दिल्‍ली का बाबूः बाबुओं की कमी से जूझता सूचना आयोग

पिछले महीने केंद्रीय सूचना आयोग में सूचना आयुक्त के पद के लिए सरकार ने आवेदन मांगा है. इस विभाग में का़फी पद खाली पड़े हैं, जिन पर नियुक्ति नहीं की जा रही है. इस बार जो आवेदन आमंत्रित किए गए हैं, उसके पीछे का सच भी कुछ और है, जिसे कम ही लोग जानते हैं. मुख्य सूचना आयुक्त सत्येंद्र मिश्रा इस विभाग में रिक्त पदों से का़फी परेशान हैं. इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था कि इस विभाग में आयुक्तों की कमी है, जिसके कारण काम प्रभावित हो रहा है. इसके बावजूद सरकार ने इस नियुक्ति में देरी कर दी. ग़ौरतलब है कि अभी केंद्रीय सूचना आयोग में सत्येंद्र मिश्रा सहित केवल छह सूचना आयुक्त हैं, जबकि हर महीने इस विभाग को लगभग तीन हज़ार मामलों पर काम करना होता है. सरकार की लापरवाही के कारण इस विभाग में नियुक्ति नहीं हो रही है, जिसके कारण लगभग 17000 मामलों पर सुनवाई नहीं हो पा रही है. जब सूचना आयोग की यह स्थिति है, तो फिर और विभागों के बारे में क्या कहा जा सकता है.

बाबुओं की परेशानी

मंत्रालयों में समय-समय पर होने वाले बाबुओं के सामान्य फेरबदल कभी-कभी उन्हें परेशान भी करते हैं. 2जी घोटाले और अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनों के बाद कुछ बाबुओं को का़फी मुश्किलों का सामना करना पड़ा. इसके कारण बाबुओं को डर लगने लगा है. पेट्रोलियम मंत्रालय उन्हीं मंत्रालयों में से एक है, जहां सुरक्षा एक महत्वपूर्ण मुद्दा होता है. इस बीच पेट्रोलियम मंत्रालय में दर्जनों सचिव स्तर के अधिकारियों की फेरबदल हो रही है. डाइरेक्टोरेट जनरल ऑफ हाइड्रोकार्बन के पूर्व प्रमुख वीके सिबल के ऊपर सीबीआई की जांच चल रही है. इसके कारण इस मंत्रालय में जाने वाले बाबू का़फी असहज महसूस कर रहे हैं. उन्हें इस बात का डर है कि कहीं किसी काम के लिए उन्हें भी जांच से न गुज़रना पड़े. फिलहाल पेट्रोलियम सचिव एस सुब्रह्मण्यम को इस विभाग से बाहर कर दिया गया है. इससे अन्य अधिकारी भी डरे हुए हैं. केजी बेसीन गैस के बारे में सीएजी की रिपोर्ट भी मामले को स्पष्ट नहीं कर पाई है. देखते हैं, आगे क्या होता है.

विजिलेंस पर बाबू का आरोप   

उड़ीसा के जिन बाबुओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं, उन्होंने नवीन पटनायक सरकार को आड़े हाथों लिया है, जिससे सरकार में खलबली मची है. सूत्रों के मुताबिक़, एक अधिकारी प्रफुल्ल चंद्र मिश्रा ने राज्य के मुख्य सचिव बीके पटनायक को लिखा है कि सरकार कई बाबुओं के विरुद्ध चार्जशीट शब्द का उपयोग कर रही है, वह ग़लत है. पटनायक न केवल मुख्य बाबू हैं, बल्कि सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख भी हैं, जिसके तहत विजिलेंस विभाग आता है. कटक के राजस्व विभाग में कोंसोलिडेशन कमिश्नर के पद पर काम कर रहे प्रफुल्ल मिश्रा का कहना है कि विजिलेंस विभाग चार्जशीट शब्द का उपयोग नहीं कर सकता है. उनका कहना है कि क़ानूनन केवल मजिस्ट्रेट अधिकारियों का परिज्ञान ले सकते हैं. वैसे मिश्रा ने अपने वरिष्ठ अधिकारी को सूचित करके ठीक ही किया है. अब विजिलेंस अधिकारी उनके खिला़फ म़ुकदमा कर सकते हैं कि उन पर लगाया गया आरोप ग़लत है. आगे क्या होता है, यह तो पता नहीं. अगर यह मामला न्यायपालिका के पास जाता है, तो तभी सा़फ होगा कि हक़ीक़त क्या है.