मरने वाला अकेला नहीं मरता. उसके साथ मरती हैं कई और ज़िंदगियां. ताउम्र, तिल-तिलकर. दिल्ली बम धमाके में जिन 13 लोगों की मौत हुई, उनके परिवार वालों की आंखों से निकलते आंसू देखकर किसी का भी कलेजा मुंह को आ जाए. पीएम से लेकर भविष्य में होने वाले पीएम तक अस्पताल पहुंचे, लेकिन व्यवस्था किस क़दर संवेदनशून्य हो सकती है, इसका नमूना शव लेने अस्पताल पहुंचे परिवारीजनों को तब हुआ, जब उनसे अस्पताल प्रशासन ने शव के लिए क़फन और 2 मीटर प्लास्टिक बाज़ार से खरीद कर लाने को कहा. बहरहाल, सवाल यही है कि आखिर कब तक ये धमाके होते रहेंगे, आ़खिर चूक कहां हो रही है?
तीन दिनों के बाद भी जांच के नाम पर एनआईए (नेशनल इंटेलिजेंस एजेंसी) देश के सामने कुछ खास बता पाने की हालत में नहीं थी. बहरहाल, इस धमाके में पीईटीएन का प्रयोग पहली बार हुआ और यह खबर आई कि इसका इस्तेमाल स़िर्फ सेना में होता है और पड़ोसी देश या किसी और देश से इसकी आपूर्ति की भी आशंका जताई गई. दूसरी ओर सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ खुफिया विभाग की पोल भी इस धमाके से खुल गई. तीन महीने पहले ही दिल्ली हाईकोर्ट के पास एक धमाका हुआ था.
सवाल यह है कि क्या हमारी खु़फिया एजेंसियों को इसकी खबर थी? सुरक्षा में तैनात जवान कहां थे? आतंकवादी वहां आराम से आते हैं, विस्फोटक (अटैची में) रखकर चले जाते हैं. आ़खिर उस व़क्त पुलिस वाले कहां थे? बाद में इनके स्केच जारी कर दिए जाते हैं. आ़खिर इन आतंकियों को भागने के लिए सेफ पैसेज कहां से मिल गया? सबसे बड़ा सवाल यह है कि आ़खिर क्यों इन आतंकियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे बार-बार धमकी देकर धमाके कर देते हैं? क्या उन्हें क़ानून और सज़ा का डर नहीं है? ज़ाहिर है, डर नहीं है. और हो भी क्यों? आतंकवाद के खिला़फ टाडा और पोटा जैसे क़ानून थे, जिन्हें खत्म कर दिया गया. अब आतंक के खिला़फ एक ऐसा क़ानून है, जिसकी वजह से दोषी साबित हो चुके आतंकियों को भी सज़ा नहीं मिल पाती. मुंबई में आतंकी हमले के बाद सरकार की ओर से की गई घोषणाओं पर अब तक अमल नहीं हो सका है. ़खु़िफया सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए नेटग्रिड बनाने की बात थी, वह अब तक नहीं बनाया जा सका है. खु़फिया विभाग में अधिकारियों की कमी अभी भी है.
दिल्ली हाईकोर्ट के रिसेप्शन के पास हुए विस्फोट के तुरंत बाद सरकार का बयान आता है कि इसके पीछे किसका हाथ है, अभी नहीं बता सकते. कुछ ही समय बाद हूजी (आतंकी संगठन) ने इस विस्फोट की जिम्मेदारी ले ली. फिर नाम आया इंडियन मुजाहिदीन का. मेल में बताया गया कि इस धमाके में हूजी (हरकत उल जेहादी इस्लामी) की नहीं, इंडियन मुजाहिदीन की भूमिका है. आईएम ने धमाके की ज़िम्मेदारी खुद लेने के साथ धमकी भी दी कि अभी और विस्फोट होंगे. तीन दिनों के बाद भी जांच के नाम पर एनआईए (नेशनल इंटेलिजेंस एजेंसी) देश के सामने कुछ खास बता पाने की हालत में नहीं थी. बहरहाल, इस धमाके में पीईटीएन का प्रयोग पहली बार हुआ और यह खबर आई कि इसका इस्तेमाल स़िर्फ सेना में होता है और पड़ोसी देश या किसी और देश से इसकी आपूर्ति की भी आशंका जताई गई. दूसरी ओर सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ खुफिया विभाग की पोल भी इस धमाके से खुल गई. तीन महीने पहले ही दिल्ली हाईकोर्ट के पास एक धमाका हुआ था. हालांकि उसमें जान-माल की कोई क्षति नहीं हुई थी. फिर तीन महीने बाद एक और धमाका हो गया, लेकिन इस बीच सरकार ने क्या किया? हालत यह है कि उचित जगहों पर सीसीटीवी कैमरे तक नहीं लगे थे.
दिल्ली में हुए प्रमुख बम विस्फोट |
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7 सितंबर, 2011: |
हाईकोर्ट के गेट नंबर पांच के बाहर धमाका, 13 लोगों की मौत, 50 घायल |
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25 मई, 2011: |
दिल्ली हाईकोर्ट के बाहर मामूली धमाका, कोई हताहत नहीं |
| 19 सितंबर, 2010: |
जामा मस्जिद के पास विदेशी पर्यटकों की बस पर गोलीबारी, दो घायल |
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27 सितंबर, 2008: |
महरौली बाज़ार में एक देसी बम फेंका गया, तीन लोगों की मौत |
| 13 सितंबर, 2008: |
अलग-अलग जगहों पर हुए धमाकों में 26 लोग मारे गए और कई घायल हुए |
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14 अप्रैल, 2006: |
जामा मस्जिद के प्रांगण में दो धमाके हुए, करीब 14 लोग घायल |
| 29 अक्टूबर, 2005: |
सरोजिनी नगर, पहाड़गंज एवं गोविंदपुरी में धमाके, 59 लोगों की मौत, 100 से ज़्यादा घायल |
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22 मई, 2005: |
दो सिनेमाघरों में हुए धमाकों में दो मरे, कई घायल |
| 18 जून, 2000: |
लाल क़िले के पास धमाके में आठ साल की बच्ची समेत दो लोगों की मौत |
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16 मार्च, 2000: |
सदर बाज़ार इलाक़े में धमाका, सात लोगों की मौत |
| 6 जनवरी, 2000: |
पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर खड़ी एक ट्रेन के भीतर धमाका, 20 लोग घायल |
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3 जून, 1999: |
लाल किले और चांदनी चौक के बीच धमाके, करीब 27 लोग घायल |
| 31 अगस्त, 1998 : |
तुर्कमान गेट के पास बम धमाके में एक की मृत्यु, 17 लोग घायल |
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14 जुलाई, 1997: |
लाल क़िले के पास हुए धमाकों में 18 लोगों की मौत |
| 23 मई, 1996: |
लाजपत नगर सेंट्रल मार्केट में बम धमाकों में 16 लोगों की मौत |
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