बिहारः सरकार के चहेते सिविल सर्जन

भ्रष्टाचार और विवाद से पूर्णिया सदर अस्पताल का रिश्ता गहराता जा रहा है. यह सिलसिला इसलिए जारी है, क्योंकि सिविल सर्जन राम चरित्र मंडल ख़ुद कई तरह के आरोपों के घेरे में हैं. राज्य सरकार द्वारा नियम-क़ानूनों को ताख पर रखकर मंडल पर की जा रही मेहरबानी शक पैदा करती है. मंडल के फर्ज़ी जाति प्रमाणपत्र का मामला अदालत में विचाराधीन है, पर उनका रुतबा घटने के बजाय बढ़ता जा रहा है. हद तो यह है कि मंडल की जाति से संबंधित कोई रिकॉर्ड स्वास्थ्य विभाग के पास उपलब्ध नहीं है. कई घोटालों से घिरे मंडल ठाठ से पूर्णिया में जमे हुए हैं. जदयू किसान सभा के प्रदेश सचिव गौतम वर्मा मंडल पर करोड़ों रुपये के दवा घोटाले, महिलाओं के फर्ज़ी बंध्याकरण के नाम पर पैसों की निकासी, अमौर रेफरल अस्पताल में 8 लाख एवं के. नगर स्वास्थ्य केंद्र में 6 लाख रुपये के गबन, फर्जी जाति प्रमाणपत्र के सहारे प्रोन्नति और कई अन्य अनियमितताओं-घोटालों में संलिप्तता आदि के आरोप लगाते हैं.

लोजपा नेताओं का कहना है कि सदर अस्पताल भ्रष्टाचार की गंगोत्री है. राम चरित्र मंडल फतवे जाति के हैं और उन्होंने चौपाल जाति (अनुसूचित जाति) के प्रमाणपत्र के आधार पर प्रोन्नति हासिल की. अभी हाल में किशनगंज में तांती जाति के लोगों द्वारा चौपाल जाति बताकर सरकारी नौकरी हासिल करने का मामला प्रकाश में आया है. अस्पताल में आहार वितरण और साफ-सफाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है. यहां तैनात एक नर्स के पति को ग़लत ढंग से रोगी कल्याण समिति का सदस्य बना दिया गया, उसकी एक एंबुलेंस भी अस्पताल में चल रही है. इस संबंध में जब राम चरित्र मंडल से बातचीत का प्रयास किया गया तो उन्होंने व्यस्तता का बहाना बनाकर मिलने से इंकार कर दिया.

गौतम वर्मा ने एक अप्रैल, 2010 को आईडी संख्या 169/10 के तहत मुख्यमंत्री के जनता दरबार में उक्त आरोप लगाए. इस पर मुख्यमंत्री सचिवालय के उपसचिव सह लोक सूचना पदाधिकारी शमीम अहमद ने संदर्भ संख्या-000010710090026 के तहत मामले को स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को जांच कराकर नियमानुसार कार्रवाई करने के लिए भेज दिया. फिर 15 अप्रैल, 2010 को गौतम वर्मा ने सूचना अधिकार क़ानून के तहत जाति प्रमाणपत्र से संबंधित सूचना मांगी. 31 जुलाई, 2010 को जानकारी दी गई कि संयुक्त निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. आर एन पांडेय के जांच प्रतिवेदन के अनुसार पूर्णिया के सिविल सर्जन डॉ. आर सी मंडल के फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर सिविल सर्जन के पद पर प्रोन्नति के संबंध में स्थिति यह है कि उक्त आरोप बंकिम चंद्र सिंह द्वारा परिवाद पत्र, दिनांकित 13 फरवरी, 2009 में लगाया गया है और यह विभाग से संबंधित है. चूंकि उक्त मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए विभाग द्वारा डॉ. मंडल के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गई है और मंडल का जाति प्रमाणपत्र स्वास्थ्य विभाग में उपलब्ध नहीं है.

