इलियास का इफेक्‍ट

पहले अल क़ायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन, फिर उसके सक्रिय सदस्य इलियास कश्मीरी का मारा जाना और अब पाकिस्तान में धड़ाधड़ हो रहे बम धमाकों ने सबको सकते में डाल दिया है. पता नहीं पाकिस्तान को अब भी इस बात का एहसास है या नहीं कि उसने जो वर्षों पहले भारत विरोधी आतंकवाद की फसलें बोई थीं, अब वही फलफूल रही हैं. वहां के राजनीतिज्ञों और राजनयिकों को कम से कम अब तो चेत ही जाना चाहिए, ताकि पाकिस्तान का भविष्य बेहतर हो सके. वैसे मौजूदा हालात को देखकर यह नहीं लगता कि वहां की स्थितियां इतनी जल्दी बदलने वाली हैं, क्योंकि खून-खराबे की जड़ें पाकिस्तान में गहरी हैं.

इससे पहले तालिबान के प्रवक्ता सज्जाद मोहम्मद ने कहा था कि ओसामा बिन लादेन की मौत का बदला लेने के लिए उसने व्यापक स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी है. इससे स्पष्ट है कि पाकिस्तान में आज जो हमले हो रहे हैं वह आतंकियों व चरमपंथियों का पूर्व नियोजित कार्यक्रम है. इस बारे में सरकार को भी समय से पहले चेतावनियों के रूप में पता चल गया था. इसके बावजूद पाकिस्तान में आंतरिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने की कोशिश नहीं की गई, वरना बीती रात हुए बम धमाके को विफल किया जा सकता था. पाकिस्तानी सरकार और राज्य व्यवस्था को समझना होगा कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता और न ही कोई दोस्त और देश होता है. अभी भी बहुत कुछ नहीं बिग़डा है. अगर पाकिस्तान अपनी सलामती चाहता है तो उसे आतंकियों का तंत्र तो़डना होगा, अन्यथा पाकिस्तान को तबाह होने से बचाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन हो जाएगा.

11 जून की देर रात पाकिस्तान के पेशावर शहर में हुए दो बम धमाकों में कम से कम 34 लोगों की मौत हुई और 100 से ज़्यादा लोग घायल हुए हैं. ये धमाके ऐसे इलाक़े में हुए जहां कई राजनीतिक पार्टियों के कार्यालय और सेना से जुड़े लोगों के मकान हैं. बताते हैं कि ये धमाके रिमोट से किए गए. खास बात यह है कि धमाके तब हुए जब अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई इस्लामाबाद आए हुए थे. ग़ौरतलब है कि पिछले महीने पाकिस्तान में अल क़ायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन अमेरिकी कार्रवाई में मारा गया और उसके बाद दक्षिणी वज़ीरिस्तान में हुए अमेरिकी ड्रोन हमले में मुंबई  ब्लास्ट में कथित रूप से शामिल और अल क़ायदा के क़रीबी इलियास कश्मीरी की मौत हो गई थी. तब से पाकिस्तान में चरमपंथियों के हमलों में त़ेजी आ गई है. अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार बताते हैं कि पहले लादेन और बाद में इलियास कश्मीरी के मारे जाने से चरमपंथी बौखला गए हैं. कहा जा रहा है कि 11 जून की देर रात पेशावर में हुए धमाके इलियास का साइड इफेक्ट हैं. यदि समय रहते पाकिस्तानी हुकूमत द्वारा इन चरमपंथियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई तो शायद ये हमले और तेज़ हो सकते हैं. इधर कुछ दिनों से पाकिस्तान में धमाकों की श्रृंखला बढ़ गई है. अभी कुछ ही दिन पहले उत्तर पश्चिमी वज़ीरिस्तान में 100 से ज़्यादा तालिबान चरमपंथियों ने एक सुरक्षा चौकी पर हमला किया था. इसमें 12 तालिबान लड़ाके और आठ सैनिक मारे गए थे. ऐसा पहली बार हुआ था कि जब तालिबान लड़ाकों ने इतनी ताक़त का इस्तेमाल किया था.

