पुलक चटर्जी प्रधानमंत्री कार्यालय में लौट आए हैं. उन्हें प्रधानमंत्री का मुख्य सचिव बनाया गया है. उनकी नियुक्ति ऐसे समय में की गई है, जबकि यूपीए सरकार एक साथ कई समस्याओं से जूझ रही है. यह कोई सामान्य परिवर्तन नहीं है. उनके पूर्ववर्ती अधिकारी टी के नायर को प्रोन्नत करके प्रधानमंत्री का सलाहकार नियुक्त किया गया है. पुलक चटर्जी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी के नजदीकी रहे हैं. इससे पहले वह मनमोहन सिंह के निजी सचिव भी रह चुके हैं. प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष दोनों से नजदीकी होने के कारण ऐसा माना जा रहा है कि पुलक चटर्जी दोनों के बीच की कड़ी का काम करेंगे. उनके आने से काम में गति भी आएगी और प्रधानमंत्री एवं सोनिया गांधी के बीच बातचीत में आने वाली रुकावटें कम होंगी. खैर, यह तो समय ही बताएगा कि चटर्जी अपने पद के साथ कितना न्याय कर पाते हैं और उन उम्मीदों पर कितने खरे साबित होते हैं, जो उनसे की जा रही हैं.
नंदा की जगह कौन?
उड़ीसा राजस्व बोर्ड के सदस्य सत्य प्रकाश नंदा को उड़ीसा विद्युत नियामक आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है. इसके साथ ही राजस्व बोर्ड के सदस्य पद के लिए अटकलें तेज हो गई हैं. इस पद के दावेदारों में विकास एवं कृषि उत्पाद आयुक्त आर एन सेनापति, अरबिंदो बेहरा और केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव जी सी पाटी के नाम शामिल हैं. हालांकि पाटी इस समय केंद्र में हैं, लेकिन उन्हें राज्य में भेजा जा सकता है. इन सभी में बेहरा को इस पद पर नियुक्त किए जाने की उम्मीद है, यदि पाटी को केंद्र से अभी न बुलाया जाए. इसके अलावा एक और उम्मीदवार जुगल किशोर महापात्रा हैं, जो अभी वित्त विभाग में मुख्य सचिव के पद पर हैं. ऐसा माना जा रहा है कि इस पद पर नियुक्ति तो उसी की होगी, जो मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के सबसे करीब होगा.
लाली से सबक
प्रसार भारती के सीईओ बी एस लाली पर आरोप लगने के बाद सरकार इसके अगले सीईओ के अधिकारों में कटौती करने की बात सोच रही है. इसके अलावा प्रसार भारती बोर्ड के सदस्यों की आयु सीमा 62 वर्ष से घटाकर 55 वर्ष करने का प्रस्ताव है. प्रसार भारती अधिनियम के अनुसार इसके सीईओ को राष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट के अनुमोदन के बिना नहीं हटाया जा सकता. ऐसा कहा जाता है कि लाली ने इस नियम का फायदा उठाया और पद का दुरुपयोग किया. नए प्रस्ताव में कहा गया है कि इस विभाग का सीईओ अब एकतरफा फैसला नहीं ले सकता. यह प्रस्ताव इसलिए लाया गया, क्योंकि पूर्व सीईओ लाली ने समिति की बात न मानकर एकतरफा फैसला लिया और लाभ उठाया, जिसके कारण प्रसार भारती को काफी बदनामी झेलनी पड़ी.
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