सवाल यह है कि अगर उनका जाति प्रमाणपत्र स्वास्थ्य विभाग में मौजूद नहीं है तो उन्हें सिविल सर्जन पद पर किस आधार पर प्रोन्नति दी गई. गौतम वर्मा ने सूचना अधिकार क़ानून के तहत उपनिदेशक सह लोक सूचना पदाधिकारी स्वास्थ्य सेवाएं से मंडल के ख़िला़फ विभागीय कार्रवाई से संबंधित सूचना मांगी. उपनिदेशक डॉ जगदीश सिंह ने जानकारी दी कि आयुक्त पूर्णिया प्रमंडल के सचिव के पत्र संख्या-1960, 11 अगस्त, 2010 द्वारा डॉ. मंडल के ख़िला़फ अनुशासनिक कार्रवाई हेतु स्वास्थ्य विभाग से स्पष्टीकरण मांगा गया है. गौतम वर्मा ने 4 जुलाई, 2011 को एक बार फिर उपनिदेशक से स्पष्टीकरण के संबंध में सूचना मांगी, जिसके जवाब में उपनिदेशक ने जानकारी दी कि पत्र संख्या-1085(9), 14 सितंबर, 2010 द्वारा जो स्पष्टीकारण मांगा गया था, वह अब तक अप्राप्त है. मुख्यमंत्री सचिवालय के पत्र संख्या- 5100344, 20 अप्रैल, 2010 के आलोक में कार्रवाई की जा रही है. उधर पूर्णिया प्रमंडलीय आयुक्त के सचिव ने प्रधान सचिव को भेजे अपने पत्र में बताया कि बिहार प्रदेश जनता दल (यू) किसान सभा के प्रदेश सचिव गौतम वर्मा द्वारा दिए गए परिवाद पत्र के आधार पर डॉ. आर सी मंडल के विरुद्ध जांच का आदेश विभागीय पत्र संख्या-1478, 19 मई, 2009 द्वारा क्षेत्रीय उपनिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं पूर्णिया प्रमंडल को मिला था. उन्होंने परिवाद पत्र में लगाए गए आरोपों की जांच करके पत्रांक-149, 28 मई, 2010 द्वारा जांच प्रतिवेदन उपलब्ध कराया, जिसके अनुसार सभी पांचों आरोपों को सही पाया गया. सीडब्ल्यूजेसे- 18013/2009 के न्यायादेश द्वारा सिविल सर्जन के विरुद्ध लगाए आरोपों की जांच कर न्यायोचित कार्रवाई करने का निर्देश प्राप्त है. अत: उक्त जांच प्रतिवेदन के आधार पर आरोपी पदाधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई की जाए.

इसके बाद 19 अगस्त, 2011 को राज्य सरकार के अवर सचिव सीताराम मिश्र ने पत्र संख्या-9/आ0-9-06/2010-758 (9) द्वारा डॉ. मंडल से स्पष्टीकरण देने को कहा. पत्र में कहा गया कि विभागीय पत्र संख्या-1085 (9), 14 सितंबर, 2010 के आधार पर क्षेत्रीय उपनिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं पूर्णिया से कराई गई जांच में आप पर लगे आरोप सही पाए गए हैं. पत्र में एक पखवारे के अंदर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया, परंतु मंडल द्वारा स्पष्टीकरण नहीं दिया गया. इस पर एक बार पुन: 19 अगस्त, 2011 को एक पखवारे के अंदर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया और कहा गया कि अगर ऐसा नहीं होगा तो प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर आपके विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी.लोक जनशक्ति पार्टी के ज़िला अध्यक्ष माधव सिंह एवं वरिष्ठ नेता शंकर झा ने भी पूर्णिया के ज़िला पदाधिकारी को पत्र लिखकर सिविल सर्जन राम चरित्र मंडल पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. लोजपा नेताओं का कहना है कि सदर अस्पताल भ्रष्टाचार की गंगोत्री है. राम चरित्र मंडल फतवे जाति के हैं और उन्होंने चौपाल जाति (अनुसूचित जाति) के प्रमाणपत्र के आधार पर प्रोन्नति हासिल की. अभी हाल में किशनगंज में तांती जाति के लोगों द्वारा चौपाल जाति बताकर सरकारी नौकरी हासिल करने का मामला प्रकाश में आया है. अस्पताल में आहार वितरण और साफ-सफाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है. यहां तैनात एक नर्स के पति को ग़लत ढंग से रोगी कल्याण समिति का सदस्य बना दिया गया, उसकी एक एंबुलेंस भी अस्पताल में चल रही है. इस संबंध में जब राम चरित्र मंडल से बातचीत का प्रयास किया गया तो उन्होंने व्यस्तता का बहाना बनाकर मिलने से इंकार कर दिया.