दिल्‍ली का बाबूः अतिरिक्त प्रभार और बाबू

प्रधानमंत्री की विदेश यात्रा के कारण बहुत से विभागों में सचिव स्तर के अधिकारियों की नियुक्ति नहीं हो पा रही है. सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री के विदेश दौरे से लौटकर आने के बाद भी कई महत्वपूर्ण विभाग और मंत्रालय में सचिव स्तर के अधिकारियों की नियुक्ति नहीं हो पाई है और इनके लिए अस्थाई व्यवस्था की गई है. सरकार ने केमिकल और पेट्रोकेमिकल विभाग के प्रमुख के. जोसे को तीन महीने के लिए फर्मास्युटिकल विभाग का अतिरिक्त प्रभार दे दिया है. इसके अलावा नागरिक उड्डयन विभाग के सचिव एसएनए ज़ैदी को प्रवासी भारतीय मामलों के मंत्रालय के सचिव का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. या तो  सरकार यह समझती है कि ये विभाग इतने महत्वपूर्ण नहीं है कि स्थाई सचिव की नियुक्ति की जाए या फिर उसे यह लगता है कि अतिरिक्त प्रभार वाले अधिकारी भी उसी तरह काम कर सकते हैं जिस तरह का काम स्थाई सचिव कर सकता है.

बाबुओं की समस्या

नियम के अनुसार सिविल सेवा का कोई भी अधिकारी सेवानिवृत्ति के एक साल तक निजी क्षेत्र की किसी कंपनी में नौकरी नहीं कर सकता है. लेकिन यूपीए सरकार के पहले कार्यकाल में इस नियम का शायद ही अनुसरण किया गया था. आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार, 2010 में 25 अधिकारियों में से मात्र एक अधिकारी को ही इसके लिए अनुमति नहीं दी गई. लेकिन इस बार सरकार ने यह तय किया है कि इस नियम का कड़ाई से पालन किया जाएगा. सूत्रों के अनुसार, एनएचएआई के एक अधिकारी ने सेवानिवृत्ति के पश्चात जब लर्सेन एंड टूब्रो कंपनी में काम करने के लिए मंत्रालय से अनुमति मांगी तो उन्हें अनुमति नहीं दी गई. ग़ौरतलब है कि बड़े अधिकारी सेवानिवृत्ति के बाद कंपनी में नियुक्त होते हैं और अपनी साख का उपयोग मंत्रालय से लाभ उठाने के लिए करते हैं. राज्य मंत्री नारायण सामी ने तो एक साल के समय को दोगुना करने का प्रस्ताव रखा है.

सीआईएल को प्रमुख का इंतज़ार 

कोल इंडिया लिमिटेड जो कि देश के कुल कोयला उत्पादन का लगभग 80 फीसदी उत्पादित करता है, का अगला प्रमुख कौन होगा? इसके बारे में अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है. इसके प्रमुख पार्थ एस. भट्टाचार्य का स्थान कौन लेगा, यह तय होना अभी बाक़ी है. सूत्रों के अनुसार कोयला मंत्रालय ने पीएसईबी को चयन समिति बनाने और नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने की सलाह दी है. पीएसईबी ने भी दो लोगों डीसी गर्ग और टीके लाहिरी का नाम प्रस्तावित किया है, लेकिन विजिलेंस कमीशन ने इस पर अपनी सहमति नहीं दिखाई. अब नए लोगों की तलाश की जा रही है. कोयला मंत्रालय के संयुक्त सचिव अजय भल्ला का कहना है कि नियुक्ति की प्रक्रिया एक महीने के भीतर शुरू कर दी जाएगी. दरअसल, कोई भी मंत्रालय किसी वरिष्ठ अधिकारी की नियुक्ति में जल्दबाज़ी नहीं करना चाहता, क्योंकि वह किसी विवाद में फंसना नहीं चाहता है. सभी सुरक्षित रहना चाहते हैं.

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