इसके अलावा 8 जून को पाकिस्तान के क़बायली इलाक़े उत्तर वज़ीरिस्तान में अमेरिकी मानव रहित विमान के हमले में 15 लोग मारे गए. अमेरिकी ड्रोन विमानों ने चरमपंथियों के एक ठिकाने को निशाना बनाया. इससे चरमपंथियों का ठिकाना पूरी तरह ध्वस्त हो गया. ग़ौरतलब है कि क़बायली इलाक़ों विशेषकर वज़ीरिस्तान में अमेरिकी ड्रोन हमलों में भी अचानक तेज़ी देखने को मिली. पिछले क़रीब एक हफ्ते में यह पांचवा हमला था. इससे पहले दक्षिणी वज़ीरिस्तान में हुए ड्रोन हमले में मुंबई हमलों में कथित रूप से शामिल और अल क़ायदा का क़रीबी इलियास कश्मीरी मारा गया था. वर्ष 2009 के अंत में भी इलियास कश्मीरी के मारे जाने की ख़बर आई थी, लेकिन वह झूठी साबित हुई. इलियास कश्मीरी को पिछले महीने पाकिस्तान के कराची में मेहरान नौसेना अड्डे पर हुए हमले का भी मास्टर माइंड बताया गया था. अमेरिका ने उसका पता बताने वाले को 50 लाख डॉलर इनाम देने की घोषणा की थी. इतने दूरगामी इलाक़े में इलियास कश्मीरी का मारा जाना अमेरिकी गुप्तचर एजेंसियों के बीच प्रभावी होने का सबूत है. चरमपंथी संगठन हरकतुल जेहाद अल इस्लामी भारत, पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान में हुए कई हमलों का ज़िम्मेदार है. इसमें 2006 में कराची में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास पर हुआ हमला भी शामिल है. बताते हैं कि इलियास कश्मीरी के इस संगठन से भी संबंध थे.

उधर, 2 जून को अफ़ग़ानिस्तान से आए चरमपंथियों ने एक मुठभेड़ में कम से कम 23 सुरक्षाकर्मियों को मार दिया. चरमपंथियों ने एक दिन पहले उत्तर पश्चिमी पाकिस्तान के अपर दीर इलाक़े में प्रवेश किया था और एक सुरक्षा चौकी पर हमला किया था. बताते हैं कि इसमें कुछ आम नागरिकों की भी मौत हुई है. इस घटना के बारे में बताया गया था कि अफ़ग़ानिस्तान की सीमा पार करके  दो सौ से अधिक चरमपंथियों ने पाकिस्तान में प्रवेश किया था. वे सैनिकों की यूनीफ़ॉर्म पहने हुए थे. बताया गया कि चरमपंथियों की गोलीबारी में पांच आम नागरिक मारे गए, उनमें दो महिलाएं भी हैं. दो महीने पहले इसी इलाक़े में हुए चरमपंथी हमले में कम से कम 13 जवान मारे गए थे. यह वही क़बायली इलाक़ा है जहां पाकिस्तानी सेना ने दो साल पहले अल क़ायदा और तालिबान के  चरमपंथियों के ख़िलाफ़ व्यापक कार्रवाई की थी.

3 जून को तालिबान ने पाकिस्तान को चेतावनी दी थी कि वह ओसामा की मौत का बदला लेकर रहेगा. यह चेतावनी पाकिस्तान के वरिष्ठ तालिबान नेता मौलवी फकीर मोहम्मद ने दी थी. वैसे पिछले का़फी समय से यह माना जा रहा था कि फकीर ने गुप्त रूप से सरकार के साथ समझौता कर लिया है, इसीलिए वह खामोश है, लेकिन उसकी अचानक इस चेतावनी ने सबके होश उड़ा दिए थे. इससे पहले तालिबान के प्रवक्ता सज्जाद मोहम्मद ने कहा था कि ओसामा बिन लादेन की मौत का बदला लेने के लिए उसने व्यापक स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी है. इससे स्पष्ट है कि पाकिस्तान में आज जो हमले हो रहे हैं वह आतंकियों व चरमपंथियों का पूर्व नियोजित कार्यक्रम है. इस बारे में सरकार को भी समय से पहले चेतावनियों के रूप में पता चल गया था. इसके बावजूद पाकिस्तान में आंतरिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने की कोशिश नहीं की गई, वरना बीती रात हुए बम धमाके को विफल किया जा सकता था. पाकिस्तानी सरकार और राज्य व्यवस्था को समझना होगा कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता और न ही कोई दोस्त और देश होता है. अभी भी बहुत कुछ नहीं बिग़डा है. अगर पाकिस्तान अपनी सलामती चाहता है तो उसे आतंकियों का तंत्र तो़डना होगा, अन्यथा पाकिस्तान को तबाह होने से बचाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन हो जाएगा.