यहां भेदभाव नही चलेगा

अमेरिका ने एक ऐसे कार्यक्रम की घोषणा की है, जिसके  तहत यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले हर व्यक्ति के साथ समान व्यवहार हो. इस संबंध में फेडरल कम्युनिकेशन कमीशन (एफसीसी) के प्रमुख जुलइस जेना चावोसकी ने कहा है कि एक स्वतंत्र और सबको सरल तरीक़े से उपलब्ध होने वाले इंटरनेट की ज़रूरत है. यह पहली बार है कि इस मुद्दे पर खुद एफसीसी के प्रमुख ने अपना पक्ष रखा है. उन्होंने नेटवर्क की निष्पक्षता को लागू करने के लिए दो नए क़ानूनों की पेशकश की है. नए क़ानून लागू होने के बाद इंटरनेट कंपनियों को निष्पक्ष नेटवर्क के सिद्धांत के तहत काम करना होगा. एटलांटिक के दोनों तऱफ के नेटवर्क इसी बात को लेकर बहस करते रहे हैं कि इंटरनेट की सुविधा दो तरह की होनी चाहिए. जो इसके लिए पैसे दे सकते हैं, उनकी प्राथमिकता होनी चाहिए उन लोगों के ऊपर, जो इसके लिए खर्च नहीं कर सकते.

दरअसल, कंपनियां वीडियो फाइलों के ट्रांसफ़र जैसी प्रक्रियाओं को रोकने का काम करती हैं, क्योंकि इससे उनके बैंडविथ पर असर पड़ता है, लेकिन अब वे ऐसा नहीं कर पाएंगी. गूगल और यूट्यूब जैसी इंटरनेट कंपनियों ने इसका स्वागत किया है, लेकिन कई ऐसी कंपनियां हैं, जो इससे खुश नहीं होंगी. एफसीसी प्रमुख चावोसकी का कहना था कि इंटरनेट सर्विस देने वाली कंपनियां किसी भी ऐसे ट्रैफिक को नहीं रोक सकतीं, जो क़ानूनन सही हो. दूसरी बात यह कि उन्हें पारदर्शी होना होगा. चावोसकी का कहना था कि इस पूरी प्रक्रिया में एफसीसी को एक स्मार्ट पुलिस की भूमिका निभानी होगी. उन्होंने कहा कि यह सरकार द्वारा इंटरनेट के नियंत्रण का विषय नहीं है, बल्कि यह उस रास्ते के लिए उचित नियम बनाने की बात है, जिन्हें वे कंपनियां खुद पर लागू करें, जो इंटरनेट के उपयोग का नियंत्रण करती हैं.

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