ओलंपिक 2012 एक साल पहले तैयार है लंदन

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याद कीजिए राष्ट्रमंडल खेल 2010 और मेज़बान के रूप में भारत और उसकी तैयारियों को. तैयारी ऐसी कि खेल खत्म होने के बाद भी कई निर्माण कार्य चलते रहे. बजट सुरसा के मुंह की तरह बढ़ता चला गया. अब ज़रा देखिए लंदन ओलंपिक 2012 की ओर. अभी एक साल का समय बाक़ी है, लेकिन खेल की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं, स्टेडियम में रौनक़ है और टिकट बिक चुके हैं. आयोजकों के मुताबिक़, सारा काम तय समय सीमा और तय बजट में हुआ है. दरअसल, यह अंतर अपने आप में एक बड़ी कहानी कह जाता है. एक दिलचस्प अंतर यह कि एक ओर लंदन में ओलंपिक पार्क बनने की वजह से जहां पूर्वी लंदन का विकास हुआ, वहीं राष्ट्रमंडल खेल के नाम पर दिल्ली से ग़रीबों को भगाने का काम किया गया था.

राष्ट्रमंडल खेल में घपले के आरोपी जेल में हैं. उन्हें उनकी करतूतों की क्या सज़ा मिलेगी, यह अदालत तय करेगी. अभी बात लंदन ओलंपिक की. लंदन के पूर्वी हिस्से में ओलंपिक पार्क बनाया गया है. इस वजह से शहर के इस पिछड़े क्षेत्र की दशा और दिशा ही बदल गई है. साथ ही लंदन के ज़्यादातर दर्शनीय और ऐतिहासिक स्थलों का इस्तेमाल खेलों के आयोजन स्थल के लिए किया जाएगा.

खैर, राष्ट्रमंडल खेल में घपले के आरोपी जेल में हैं. उन्हें उनकी करतूतों की क्या सज़ा मिलेगी, यह अदालत तय करेगी. अभी बात लंदन ओलंपिक की. लंदन के पूर्वी हिस्से में ओलंपिक पार्क बनाया गया है. इस वजह से शहर के इस पिछड़े क्षेत्र की दशा और दिशा ही बदल गई है. साथ ही लंदन के ज़्यादातर दर्शनीय और ऐतिहासिक स्थलों का इस्तेमाल खेलों के आयोजन स्थल के लिए किया जाएगा. ओलंपिक खेलों के समय प्रत्येक दिन 12 हज़ार पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे, लेकिन पुलिस अधिकारियों का कहना है कि भारी सुरक्षा व्यवस्था की वजह से आम नागरिकों या सैलानियों को कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी. अधिकारियों के मुताबिक़, सुरक्षा के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि सुरक्षा व्यवस्था के कारण किसी को कोई दिक्क़त न हो. इसके साथ ही लंदन ओलंपिक की मशाल यात्रा के रास्ते के बारे में भी घोषणा कर दी गई है. महत्वपूर्ण बात यह है कि इस बार यह मशाल यात्रा स़िर्फ मेज़बान देश ब्रिटेन में ही घुमाई जानी है. दरअसल, बीजिंग ओलंपिक 2008 की मशाल यात्रा के दौरान कई देशों में बाधा पहुंचाने की कोशिशों की वजह से आयोजकों ने मशाल को दूसरे देशों में घुमाने की जगह स़िर्फ ब्रिटेन में ही घुमाने का फैसला किया है. लंदन ओलंपिक की मशाल ब्रिटेन में 1300 किलोमीटर की यात्रा करेगी और आठ हज़ार लोग इसे लेकर दौड़ेंगे. यात्रा ओलंपिक खेलों के जन्मस्थल ग्रीस से मशाल लाए जाने के एक दिन बाद 19 मई, 2012 को शुरू होगी.

बहरहाल, लंदन ओलंपिक से भारतीयों को भी आशाएं हैं. पिछले कुछ सालों में, खासकर निशानेबाज़ी, कुश्ती और भारोत्तोलन में भारतीय खिलाड़ियों का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन ठीकठाक रहा है. राष्ट्रमंडल खेलों में भी खिलाड़ियों का प्रदर्शन सराहनीय रहा. इस लिहाज़ से इस बार के ओलंपिक से उम्मीद लगाई जा सकती है. भारतीय निशानेबाज़ गगन नारंग 2012 के लंदन ओलंपिक खेलों के लिए क्वालीफाई करने वाले पहले भारतीय भी बन गए हैं. नारंग को यह उपलब्धि म्यूनिख विश्व चैंपियनशिप में 10 मीटर एयर राइफल प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीतकर मिली है. इसके अलावा शॉटपुट एथलीट ओम प्रकाश करहाना भी लंदन ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर गए हैं. ओम प्रकाश को यह उपलब्धि हंगरी के आईएएएफ प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतने की वजह से मिली है. ओम प्रकाश ने स्वर्ण पदक जीतने पर कहा कि खराब मौसम और बारिश के कारण थ्रो करने में मुश्किल हो रही थी, लेकिन इसके बावजूद मैं 20.04 मीटर की दूरी तय कर स्वर्ण पदक जीतने में सफल रहा. मुझे पूरा भरोसा है कि मैं विश्व चैंपियनशिप के बाद लंदन ओलंपिक खेलों में पदक जीतने में सफल रहूंगा. ज़ाहिर है, खिलाड़ियों के हौसले बुलंद हैं और वे जी-जान से खेलने को तैयार भी हैं, लेकिन जिस देश में खेल में भी राजनीति होती हो, वहां बहुत ज़्यादा उम्मीद की गुंजाइश नहीं होती. साथ ही पिछले दिनों डोपिंग के चलते कई एथलीटों के दामन दाग़दार हुए हैं. ऐसे में एथलीटों के मनोबल पर विपरीत असर पड़ना स्वाभाविक है. बावजूद इसके बेहतर की आशा करने में क्या हर्ज है?

स़िर्फ ब्रिटेन में घूमेगी मशाल

लंदन ओलंपिक 2012 की मशाल यात्रा स़िर्फ ब्रिटेन में ही संपन्न होनी है. बाक़ी देशों में इसे न ले जाने का फैसला किया गया है. यह मशाल ब्रिटेन में 1300 किलोमीटर की यात्रा करेगी. क़रीब आठ हज़ार लोग इस मशाल को लेकर दौड़ेंगे. मशाल यात्रा 19 मई, 2012 को शुरू होगी. 70 दिनों की यह मशाल यात्रा ब्रिस्टल, कार्डिफ, लिवरपूल, बेलफास्ट, ग्लास्गो, ऐबरडीन, न्यूकासल, मैनचेस्टर, शेफील्ड, नॉटिंघम, ऑक्सफोर्ड, साउथैम्पटन और डोवर शहरों में जाएगी. प्रत्येक दिन क़रीब 12 घंटे की यात्रा होगी और अंत में 27 जुलाई, 2012 को यह लंदन के ओलंपिक स्टेडियम पहुंचेगी. इसी दिन ओलंपिक खेलों का विधिवत शुभारंभ हो जाएगा. ओलंपिक मशाल की परंपरा प्राचीन ग्रीस से शुरू हुई थी, जहां संदेशवाहकों को मशाल लेकर प्रतियोगिता के समय की जानकारी देने के लिए भेजा जाता था. इस यात्रा का एक उद्देश्य बाक़ी देशों से खेलों के दौरान युद्ध स्थगित रखने की अपील करना भी होता था.

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