दिल्‍ली का बाबूः राजनीति और बाबू

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बाबुओं ने भी राजनीति करनी शुरू कर दी है. हिमाचल प्रदेश में एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ने शिकायत की है कि राज्य के पुलिस प्रमुख उन्हें परेशान कर रहे हैं. कांगड़ा डिवीजन के आयुक्त संजय गुप्ता, जिन पर भ्रष्टाचार का आरोप है, ने पुलिस प्रमुख डी एस मिनहास पर आरोप लगाया है कि वह उन्हें परेशान कर रहे हैं, साथ ही दूसरे अधिकारियों को भी उनके खिलाफ भड़का रहे हैं. सबसे बड़ी बात है कि यह शिकायत राज्य के मुख्य सचिव या मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल से नहीं, बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री शांताराम से की गई है. देखा जाए तो यह राजनीतिक दांव-पेंच है. अगर गुप्ता को शिकायत करनी थी तो वह मुख्य सचिव या मुख्यमंत्री से करते. हिमाचल प्रदेश के बाबुओं के बीच यह बात चर्चा का विषय बनी हुई है. इससे यह भी साबित होता है कि प्रदेश के बाबू भी राजनीतिक गुटों में बंटे हुए हैं.

बाबुओं की ज़रूरत

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय से तीन वरिष्ठ बाबुओं की विदाई हो गई है. सरकार को उनके स्थान पर ऐसे बाबुओं की नियुक्ति करनी चाहिए, जिनकी रुचि सामाजिक क्षेत्र में हो, ताकि संबंधित योजनाओं को सही तरीके से लागू किया जा सके. मिली जानकारी के अनुसार, इस विभाग में काम कर रहे तीन संयुक्त सचिवों ने यहां पर रहने के बजाय दूसरे विभाग में जाने का मन बना लिया है. जाहिर है, यहां काम करना उन्हें रास नहीं आया. उनमें से एक एम एन प्रसाद पहले प्रधानमंत्री कार्यालय गए और उसके बाद विश्व बैंक में चले गए. दूसरे बाबू ए लुईखाम ने इस विभाग में अपना सेवा विस्तार मंजूर नहीं किया. तीसरे अधिकारी आशीष जोशी अपने पुराने कैडर में वापस जाना चाहते हैं.  विभाग के सचिव एस मिश्रा के साथ भी विवाद चल रहा है. ऐसी स्थिति में सरकार बाहर के विशेषज्ञों की नियुक्ति कर सकती है. जरूरी यह है कि इस बार जिन बाबुओं की नियुक्ति हो, वे ज़्यादा दिनों तक इस विभाग में काम करें.

सरकार की सतर्कता

पिछले वर्ष पी जे थॉमस को मुख्य सतर्कता आयुक्त नियुक्त किया गया था. प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने थॉमस की नियुक्ति को हरी झंडी दिखा दी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के कारण थॉमस को हटना पड़ा. इस प्रकरण में सरकार की बहुत किरकिरी हुई. इसलिए सरकार अब हर कदम सोच-समझ कर उठा रही है और राज्य में काम कर चुके किसी बाबू को केंद्र में नियुक्त किए जाने में काफी सावधानी बरत रही है. सरकार ने बाबुओं द्वारा भरे जाने वाले विजिलेंस क्लीयरेंस फॉर्म में बदलाव किया है, ताकि थॉमस वाली गलती न दोहराई जाए. अब किसी भी अधिकारी को जब केंद्र में लाया जाएगा तो उसे विशेष तौर पर अपने ऊपर लगे आरोपों की घोषणा करनी होगी. इससे पहले जब पी जे थॉमस सीवीसी बनाए गए थे तो वेबसाइट पर अपने बारे में यह लिखना भूल गए थे कि वह केरल के खाद्य सचिव रह चुके हैं. सरकार अब किसी तरह की भूल नहीं करना चाहती, इसलिए उसने विजिलेंस क्लीयरेंस फॉर्म में स्पष्ट निर्देश दिए हैं.

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