मध्‍य प्रदेशः वेलस्‍पन कंपनी का कारनामा- देश में कितने और सिंगुर बनेंगे

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विकास के नाम पर आ़खिर कब तक किसानों और मज़दूरों को उनके हक़ से वंचित किया जाएगा? सेज, नंदीग्राम, सिंगुर, जैतापुर, फेहरिस्त लंबी है और लगातार लंबी होती जा रही है. इसी क़डी में एक और नाम जु़ड गया है वेलस्पन का. मध्य प्रदेश के कटनी ज़िले में वेलस्पन कंपनी के प्रस्तावित पावर प्लांट की स्थापना हेतु ज़िले की बरही एवं विजयराघवगढ़ तहसीलों के गांव बुजबुजा व डोकरिया के किसानों की लगभग 237.22 हेक्टेयर भूमि का शासन द्वारा अधिग्रहण किए जाने की खबर है. इससे दोनों ही गांवों के किसानों में हड़कंप मचा है. नतीजन विरोध में आवाज़ भी बुलंद होनी शुरू हो गई है. किसानों ने ज़िला कलेक्टर को इस कार्यवाही के विरुद्ध सामूहिक रूप से आपत्ति व्यक्त करते हुए ज्ञापन भी सौंपा है.

किसानों की आशंकाओं का समाधान तथा उनकी ओर से दर्ज कराई गई आपत्तियों का निराकरण किए बग़ैर ही उन्हें उनकी भूमि से वंचित किया जाना, सा़फ तौर पर किसानों के जीवन को ख़तरे में डालने जैसा ही है. किसानों के साथ प्रशासन का यह रवैया किसानों में रोष का सबब भी बना हुआ है. वेलस्पन कंपनी का हितैषी ज़िला प्रशासन आख़िर सभी किसानों को भुखमरी की कगार पर खड़ा करने पर आतुर क्यों है?

वेलस्पन एनर्जी नामक औद्योगिक कंपनी द्वारा ज़िले की विजयराघवगढ़ एवं बरही तहसीलों के ग्राम बुजबुजा व डोकरिया के क्षेत्रीय किसानों की कृषि भूमि का उनकी मर्ज़ी के खिला़फ अधिग्रहण किया गया है. इसके लिए कंपनी ने शासकीय अमले की ज़ोर ज़बरदस्ती का भय दिखाया. डोकरिया एवं बुजबुजा ग्रामों की तस्वीर बदलने, क्षेत्रीय बेरोज़गारों को हज़ारों की तादाद में रोज़गार देने जैसे लालच दिए गए. यहां तक कि कई स्थानीय व क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों समेत दलालों से लेकर मीडिया तक का एक बड़ा तबक़ा इस दिशा में कंपनी का भरसक सहयोग करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है. इतना ही नहीं कंपनी के संरक्षण में पिछले दिनों बाक़ायदा एक सामाजिक संस्था तक पंजीकृत कराई गई.

प्रस्तावित उद्योग की स्थापना के लिए आवश्यक ज़मीनें देने से ग्रामीणों द्वारा सा़फ-सा़फ इंकार किए जाने व हज़ारों आपत्तियां दर्ज कराए जाने के बाद वेलस्पन कंपनी द्वारा बाक़ायदा एक संस्था वेलस्पन ताप विद्युत परियोजना प्रभावित वेलफेयर संघ-डोकरिया, बुजबुजा तहसील विजयराघवगढ़, ज़िला कटनी मध्य प्रदेश रजि.नं.04/15/05/13331/11 हाल ही में पंजीकृत कराई गई है. इस संस्था की ओर से गत दिनों एक पत्र प्रदेश के मुख्यमंत्री को प्रेषित कराया गया है. साथ ही कई संदिग्ध हस्ताक्षर युक्तएक प्रेस विज्ञप्ति भी जारी की  गई है. इसके माध्यम से ग्राम डोकरिया व बुजबुजा में प्रस्तावित वेलस्पन एनर्जी के प्लांट से जहां एक ओर क्षेत्रीय विकास, बड़ी संख्या में स्थानीय युवा बेरोज़गारों को रोज़गार मिलने की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर उद्योग स्थापना का विरोध करने वालों को असामाजिक तत्व बताया जा रहा है और ऐसे लोगों को विकास का दुश्मन कहा जा रहा है. इस संस्था के माध्यम से कंपनी और उसके धोखे की पोलपट्टी खोलने तथा ज़िले के प्रबुद्ध नागरिकों, बुद्धिजीवियों, सामाजिक, राजनीतिक कार्यकर्ताओं, विभिन्न राष्ट्रीय जनांदोलनों के प्रतिनिधियों को विकास विरोधी व असामाजिक तत्व ठहराने की कोशिश की जा रही है.

कंपनी की ओर से ज़िले में अराजकता का वातावरण निर्मित किए जाने के प्रयास भी तेज़ी से जारी हैं. इस सबके बावजूद बुजबुजा एवं डोकरिया ग्रामों के बहुसंख्यक ग्रामीण इस उद्योग के लिए किसी भी क़ीमत पर अपनी ज़मीनें देने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं, लेकिन उनकी आपत्तियां तथा विरोध को पर्याप्त महत्व न दिए जाने और उसकी पूरी तरह अनदेखी करते हुए उनकी ज़मीनें हथियाने की प्रक्रिया पर अभी भी रोक न लगने से नाराज़ ग्रामीणों, किसानों आदि ने अब एक बार फिर आर-पार आंदोलन के लिए सड़क पर उतरने का मन बना लिया है. इन ग्रामीणों और उनके शांतिपूर्ण आंदोलन में हर तरह का साथ दे रहे देवीदीन गुप्ता, अजय सरावगी, चैतू पटैल, राजेश नायक कहते हैं कि कटनी ज़िले के बरही तहसील अंतर्गत ग्राम बुजबुजा, डोकरिया, खन्ना, बनगंवा में भूमि अधिग्रहण अधिनियम का दुरुपयोग करते हुए ज़बरदस्ती छीनी जा रही कृषि भूमि के ख़िला़फ किसानों व स्थानीय निवासियों ने तय किया है कि सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक पांच स्थानीय लोगों का जत्था प्रतिदिन अनिश्चितकालीन क्रमिक अनशन पर बैठेगा और यह धरना तब तक जारी रहेगा जब तक कि वेलस्पन कंपनी पावर लिमिटेड के पक्ष में जारी की गई भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना रद्द नहीं की जाती.

वेलस्पन कंपनी के पावर प्लांट का विरोध करने के लिए कई बार किसान कलेक्टर के समक्ष उपस्थित होकर अपनी मंशा ज़ाहिर कर चुके हैं, लेकिन लंबे अरसे से चली आ रही इस जंग में प्रशासन ने किसानों को हताश ही किया है. किसानों की आशंकाओं का समाधान तथा उनकी ओर से दर्ज कराई गई आपत्तियों का निराकरण किए बग़ैर ही उन्हें उनकी भूमि से वंचित किया जाना, सा़फ तौर पर किसानों के जीवन को ख़तरे में डालने जैसा ही है. किसानों के साथ प्रशासन का यह रवैया किसानों में रोष का सबब भी बना हुआ है. वेलस्पन कंपनी का हितैषी ज़िला प्रशासन आख़िर सभी किसानों को भुखमरी की कगार पर खड़ा करने पर आतुर क्यों है? क्या सरकार और प्रशासन इस देश में एक और सिंगुर का इंतज़ार कर रहे हैं?

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