भारत सालों से पाकिस्तान में आतंकी अड्डे और आतंकियों की शरणस्थली होने की बात कहता आ रहा है, लेकिन अमेरिका सहित दुनिया को इस बात में तब दम नज़र आया जब ओसामा बिन लादेन के ठिकाने के बारे में पता चला. अब चीन के जिनजियांग प्रांत में आतंकी हमले हुए तो वह भी पाकिस्तान पर आरोप लगा रहा है. चीन के जिनजियांग प्रांत में हिंसक घटनाओं में 20 लोगों की मृत्यु हो गई. मरने वालों में एक पुलिस अधिकारी भी शामिल था. 30 जुलाई की रात को पाक अधिकृत कश्मीर के पास स्थित चीन के एक शहर काश्गर में एक ट्रक ड्राइवर की हत्या कर वाहन पर क़ब्ज़ा कर लिया गया और लोगों को रौंद डाला गया, जिसमें सात लोगों की मौत हो गई. इसके अगले दिन ही इसी शहर में एक बम विस्फोट में 7 और लोगों की मौत हो गई. यह विस्फोट एक रेस्तरां में किया गया. इस विस्फोट को अंजाम देने वाले 5 लोगों को पुलिस ने मार गिराया. ये लोग ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट के सदस्य बताए गए हैं. काश्गर प्राधिकरण का कहना है कि इन 5 लोगों में एक व्यक्ति को पाकिस्तान के एक शिविर में बम बनाने का प्रशिक्षण दिया गया था.
पहले भी चीन ने पाकिस्तान को उइगर विद्रोहियों की मदद न करने और अपने यहां के प्रशिक्षण शिविरों में उन्हें प्रशिक्षण लेने से रोकने के लिए कार्रवाई करने की मांग की है. चीन ने पाकिस्तान के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास भी किया था और इसके पीछे उसका जो हित था वह यही था कि बाद में दोनों देशों की साझा कार्रवाई द्वारा ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट का खात्मा किया जा सकेगा, लेकिन अभी तक न तो पाकिस्तान ने इस पर कोई विशेष ध्यान दिया और न ही चीन ने पाकिस्तान का साथ छोड़ा.
इससे पहले भी जिनजियांग प्रांत में साल 2009 में भीषण दंगे हुए थे, जिसमें 200 लोग मारे गए थे. इस घटना के बाद चीन ने उइगर मुस्लिम अलगाववादियों के ख़िलाफ़ अभियान शुरू कर दिया था. इसी साल 18 जुलाई को प्रांत के होतान शहर में 14 दंगाई उस समय मारे गए, जब उन्होंने एक पुलिस थाने को निशाना बनाने की कोशिश की थी. लेकिन यह पहली बार है जब चीन ने चरमपंथी शिविरों के मामले में अपने सहयोगी पाकिस्तान पर उंगली उठाई हो. चीन का काश्गार प्रांत पाकिस्तान कश्मीर से सटा हुआ है और दोनों देशों के बीच व्यापार इसी सीमा से होता है. इसी के साथ ही चीन की ओर से पाकिस्तान पर आतंकवादियों को संरक्षण देने की बात कही गई. इसके साथ ही ऐसा लगने लगा कि पाकिस्तान और चीन के बीच रिश्तों में खटास आ जाएगी. इस बीच पाकिस्तान की तऱफ से भी बयान आने लगे कि वह चीन के जिनजियांग प्रांत में सक्रिय आतंकवादियों के विरुद्ध कार्रवाई में वह चीन के साथ है. पाकिस्तान ने चीन की ओर से लगे आरोपों पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्तकी है और कहा है कि आतंकवाद की सभी घटनाएं निंदनीय हैं और कहा कि पाकिस्तान ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट के ख़िलाफ़ चीन की सरकार का समर्थन और सहयोग करता रहेगा. यही नहीं पाकिस्तान ने चीन के साथ कूटनीतिक रिश्ते सुधारने के लिए अपनी खुफिया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख ले. जे. शुजा पाशा को चीन के दौरे पर भेज दिया. यह गोपनीय दौरा है, जिसकी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है और शायद इसी का नतीजा है कि जिनजियांग में सक्रिय चरमपंथियों के पाकिस्तान से आने की बात करने के कुछ ही दिन बाद चीन ने चरमपंथ के खिलाफ़ जंग में पाकिस्तान को अपना साथी बताते हुए पाकिस्तान की सराहना की है. चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि पाकिस्तान चरमपंथ के खिलाफ़ कार्रवाई में चीन का एक मज़बूत साथी है. चीनी विदेश विभाग से जारी इस वक्तव्य में उस बयान का कोई ज़िक्र नहीं है, जिसमें चीन के काश्गर क्षेत्र के अधिकारियों ने चीन में सक्रिय चरमपंथियों के पाकिस्तान में प्रशिक्षण पाने की बात कही थी.
