धर्मनगरी हरिद्वार में गंगा और पर्यावरण की रक्षा की मांग को लेकर शहादत देने वाले युवा संत निगमानंद की समाधि की मिट्टी अभी सूखी भी नहीं थी कि मातृ सदन के दूसरे युवा संत स्वामी पूर्णानंद सरस्वती ने अपने गुरुभाई की मौत के लिए ज़िम्मेदार लोगों को सज़ा दिलाने और गंगा रक्षा के संकल्प के साथ सत्याग्रह शुरू कर दिया. गंगा की रक्षा के लिए मातृ सदन अब तक दो शहादत दे चुका है. पहले उसने संत स्वामी गोकुलानंद को खोया, जो कालीढूंगी के जंगलों में मृत पाए गए थे. वह अपने गुरु की भावना के अनुरूप गंगा की रक्षा के लिए सत्याग्रह करके अर्से से खनन मा़फिया की आंखों की किरकिरी बने हुए थे. इसके बाद युवा संत निगमानंद ने अपनी जान दे दी. वह गंगा में हो रहे अवैध खनन के मामले को लेकर बीती 19 फरवरी से अनशन पर थे. खनन मा़फियाओं ने एक महिला स्वास्थ्यकर्मी (नर्स) को माध्यम बनाकर उन्हें मौत के घाट उतार दिया. इस नर्स ने इलाज के नाम पर निगमानंद को ज़हर का इंजेक्शन दे दिया. इसके बाद निगमानंद कोमा में चले गए और अनशन के 115वें दिन उनका निधन हो गया.
पूर्व गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती कहते हैं कि निगमानंद के मामले में सरकार को सीबीआई जांच कराकर हत्यारों को सज़ा दिलाने में देरी नहीं करनी चाहिए, अन्यथा अपराधी पकड़ से बाहर हो जाएंगे. उत्तरकाशी के गीतास्वामी दिव्यधाम के पीठाधीश्वर स्वामी कमलेशानंद सरस्वती का कहना है कि संत निगमानंद की मौत के लिए ज़िम्मेदार लोगों की शीघ्र गिरफ्तारी होनी चाहिए और साथ ही गंगा को खनन मा़फियाओं के चंगुल से आज़ाद कराने के लिए ठोस क़दम उठाए जाने चाहिए.
राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. हरक सिंह रावत ने एक पत्रकार वार्ता के दौरान संत निगमानंद को ज़हर देने का आरोप लगाते हुए निशंक सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित किया था, लेकिन सरकार के कानों पर जूं नहीं रेंगी. इस मामले को मुख्यमंत्री ने पूरी तरह अनसुना कर दिया. जनता के हितों के लिए किए जाने वाले विभिन्न आंदोलनों से संत निगमानंद का गहरा नाता रहा है. इससे पहले भी वह दो बार अनशन कर चुके थे. उन्हें कतई पता नहीं था कि उनका यह अनशन उनके लिए काल सिद्ध होगा. अभी तक उनके हत्यारों के ख़िला़फ कोई ठोस कार्रवाई न होते देखकर उनके गुरुभाई एवं युवा संत स्वामी पूर्णानंद सरस्वती ने सत्याग्रह के मार्ग पर चलने का निर्णय लिया. अनशन के तीसरे दिन उत्तराखंड कांग्रेस के अध्यक्ष यशपाल आर्या, जयराम संस्थाओं के दिव्यपीठाधीश्वर ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी एवं अन्य कांग्रेसियों ने मातृ सदन पहुंच कर उनका समर्थन किया. कांग्रेस इस प्रकरण पर पहले भी ज़िला स्तर पर धरना-प्रदर्शन कर चुकी है.
मुख्यमंत्री निशंक ने मामले की जांच सीबीआई से कराने की घोषणा की थी, जो अभी तक हवा-हवाई सिद्ध हुई. आर्या ने कहा कि सूबे में संत विरोधी सरकार काम कर रही है, जिसका खनन मा़फियाओं से गहरा नाता है. उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति रहे ब्रह्मचारी का आरोप है कि राज्य सरकार धर्म, संस्कृत और संस्कृति विरोधी आचरण में संलिप्त है और संत विरोधी हरकतें कर रही है. हरक सिंह रावत का मानना है कि सरकार ने इस मामले में जो थोड़ी-बहुत कार्रवाई की, वह भी सही दिशा में नहीं की. मुख्यमंत्री को सीबीआई जांच के लिए भारत सरकार के सचिव अथवा पीएमओ को पत्र भेजना चाहिए था, लेकिन उन्होंने सीधे सीबीआई को लिख भेजा. इसी के चलते जांच आज तक शुरू नहीं हो पाई. रावत का मानना है कि सरकार एक ओर हरिद्वार में अवैध खनन बंद करने की बात करती है, वहीं इसके लिए संतों को अपनी क़ुर्बानी देनी पड़ रही है.
ज़िला प्रशासन मातृ सदन के संस्थापक संत शिवानंद सरस्वती पर युवा संतों को बरगला कर आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का आरोप लगाता रहा है. संत पूर्णानंद के अनशन ने उसके इस आरोप का भी जवाब दे दिया है. मातृ सदन के इस सत्याग्रही संत के चेहरे पर ग़ज़ब का तेज और आत्मविश्वास झलक रहा है. सत्याग्रह को हिंसा के ज़रिए कुचला नहीं जा सकता, मातृ सदन के इस तीसरे संत ने पुन: सत्याग्रह की राह पर चलकर यही बताने की कोशिश की है. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी जब उत्तराखंड आए थे, उसी समय संत निगमानंद की शहादत हुई थी. गडकरी इस संत की समाधि पर न जाकर परिवार सहित प्रकृति का आनंद लूटते रहे और फिर वापस चले गए. पूर्व गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती कहते हैं कि निगमानंद के मामले में सरकार को सीबीआई जांच कराकर हत्यारों को सज़ा दिलाने में देरी नहीं करनी चाहिए, अन्यथा अपराधी पकड़ से बाहर हो जाएंगे. उत्तरकाशी के गीतास्वामी दिव्यधाम के पीठाधीश्वर स्वामी कमलेशानंद सरस्वती का कहना है कि संत निगमानंद की मौत के लिए ज़िम्मेदार लोगों की शीघ्र गिरफ्तारी होनी चाहिए और साथ ही गंगा को खनन मा़फियाओं के चंगुल से आज़ाद कराने के लिए ठोस क़दम उठाए जाने चाहिए.
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