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उत्तर प्रदेश: हर तरफ पानी ही पानी

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बाढ़ और पानी से शहरी जनता हलकान है, वहीं किसान परेशान. किसी के खेत पानी में डूब गए हैं तो किसी का घर-मकान और राशन-पानी बाढ़ लील गई. क़रीब 24 ज़िले बाढ़ से प्रभावित हैं. लोग छतों पर तिरपाल लगाकर, स्कूलों के बरामदों में, कुछ नहीं तो खुले में ही जीवनयापन कर रहे हैं. बाढ़ के कहर ने सूखे से बेहाल हुए किसानों की कमर तोड़कर रख दी है. शारदा एवं घाघरा आदि नदियों में बनबसा एवं शारदा बैराज से लाखों क्यूसेक पानी छोड़े जाने से लखीमपुर खीरी, सीतापुर, बहराइच, गोंडा, बाराबंकी, फैज़ाबाद एवं अंबेडकर नगर आदि ज़िलों में बाढ़ ने विकराल रूप धारण कर लिया है.

भाजपा के मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि राज्य के 24 ज़िले बाढ़ से प्रभावित हैं. मुख्यमंत्री मायावती ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत-बचाव कार्यों में तेजी लाने और पीड़ितों को समुचित चिकित्सा सुविधाएं मुहैय्या कराने के निर्देश दिए हैं. वहीं शहरी क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए प्रभावी क़दम उठाने को कहा गया है.

गंगा, यमुना, रामगंगा एवं कोसी आदि नदियों में उफान के कारण पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वी उत्तर प्रदेश तक गंगा, यमुना, चौका एवं गोबरहिया आदि नदियों के किनारे बसे शहरों और गांवों की हालत ख़राब है. बाढ़ से निपटने और राहत कार्यों के लिए राज्य सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन कार्यरत राष्ट्रीय आपदा राहत बल की टुकड़ियां भेजने का आग्रह किया था, लेकिन अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाया. बिजनौर में बाकरपुर-यूसुफपुर बांध टूटने के कारण लगभग सौ गांवों में पानी भर गया, वहीं बिजनौर, हरिद्वार एवं रामपुर में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-24 पर पानी बह रहा है. इससे लखनऊ-दिल्ली राजमार्ग पर यातायात प्रभावित हुआ. बनबसा बैराज से अचानक चार लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से गोंडा एवं बाराबंकी ज़िले के क़रीब 200 गांव प्रभावित हुए. बहराइच में घाघरा के तटबंध के पास बसे कायमपुर में तेज बहाव के चलते दो लोगों की मौत हो गई. घाघरा का जलस्तर ख़तरे के निशान से 65 सेमी ऊपर पहुंच गया है. सरयू और घाघरा ख़तरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. गोंडा ज़िले के कर्नलगंज और तरबगंज तहसील क्षेत्रों के क़रीब 104 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं. ज़िला प्रशासन ने लोगों से सुरक्षित स्थानों पर चले जाने को कहा है. अकेले गोंडा ज़िले में दो लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं. घाघरा के कटान से कई घर नदी में समा चुके हैं. बहराइच में बाढ़ के कारण कैसरगंज के कई गांव पानी से घिरे हैं, जिनकी कुल आबादी 85,373 है. इसके अलावा खासेपुर, अहाता, ढपाली पुरवा एवं गोड़हिया के दो दर्जन गांवों में भी पानी भर गया. राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव और राहत आयुक्त के के सिन्हा ने बताया कि मुरादाबाद और गोंडा की हालत ज़्यादा ख़राब है. केंद्र से एनडीआरएफ की टुकड़ियां भेजने का आग्रह किया गया है, जिन्हें अभी फिलहाल गोंडा और मुरादाबाद में छह-छह नावों के साथ तैनात किया जाएगा. बहराइच और गोरखपुर में पीएसी के जवान बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए तैनात हैं. उत्तराखंड के भीम गोडा बांध से 10 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने से बिजनौर ज़िले की मालन नदी उफना गई है, वहीं बाकरपुर-यूसुफपुर बांध टूट गया. बिजनौर-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी पानी आ गया, जिसके चलते उसे बंद करना पड़ा. कालागढ़ बांध से छोड़े गए पानी के चलते रामगंगा का जलस्तर ख़तरे के निशान से ऊपर चला गया, जिससे बिजनौर एवं मुरादाबाद ज़िले के लगभग सौ गांव प्रभावित हुए. रामपुर में कोसी नदी का जलस्तर बढ़ने से क़रीब 22 गांव बाढ़ की चपेट में हैं. हरिद्वार से गंगा में दो लाख 90 हज़ार क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद मुज़फ़्फ़्रनगर की जानसठ तहसील के कई गांव बाढ़ की चपेट में आ गए. हरियाणा के ताजवाला बैराज से यमुना में क़रीब सवा छह लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से भी ज़िले के तटवर्ती गांवों में बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई. बदायूं में भी बाढ़ का ख़तरा बढ़ गया है. प्रशासन ने सभी 13 बाढ़ चौकियों को अलर्ट कर दिया है. लखीमपुर खीरी में शारदा नदी का तांडव चल रहा है. पीलीभीत-बस्ती मार्ग अवरुद्ध हो गया है. पहाड़ों पर लगातार बारिश और डैमों से पानी छोड़े जाने से शाहजहांपुर की सभी नदियां उफना गई हैं. रामगंगा एवं गंगा नदी का जलस्तर बढ़ जाने से निचले ग्रामीण क्षेत्रों में बाढ़ जैसी स्थिति हो गई है. गांवों में भी नदियों का पानी घुसना शुरू हो गया. भारी वर्षा एवं किच्छा बैराज से छोड़े गए पानी के चलते बरेली की मीरगंज तहसील के एक सौ से अधिक गांव जलमग्न हो गए और सुल्तानपुर गांव तो पूरी तरह नदी में समा गया. प्रशासन ने 38 गांवों के जलमग्न होने की पुष्टि की है. सीतापुर में गांजरी क्षेत्र की नदियों का जलस्तर बढ़ता जा रहा है. बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोग घर छोड़कर पलायन कर गए हैं. लखीमपुर खीरी में मूसलाधार बारिश के चलते उफनाई नदियां अपनी जगह छोड़कर बस्ती में घुसने लगी हैं. बाढ़ की विकरालता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह मुद्दा राज्यसभा तक पहुंच गया. भाजपा के कलराज मिश्र ने कहा कि केंद्र सरकार को बाढ़ राहत कार्यों में फौरन अपना योगदान करना चाहिए. भाजपा के मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि राज्य के 24 ज़िले बाढ़ से प्रभावित हैं. मुख्यमंत्री मायावती ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत-बचाव कार्यों में तेजी लाने और पीड़ितों को समुचित चिकित्सा सुविधाएं मुहैय्या कराने के निर्देश दिए हैं. वहीं शहरी क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए प्रभावी क़दम उठाने को कहा गया है.

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