ब़र्फ खात्मे की कगार पर

आर्कटिक सागर पर स़फेद ब़र्फ की मोटी चादर जल्द ही अतीत का हिस्सा बन सकती है. ब्रिटेन के एक शीर्ष महासागर विशेषज्ञ ने दावा किया है कि 2015 के ग्रीष्म तक वहां से ब़र्फ खत्म हो जाएगी. ब़र्फ कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के प्रो. पीटर वधाम्स के मुताबिक़, आर्कटिक सागर की ब़र्फ इतनी तेज़ी से सिकुड़ रही है कि अगले चार साल में ही यह समाप्त हो सकती है. इससे ध्रुवीय भालू जैसे जानवरों के लिए प्राकृतिक आवास की समस्या खड़ी हो जाएगी. उत्तरी रूस, कनाडा और ग्रीनलैंड के बीच में पसरी यह ब़र्फ मौसम के साथ घटती-ब़ढती रहती है. फिलहाल यह 40 लाख वर्ग किलोमीटर के  आकार में सिमट गई है. जलवायु परिवर्तन पर अंतरराष्ट्रीय समिति के ताज़ातरीन अनुमानों सहित ज़्यादातर मॉडलों में हाल के दिनों में ब़र्फ के सिकुड़ने के हिसाब से इसके  समाप्त होने की गणना की गई है. हालांकि वधाम्स का कहना है कि ऐसे अनुमान जलवायु परिवर्तन के  त़ेजी से पड़ने वाले असर के  सटीक आकलन में नाकाम रहते हैं. उनका कहना है कि उनका मॉडल सर्वश्रेष्ठ है. यह दिखाता है कि ब़र्फ के घनत्व में गिरावट इतनी त़ेजी से हो रही है कि बहुत जल्द ही यह शून्य के स्तर पर पहंच जाएगा. 2015 का अनुमान बेहद गंभीर अनुमान है.