मुनाफे की लड़ाई

अमेरिका की बास्केटबॉल लीग मुसीबत में फंस गई है. खिलाड़ियों ने नेशनल बास्केटबॉल एसोसिएशन के खिला़फ विद्रोह कर दिया है. लीग के मालिकों की खिलाड़ियों को मनाने की सारी कोशिशें नाकाम रही हैं. खिलाड़ी हड़ताल पर जा रहे हैं. दरअसल, बास्केटबॉल अमेरिका का कमाऊ खेल है. वहां होने वाले लीग मुक़ाबलों के ज़रिये खिलाड़ी और टीम मालिक अरबों रुपये कमाते हैं. इस कमाई में सबका हिस्सा है. खिलाड़ियों को पहले 57 फीसदी मिलता था. जून में वह समझौता खत्म हो गया. उसके  बाद नए समझौते में खिलाड़ियों की हिस्सेदारी कम करने को लेकर विवाद हो गया. खिलाड़ी 52.5 फीसदी तक लेने को तैयार हैं, लेकिन टीमों के मालिकों का प्रस्ताव 50-50 बांटने का है. इस पर खिलाड़ी राज़ी नहीं हो रहे हैं. इस मुद्दे पर कई हफ्तों से दोनों पक्षों के बीच बातचीत चल रही है. अब तक खिलाड़ियों की यूनियन ही मालिकों के साथ बातचीत कर रही थी. लेकिन बैठक के बाद यूनियन में भी विवाद खड़ा हो गया है. इसलिए यूनियन को ही भंग करने की बात उठ रही है. यूनियन के अध्यक्ष डेरेक फिशर ने भी हंटर की इस बात से सहमति जताई है कि मालिकों के साथ लेनदेन करने में यूनियन नाकाम रही है. फिशर ने कहा, यह वह मौक़ा है जहां से हम एक यूनियन के तौर पर आगे नहीं बढ़ सकते. हमने दो साल तक पूरी ईमानदारी से एक समझौते पर पहुंचने की कोशिश की. लेकिन हम इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि यह प्रक्रिया काम नहीं कर रही है. लेकिन एनबीए भी झुकने को तैयार नहीं है. टीमों के मालिक कमाई को आधा-आधा बांटने पर तो राज़ी हो गए हैं. लेकिन एनबीए के कमिश्नर डेविड स्टर्न ने कहा है कि अगर समझौता नहीं होता है तो यह हिस्सेदारी मालिकों के पक्ष में 47-51 तक जा सकती है. अगर दोनों पक्ष राज़ी हो जाते हैं तो 2011-12 के सीजन के कुछ मुक़ाबले हो सकते हैं. स्टर्न ने 15 दिसंबर से 72 मुक़ाबलों के एक शेड्यूल का प्रस्ताव रखा है. लेकिन हंटर ने इसका जवाब सा़फ शब्दों में दिया है. उन्होंने कहा, खिलाड़ी किसी तरह की चेतावनी स्वीकार नहीं करेंगे. उनका मानना है कि इस तरह समझौता स्वीकार करने की चेतावनी देना एकदम नाजायज़ है.

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