राजनीति में कब किसका पलड़ा भारी हो जाए, माहौल कब किस करवट बैठ जाए, कहा नहीं जा सकता. इसका प्रत्यक्ष प्रमाण उत्तर प्रदेश है, जहां कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी अकेले दम पर सियासत का खेल खेल रहे थे, जनता उन्हें सिर आंखों बैठा रही थी, लेकिन अन्ना के आंदोलन ने कांग्रेस को हिलाकर रख दिया है. सूबे के सियासी गलियारों में इसका ज़बरदस्त प्रभाव पड़ा. राहुल की यात्राओं की चमक फीकी पड़ गई. जो कांग्रेसी उन्हें अगला प्रधानमंत्री मानकर चल रहे थे, वे अब इस बात को कहने से भी कतराते हैं. कांग्रेस की जनसभाओं में अब उतनी भीड़ नहीं होती, जितनी उपचुनावों के दौरान हो रही थी. सोनिया और राहुल के रोड शो को लोग अभी तक भुला नहीं पाए हैं, लेकिन अब उसका उल्टा हो रहा है. राहुल का कद ऊंचा करने के लिए बुंदेलखंड को विशाल आर्थिक पैकेज दिया गया, राहुल ने पदयात्राएं कीं, दलितों के छप्पर के नीचे बैठे, उनके साथ खाना खाया, भट्ठा पारसौल कांड से प्रभावित क्षेत्रों का भ्रमण किया, मगर उन्हें कोई खास सफलता नहीं मिल सकी. मिशन 2014 को डूबते देख कांग्रेस आलाकमान ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र केंद्रीय मंत्रियों की एक टीम गठित की है, जिसमें श्रीप्रकाश जायसवाल, सलमान खुर्शीद, जितिन प्रसाद, आरपीएन सिंह और प्रदीप जैन शामिल हैं. ये पांचों चुनाव की ज़िम्मेदारी संभालेंगे. कांग्रेस का चुनाव प्रबंधन इस बार लखनऊ के बजाय जोन स्तर पर होगा. प्रदेश को 10 जोनों में बांटकर हर जोन में एक केंद्रीय प्रेक्षक नियुक्त किया गया है, उसे सहयोग करने के लिए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के दो नेताओं को सह कोआर्डिनेटर बनाया गया है. केंद्रीय मंत्रियों को बतौर प्रभारी कोआर्डिनेटर नियुक्त किया गया है. हर प्रेक्षक को लगभग 40 विधानसभा क्षेत्रों की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है. प्रेक्षकों के कार्यालय जोनल मुख्यालय पर होंगे और वे वहीं रहकर चुनाव की निगरानी करेंगे. मेरठ, आगरा, बरेली, लखनऊ, कानपुर, बस्ती, गोरखपुर, वाराणसी, इलाहाबाद एवं झांसी में पार्टी के जोन कार्यालय स्थापित करने की कवायद शुरू हो गई है.
राहुल की यात्राओं की चमक फीकी पड़ गई. जो कांग्रेसी उन्हें अगला प्रधानमंत्री मानकर चल रहे थे, वे अब इस बात को कहने से भी कतराते हैं. कांग्रेस की जनसभाओं में अब उतनी भीड़ नहीं होती, जितनी उपचुनावों के दौरान हो रही थी. सोनिया और राहुल के रोड शो को लोग अभी तक भुला नहीं पाए हैं, लेकिन अब उसका उल्टा हो रहा है.
विधानसभा चुनाव के दौरान प्रत्याशियों या संगठन के लोगों को दिल्ली या लखनऊ की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी. बेहतर और प्रभावी चुनाव प्रबंधन के लिए ही प्रदेश को दस जोनों में बांटा गया है और उसका आधार बनाया गया पिछले साल निकाली गई संदेश यात्रा को. जोन एक में सहारनपुर एवं मेरठ मंडल हैं. इसका मुख्यालय मेरठ में होगा. इसके प्रेक्षक मोतीलाल शर्मा हैं, जिनके साथ पीसीसी से सह कोआर्डिनेटर के रूप में राजेंद्र शर्मा एवं जुग्गम कुरैशी को नियुक्त किया गया है. जोन दो में अलीगढ़ एवं आगरा मंडल के अलावा बुलंदशहर का कुछ हिस्सा शामिल है. इसका मुख्यालय आगरा में होगा. इसके प्रेक्षक अश्क अली टाक होंगे. उनके सहयोग के लिए सोमांश प्रकाश, सईदुज्जमा एवं रणबीर राना को लगाया गया हैं. मेरठ एवं आगरा जोन के प्रभारी कोआर्डिनेटर केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद होंगे. जोन तीन में मुरादाबाद एवं बरेली मंडल हैं. इसका मुख्यालय बरेली में होगा. इसके प्रेक्षक मुज़फ्फर अली बनाए गए हैं, उनका साथ देंगे पीसीसी के सतीश त्यागी एवं हसन आरिफ अंसारी.
