मोहिनीअट्टम केरल का एक नृत्य है, जो भरतनाट्यम का ही एक रूप है. भारती शिवाजी और उनकी बेटी विजय लक्ष्मी ने इस नृत्यकला को पूरी दुनिया में मशहूर करने का बीड़ा उठाया है. भारती शिवाजी ने अपनी पोती नयनतारा को भी मोहिनीअट्टम सिखाया है. उनका कहना है कि जब लोग इस बीस साल की लड़की को स्टेज पर मोहिनीअट्टम पेश करते हुए देखेंगे तो उन्हें यह नृत्य सीखने की प्रेरणा मिलेगी. भारती शिवाजी का परिवार नृत्य-संगीत से जुड़ा रहा है. उनकी मां के शंकरी कर्नाटक संगीत की जानी-मानी हस्ती थीं. भारती का परिवार तमिलनाडु से है, फिर भी वह केरल के इस नृत्य को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए दिन-रात मेहनत कर रही हैं. जाने-माने नृत्य-संगीत आलोचक लीला वेंकटरमण का कहना है कि विजय लक्ष्मी कमाल का नृत्य करती है. उसके नृत्य में केरल की मुद्राएं स्पष्ट दिखाई देती हैं. भारती शिवाजी मोहिनीअट्टम में दूसरे नृत्यों की कई मुद्राओं को जोड़कर इसे नया रूप देने की कोशिश में लगी हैं, ताकि इस नृत्य के प्रति लोगों का रुझान बढ़ाया जा सके.
विजय लक्ष्मी भी भरतनाट्यम करती थीं, लेकिन अपनी मां एवं गुरु भारती शिवाजी की प्रेरणा से उन्होंने मोहिनीअट्टम को अपना लिया. दोनों ने इस नृत्य को ऊंचाई पर पहुंचाना अपने जीवन का मकसद बना लिया है. विजय लक्ष्मी कहती हैं कि यह नृत्य जितना आसान दिखता है, वास्तव में इसे करना उतना आसान नहीं है. इसमें सॉफ्ट मूवमेंट की आवश्यकता है, जो का़फी कठिन है. वह कहती हैं कि लड़कियां इस नृत्य को सीखने में रुचि लेने लगी हैं.
भारती शिवाजी और विजय लक्ष्मी के प्रयासों से मोहिनीअट्टम की लोकप्रियता काफी बढ़ गई है. महाकवि वेल्लेथोल नारायण मेनन ने भी मोहिनीअट्टम और कई दूसरे पुराने नृत्यों को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया. मोहिनीअट्टम को फिर से जीवित करने में चिन्ना मुअम्मा, कल्याणी कुट्टी अम्मा और उनके शिष्यों का बहुत बड़ा योगदान रहा. उन्होंने पूरे केरल में मोहिनीअट्टम के कई कार्यक्रम किए. भारती शिवाजी ने कई अंतरराष्ट्रीय उत्सवों, जैसे अडिनवर्ग, ब्रिटेन और रूस में यह नृत्य पेश कियौ. भारती शिवाजी, विजय लक्ष्मी और उनके पच्चीस शिष्यों ने रूसी कंपोजर तेहिकोवस्की के स्वान लेक पर परंपरागत मोहिनीअट्टम नृत्य पेश किया, जिसका निर्देशन विजय लक्ष्मी ने किया था. विजय लक्ष्मी का कहना है कि यह उनके लिए एक चुनौती थी, क्योंकि रूसी संगीत का रिद्म हमारे लिए नया था और नृत्य की जान तो संगीत होता है. संगीत वह चीज है, जो नृत्य कराता है.
मोहिनीअट्टम में प्रयुक्त होने वाले भाव-भंगिमाएं बहुत सीमित हैं और इस नृत्य के कलाकार भी कम रहे हैं. इसका मुख्य कारण यह है कि इस नृत्य के कलाकारों ने जो भी नए अनुसंधान किए, उसे अपने शिष्यों को नहीं बताया, लेकिन भारती शिवाजी ने इसे फिर से लोकप्रिय बनाने की ठान ली है. कनक राले के बाद वह दूसरी कलाकार हैं, जो केरल की न होने के बावजूद मोहिनीअट्टम के लिए समर्पित हैं. भारती पहले भरतनाट्यम करती थीं, लेकिन इंद्राणी रहमान को मोहिनीअट्टम करते देखने के बाद वह भरतनाट्यम छोड़कर मोहिनीअट्टम का अभ्यास करने लगीं. कुछ नृत्य आलोचकों का कहना है कि भारती जबसे मोहिनीअट्टम करने लगी हैं, तबसे वह भरतनाट्यम भी पहले से बेहतर करने लगी हैं.
विजय लक्ष्मी भी भरतनाट्यम करती थीं, लेकिन अपनी मां एवं गुरु भारती शिवाजी की प्रेरणा से उन्होंने मोहिनीअट्टम को अपना लिया. दोनों ने इस नृत्य को ऊंचाई पर पहुंचाना अपने जीवन का मकसद बना लिया है. विजय लक्ष्मी कहती हैं कि यह नृत्य जितना आसान दिखता है, वास्तव में इसे करना उतना आसान नहीं है. इसमें सॉफ्ट मूवमेंट की आवश्यकता है, जो का़फी कठिन है. वह कहती हैं कि लड़कियां इस नृत्य को सीखने में रुचि लेने लगी हैं. विजय लक्ष्मी के प्रयासों से उम्मीद है कि मोहिनीअट्टम को भी अन्य शास्त्रीय नृत्यों की तरह प्रसिद्धि ज़रूर मिलेगी.
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