के लिए कई प्रयास किए हैं, जिससे निवेश करने वाली कंपनियों को उनके मन मुताबिक़ कामगार मिल सकें. गुजरात में 54 इंजीनियरिंग कालेज हैं और 106 डिप्लोमा संस्थान भी. राज्य में 441 व्यवसायिक संस्थान यानी आईटीआई भी हैं, जिनमें से हर साल लगभग 80,000 युवा काम सीखकर निकलते हैं. गुजरात में हर साल 7 लाख युवा स्नातक की पढ़ाई करके निकलते हैं. अहमदाबाद के आईआईएम का अपना अलग ही स्थान है और राज्य में आईआईटी संस्थान भी है. किसी भी राज्य के विकास का एक पैमाना वहां का बैंकिंग तंत्र भी होता है. इस मामले में भी गुजरात देश के कई बड़े राज्यों से कहीं आगे है. छोटे से लेकर बड़े लोन तक की सुविधा है और को-ऑपरेटिव या सहकारी बैंकों की भी भरमार है. राज्य में सरकारी ही नहीं, बल्कि निजी क्षेत्र के बैंकों और विदेशी बैंकों का भी ढांचा बहुत मज़बूत रूप से उभरा है.

गुजरात का समुद्र तट बहुत लंबा है, जिस कारण यहां ऐसे अनेक प्राकृतिक स्थान हैं, जहां पर बंदरगाह बनाए गए हैं या बनाए जा सकते हैं. इस कारण देश में आने और देश के बाहर जाने वाली वस्तुओं का सबसे बड़ा जखीरा गुजरात से ही होकर आता-जाता है. देश की सबसे बड़ी रिफाइनरी भी जामनगर में ही स्थित है. इन सारे कारणों से राज्य में बेरोजगारी कम है. स्वरोजगार के लिए छोटी उत्पादन इकाइयों को सरकार ने बढ़ावा दिया है. गुजरात में  एसईजेड हैं, जिनमें तीन ऑपरेशनल हैं और उनमें कांडला एवं सूरत मुख्य हैं. ये सारे अलग-अलग क्षेत्रों में महारथ रखते हैं, जैसे ऊर्जा, कपड़ा उत्पादन, नग और जवाहरात आदि. गुजरात में देश में आने वाले कुल निवेश का 15.14 फीसदी हिस्सा आता है, जो बाकी किसी भी राज्य से अधिक है. 41 बंदरगाहों की वजह से देश के कुल समुद्री व्यापार का 25 फीसदी हिस्सा गुजरात के पास है. 2002 से 2007 की समयावधि में गुजरात का सकल घरेलू उत्पाद 10.2 फीसदी की दर से बढ़ा. आगामी 2012 तक के लिए इस लक्ष्य को बढ़ाकर 11.2 फीसदी कर दिया गया है, जो देश में सबसे अधिक है.

लेकिन ऐसा नहीं है कि गुजरात सबसे आगे होने की वजह से पूर्णतया विकसित हो चुका है. अभी भी राज्य में वही सारी समस्याएं हैं, जिन्होंने पूरे देश को परेशान कर रखा है. इस कारण अभी भी गुजरात को आम आदमी के लिए बहुत कुछ करना बाकी है. भले ही गुजरात ने भारत के अन्य राज्यों की अपेक्षा बेहतर प्रदर्शन किया हो, लेकिन अभी भी बहुत कुछ करना शेष है.

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One Response to “गुजरात सबसे आगे है”

  • R.C.VIVEK says:

    Gujrat is going forward with the rich people only and government is taking care of these rich people but poor people are suffering badly in whole state and untouchable people are still deprived to enter in the temple . There is no equility with all and no justice for poor people. Each and every person knows that Dalits and Muslims are more suffere in Gujrat .

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