ऐसा नहीं है कि चीन में पहली बार ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट ने कोई हिंसक कार्रवाई की है और उसके तार पाकिस्तान से जोड़े गए हैं. पहले भी चीन ने पाकिस्तान को उइगर विद्रोहियों की मदद न करने और अपने यहां के प्रशिक्षण शिविरों में उन्हें प्रशिक्षण लेने से रोकने के लिए कार्रवाई करने की मांग की है. चीन ने पाकिस्तान के साथ संयुक्तसैन्य अभ्यास भी किया था और इसके पीछे उसका जो हित था वह यही था कि बाद में दोनों देश की साझा कार्रवाई द्वारा ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट का खात्मा किया जा सकेगा. लेकिन अभी तक न तो पाकिस्तान ने इस पर कोई विशेष ध्यान दिया और न ही चीन ने पाकिस्तान का साथ छोड़ा. चीन को भी पता है कि वह पाकिस्तान को सहयोग देना नहीं छोड़ सकता, क्योंकि पाकिस्तान के साथ संबंध वह इस कारण नहीं रखता कि इस देश से उसे कोई विशेष लगाव है बल्कि उसे भारत के विरुद्ध एक हथियार के रूप में देखता है. जब तक चीन भारत के विरुद्ध अपना वैमनस्य जारी रखेगा तब तक उसे पाकिस्तान के सहयोग की आवश्यकता रहेगी और वह पाकिस्तान के विरुद्ध कोई कड़ी कार्रवाई नहीं कर सकता. लेकिन अंतरराष्ट्रीय राजनीति की यह मांग है कि चीन पाकिस्तान को ऐसा कहे और चूंकि अभी पाकिस्तान पर अमेरिका ने भी कुछ गंभीर आरोप लगाए हैं, इसी कारण पाकिस्तान भी चीन के इस आरोप को गंभीरता से ले रहा है.
चीन में अल्पसंख्यकों की स्थिति
सूचना तकनीक के युग में भी यह जान पाना आसान नहीं है कि चीन में अल्पसंख्यकों की स्थिति क्या है? वजह, चीन का सूचना प्रवाह पर क़डी नज़र का होना है. चीन के अल्पसंख्यकों के बारे में बाहरी दुनिया को कम ही पता चल पाता है. चीन इस मामले में भी साज़िश करने से पीछे नहीं रहता. चीनी सरकार कई बार तस्वीरों के ज़रिए यह साबित करती रही है कि अल्पसंख्यक समुदाय के लोग पारंपरिक वेशभूषा में कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल होते हैं. लेकिन वारविक विश्वविद्यालय में पूर्वी एशिया मामलों के जानकार पीटर फर्डीनेंड का कहना है कि चीन की आर्थिक प्रगति ने पिछले कुछ वर्षों में नस्लीय संबंधों की परिभाषा बदल डाली है. सुधारों के कारण लोगों के आने जाने पर लगे कई प्रतिबंध हटे हैं और अब अल्पसंख्यक लोग शहरों तक आ रहे हैं तथा अपनी बात रख रहे हैं. अब चीन की संसद में भी अल्पसंख्यक लोग जा रहे हैं और सरकार की कई नीतियों का उन्होंने विरोध भी किया है. कई प्रांतों में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को नौकरियों में आरक्षण मिल रहा है और जन्म संबंधी कठोर नीतियां उन पर लागू नहीं हैं. अल्पसंख्यकों को इस तरह के फायदे देने से बहुसंख्यक हान समुदाय का़फी नाराज़ भी है. हान समुदाय बाक़ी अन्य समुदायों को असभ्य मानते हैं और उन्हें चीन के लिए बड़ा खतरा भी समझते हैं. एक और समस्या यह हुई है कि हान लोगों के पूरे चीन में तेज़ी से फैलने के कारण अल्पसंख्यक लोगों की स्थिति खराब हो रही है. ख़ास कर तिब्बत और जिनजियांग प्रांत में जहां धार्मिक और नस्ली तनाव सबसे अधिक है. सरकार को डर है कि इस तरह के तनाव से चीन की भौगोलिक एकता को ख़तरा हो सकता है. वर्तमान समय में चीन के लिए पूरी एकता और अखंडता बनाए रखना और भी ज़रूरी हो गया है, क्योंकि अब चीन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी शक्ति के रूप में खूद को तक़रीबन स्थापित कर चुका है.
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