साहित्य जगत में तकनीकी क्रांति

वर्तमान समय तकनीक का युग हो गया है. इससे कोई भी क्षेत्र अछूता नहीं रह गया है. भूमंडलीकरण की प्रक्रिया में दुनिया बहुत तेज़ी से सिकुड़ती और नज़दीक आती जा रही है. इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों में इंटरनेट एक ऐसा माध्यम हैं, जहां कथा साहित्य बहुतायत में उपलब्ध हो सकता है. हर क्षेत्र में तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. यही हमें साहित्य में भी देखने को मिल रहा है. पहले काम घंटों में भी पूरे नहीं होते थे, लेकिन अब मिनटों, सेकंडों में पूरे हो जाते हैं और यह केवल संभव हुआ इंटरनेट की दुनिया से. पुराने समय में गंभीर पाठक किताबों और लाइब्रेरी पर ही निर्भर रहते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं रहा. अब इंटरनेट और मोबाइल की दुनिया ने इस क्षेत्र में बहुत तेजी से प्रगति की है. अब पाठक लाइब्रेरियों में समय न नष्ट करके घर पर बैठकर इंटरनेट पर साहित्य के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं. यह एक विरोधाभास है कि जिस इंटरनेट पर हम गंभीर पठन-पाठन का विरोधी होने का आरोप लगाते हैं, वही इंटरनेट आज हिंदी साहित्य के उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. इंटरनेट ने हिंदी साहित्य को आज चर्चा का व्यापक दायरा दिया है.

कुछ अच्छा पढ़ने और अच्छा लिखने की आदम जिजीविषा को निश्चित ही इंटरनेट ने नया रूप दे दिया है. इंटरनेट पर साहित्य होने से बच्चों को कविता दिखाकर सिखाना सरल हो गया है. आप अपने किसी मनपसंद कवि की कविता सुन और देख सकते हैं. क्या आप आज तक इस दुनिया से दूर हैं? देर मत कीजिए, ऊपर दिए गए किसी भी वेब पते पर जाइए और साहित्य की इस नई दुनिया में शामिल हो जाइए.

ऐसे समय में जब बदलाव की आहट आपकी हर धड़कन में शामिल होती जा रही है, साहित्य का परंपरागत चेहरा भी बदलाव के रंगों से रंगता नज़र आ रहा है. अकाल मृत्यु की तमाम घोषणाओं के बीच हिंदी साहित्य न स़िर्फ चुपचाप नई ज़मीन पर उग रहा है, बल्कि अपने पंख भी पसार रहा है. साहित्य अब किताबों-पत्रिकाओं के ठोस पन्नों के साथ इंटरनेट के व्यापक दायरे में समा चुका है. लोग फेसबुक के अपने वॉल पर फ़ैज की नज़्मों को, सर्वेश्वर, शमशेर और मुक्तिबोध की कविताओं को शेयर कर रहे हैं, जी-मेल के स्टेटस मैसेज में किसी कविता के अंश को चस्पा कर रहे हैं. साहित्य को समर्पित ऐसी कई वेबसाइट्‌स, ब्लॉग और हैं, जो दुनिया भर में लोकप्रिय हैं. इंटरनेट कविता, कहानी और साहित्य केंद्रित बहसों के साथ ही साहित्यिक गॉसिपों के भी जीवंत माध्यम के रूप में उभरा है. आज कई साहित्यकार अपने ब्लॉगों के सहारे सक्रिय होते जा रहे हैं. कुमार अंबुज, उदय प्रकाश, गीत चतुर्वेदी, प्रभात रंजन जैसे साहित्यकार ब्लॉग के सहारे अपने पाठकों के साथ लगातार जुड़े हुए हैं. आज से दस वर्ष पहले तक साहित्यिक बहसों का मुख्य माध्यम लघु पत्रिकाएं हुआ करती थीं. अब यही काम वेबसाइटों और ब्लॉगों द्वारा किया जा रहा है. साहित्य को हर किसी के लिए सुलभ बनाने में वेबसाइटों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. इसमें कविता कोश की भूमिका खास तौर पर ग़ौर करने लायक़ है. क़रीब पांच साल पहले शुरू किए गए इस वेब कविता इंसाइक्लोपीडिया ने कविता पढ़ने का पुराना तरीक़ा ही बदल दिया है.