जोन चार में पीलीभीत, शाहजहांपुर, फर्रुखाबाद एवं लखनऊ मंडल शामिल हैं. इसका मुख्यालय लखनऊ में होगा. इसके प्रेक्षक भाई जगताप होंगे. उनके साथ पीसीसी के बलदेव चौधरी एवं अरशद आजमी रहेंगे. जोन तीन एवं चार का प्रभारी आरपीएन सिंह को बनाया गया है. जोन पांच में उन्नाव, लखनऊ, रायबरेली जिला एवं फैजाबाद मंडल शामिल हैं. इसका मुख्यालय कानपुर में होगा. इसके प्रेक्षक रामेश्वर नीखरा होंगे और उन्हें साथ देंगे पीसीसी के हाफिज मोहम्मद उमर एवं आरती वाजपेयी. जोन छह में बाराबंकी जिला, देवी पाटन एवं बस्ती मंडल शामिल हैं. इसका मुख्यालय बस्ती में होगा. इसके प्रेक्षक अशोक राम होंगे. उनके साथ पीसीसी से श्यामलाल पुजारी एवं सुषमा सिंह को लगाया गया है. जोन पांच एवं छह के प्रभारी श्रीप्रकाश जायसवाल बनाए गए हैं. जोन सात में गोरखपुर एवं आजमगढ़ मंडल शामिल हैं. इसका मुख्यालय गोरखपुर में होगा. चंदन बागची इसके प्रेक्षक होंगे. उनके साथ कमला साहनी एवं प्रजानाथ शर्मा को लगाया गया है. जोन आठ में आजमगढ़, भदोही ज़िला एवं वाराणसी मंडल शामिल हैं. इसका मुख्यालय वाराणसी में होगा. इसके प्रेक्षक शकीलुज्जमा होंगे. उनके साथ पीसीसी के कमला सिंह एवं अभय अवस्थी लगाए गए हैं. जोन सात एवं आठ के प्रभारी सलमान खुर्शीद होंगे. जोन नौ में सोनभद्र, मिर्जापुर, चित्रकूट जिला एवं इलाहाबाद मंडल शामिल हैं. इसका मुख्यालय इलाहाबाद में होगा और प्रेक्षक बनाए गए हैं इक़बाल अहमद सरादगी, जिनका साथ देंगे पीसीसी के जे एन विश्वकर्मा एवं इमरान आफरीन. जोन दस में झांसी, चित्रकूट एवं कानपुर मंडल शामिल हैं. इसका मुख्यालय झांसी में होगा. इसके प्रेक्षक मदन मोहन झा हैं. जोन नौ एवं दस के प्रभारी बनाए गए हैं प्रदीप जैन आदित्य.
माया-मुलायम के गढ़ में सेंध का मंसूबा
देश में कांग्रेस के पांच-पांच महारथियों की आमद से राहुल गांधी की बांछें खिल गई हैं. उन्हें अपने गढ़ अमेठी की चिंता नहीं रह गई है. उनका रथ माया और मुलायम के गढ़ में घुसकर वार करेगा. राहुल के तरकश के लिए ऐसे तीरों का इंतज़ाम किया जा रहा है, जो अचूक हों. राहुल गांधी के तू़फानी दौरे का खाका तैयार किया जा रहा है. मायावती सरकार पर तीखे तेवर अपनाने की स्क्रिप्ट लिखी जाएगी. श्रीप्रकाश जायसवाल की देखरेख में खिंचे खाके के अनुरूप राहुल जालौन से बदायूं, बिजनौर से इटावा, चित्रकूट से सीतापुर, बलिया से गोंडा और पीलीभीत से महाराजगंज तक दौरा करेंगे. देखना यह है कि राहुल के लिए कांग्रेस के धुरंधरों द्वारा बनाया जा रहा खाका कितना कारगर होगा. वह मायावती और मुलायम सिंह के मज़बूत किले को तोड़ पाने में सफल हो पाएंगे या नहीं.
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