इस पर आज हिंदी के अलावा अन्य देशी-विदेशी भाषाओं में अनुवाद की गईं 42 हज़ार से ज़्यादा कविताएं हैं. तक़रीबन 1500 कवियों के पेज हैं. दिलचस्प यह है कि हिंदी कविताओं के इस वेब संकलन को तैयार करने का काम किसी साहित्यकार ने नहीं किया और न साहित्य को बढ़ावा देने की ज़िम्मेदारी निभाने वाली संस्थाओं ने किया. कविता कोश की शुरुआत करने वाले ललित कुमार पेशे से आईटी प्रोफेशनल हैं. विदेशों में रहे ललित ने कभी अपने शौक के कारण इंटरनेट पर बिखरी कविताओं को निजी साइट पर संकलित करना शुरू किया था. ललित बताते हैं, मुझे कविताएं पढ़ने का काफ़ी शौक है. जब मैं इंटरनेट पर किसी कविता को खोजता था, तब कई बार मुझे वे मिल भी जाती थीं, कई बार मुझे निराशा का सामना करना पड़ता था. कई बार ऐसा भी हुआ कि जो कविता मैं खोजकर थक चुका होता था, वह अचानक मेरे सामने हाज़िर हो जाती थी. तब मैंने नेट पर उपलब्ध कविताओं का संकलन करना शुरू किया. यह सब निजी शौक की तरह चलता रहा. इस तरह ललित के निजी प्रयासों से नेट पर उपलब्ध कविताओं को पहली बार एक छतरी के नीचे लाया गया. जब काफ़ी कविताएं इकट्ठा हो गईं, तब कहीं जाकर हिंदी कविताओं के व्यापक वेब संकलन को तैयार करने का विचार आया.

साहित्य को इंटरनेट पर उपलब्ध कराने का ऐसा ही गंभीर प्रयास वर्धा स्थित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय की तरफ़ से किया जा रहा है. सांस्थानिक सहयोग मिलने के कारण काफ़ी कम समय में विश्वविद्यालय की साइट हिंदी समय डॉट कॉम पर आज कहानी, उपन्यास, कविता, निबंध, आलोचना और पत्र जैसी विधाओं की सामग्री का अच्छा-खासा संकलन तैयार हो गया है. इस साइट पर केदारनाथ अग्रवाल के सभी कविता संग्रह, अज्ञेय रचना संचयन, कबीर ग्रंथावली, मोहन राकेश संचयन, हरिऔध समग्र, प्रेमचंद समग्र, भारतेंदु समग्र, रामचंद्र शुक्ल समग्र जैसे रचना संचयन एक जगह मौजूद हैं. यहां विभाजन पर लिखी गई चुनिंदा कहानियों को पढ़ना भी एक सुखद एहसास हो सकता है. पीपुल्स पब्लिशिंग हाउस से प्रकाशित 1950 से लेकर 2010 तक की चर्चित कहानियों का दशकवार संकलन भी इस साइट पर मौजूद है. इस पर आप कई ई-पुस्तकों को भी पढ़ सकते हैं. कविताकोश डॉट ऑर्ग और हिंदीसमय डॉट कॉम के अलावा कई ब्लॉग और वेबसाइट हिंदी साहित्य को आम पाठक तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं. अगर आपको अच्छा लिखने-पढ़ने का शौक है तो इंटरनेट पर बीसियों ऐसे ठिकाने हैं, जो आपके लिए सुकून भरे आरामगाह साबित हो सकते हैं. इन ठिकानों में एक बार घुस जाने के बाद समय के सारे बंधन आपके लिए टूट सकते हैं. कुछ अच्छा पढ़ने और अच्छा लिखने की आदम जिजीविषा को निश्चित ही इंटरनेट ने नया रूप दे दिया है. इंटरनेट पर साहित्य होने से बच्चों को कविता दिखाकर सिखाना सरल हो गया है. आप अपने किसी मनपसंद कवि की कविता सुन और देख सकते हैं. क्या आप आज तक इस दुनिया से दूर हैं? देर मत कीजिए, ऊपर दिए गए किसी भी वेब पते पर जाइए और साहित्य की इस नई दुनिया में शामिल हो जाइए.

सोनिका गुप्‍ता

पत्रकारीय जीवन का पहला पड़ाव है चौथी दुनिया। हिंदी सिनेमा और सितारों पर पैनी नज़र रखती हैं। उनका गंभीर विश्लेषण करती हैं और यह बता पाने में सक्षम हैं कि कहां ऊंच-नीच हो रहा है। अपने साथ-साथ दर्शकों की भी समझदारी बढ़ाना इनका लक्ष्य है।
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सोनिका गुप्‍ता

पत्रकारीय जीवन का पहला पड़ाव है चौथी दुनिया। हिंदी सिनेमा और सितारों पर पैनी नज़र रखती हैं। उनका गंभीर विश्लेषण करती हैं और यह बता पाने में सक्षम हैं कि कहां ऊंच-नीच हो रहा है। अपने साथ-साथ दर्शकों की भी समझदारी बढ़ाना इनका लक्ष्य है।