मध्‍य प्रदेशः यहां भी है माइनिंग का महाघोटाला

जल, जंगल, ज़मीन और आसमान. ऐसी कोई जगह नहीं जो घोटालेबाज़ों की गिद्ध दृष्टि से बची हो. प्राकृतिक संसाधनों की लूट के इस खेल में सरकार, विपक्ष, पूंजीपतियों समेत हर वह आदमी शामिल है जिसके संबंध सत्ता में बैठे लोगों से हैं और जिनके पास धनबल, बाहुबल है. कर्नाटक, उ़डीसा, झारखंड, गोवा और अब मध्य प्रदेश. मध्य प्रदेश में माइनिंग महाघोटाले की ज़डें कहां-कहां तक फैली हैं और कौन-कौन से लोग इसमें शामिल हैं, प़ढिए चौथी दुनिया की इस खास रिपोर्ट में:

देश के हृदय स्थली माने जाने वाले इस राज्य के विंध्य, बुंदेलखंड और महाकौशल का इलाक़ा खनिज तत्व से भरा है. ज़ाहिर है, मुना़फे के लालच में इसका बड़े पैमाने पर अवैध खनन, परिवहन तथा खरीद-बिक्री भी चल रही है. यह ग़ैर क़ानूनी काम न स़िर्फ ज़िला प्रशासन, पुलिस और खनन से संबंधित प्रशासनिक विभागों के नौकरशाहों की मिलीभगत से हो रहा है, बल्कि इसमें स्थानीय और राज्य के प्रभावशाली नेताओं, विधायकों, मंत्रियों और उनके क़रीबी भी शामिल हैं. पिछले कुछ सालों से जारी इस अवैध खनन से अरबों रुपये के सरकारी राजस्व का नुक़सान तो हो ही रहा है, साथ ही पर्यावरण को भी भारी क्षति पहुंच रही है. जबलपुर व छतरपुर ज़िलों के सिहोरा तहसील, मझगवां थाना अंतर्गत झीटी, दुबयारा, अगरिया, घुघरी, टिकरिया प्रतापपुर गांवों में अंधाधुंध तरीक़े से उच्च तकनीक युक्त मशीनों से अवैध खनन का काम चल रहा है, वह भी बिना पर्यावरणीय स्वीकृति के. माइनिंग लीजधारी कंपनियों द्वारा इस खनिज का प्रदेश व देश के बाहर निर्यात किया जा रहा है. प्रत्येक रेलवे रेक के केमिकल ऍनालिसिस (ब्लू डस्ट) के मुताबिक़, उसमें 62 से 66 प्रतिशत आयरन होता है. लेकिन हाई ब्लू डस्ट की रॉयल्टी 78 रुपये प्रति टन की जगह 48 रुपये प्रति टन लो ब्लूडस्ट के हिसाब से जमा कराई जा रही है. इस हिसाब से जमकर रॉयल्टी चोरी की जा रही है. बानगी के तौर पर पैसिफिक एक्सपोर्ट प्राइवेट लि. कटनी को प्रतिवर्ष 80 हज़ार मीट्रिक टन आयरन और खनन की अनुमति दी गई थी. लेकिन सितंबर 2010 से मार्च 2011 तक की अवधि में कंपनी ने 11,96,450 मीट्रिक टन आयरन का खनन किया.

लोकायुक्त की जांच की ज़द में आए राज्य सरकार के दो ब़डे मंत्री राजेंद्र शुक्ला और नागेंद्र सिंह के संबंध में राज्य के एक वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी ने एक रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी है. इस रिपोर्ट में इन मंत्री पर खनिज माफिया को सहयोग देने और इसकी वजह से एक भारी भरकम घोटाले की संभावना जताई गई है.

जबलपुर ज़िले के अंतर्गत चल रहे अवैध खनन पर लगाम कसने के लिए कलेक्टर गुलशन बामरा द्वारा गठित किए गए विशेष दल ने सिहोरा तहसील की कुछ खदानों का औचक निरीक्षण किया. इसमें कई अनियमितताएं सामने आईं. खदान संचालकों द्वारा खनन में स्वीकृत माइनिंग प्लान की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं. यह जांच दल जल्द ही जांच रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपेगा. जांच दल के मुखिया एडीएम अक्षय कुमार सिंह के अनुसार, ग्राम सिलुआ में खत्री मिनरल्स, केवलारी में शोभा मिनरल्स और हृदयनगर में श्रीकांत पांडे की खदानों में किए गए निरीक्षण में पाया गया कि इन खदानों में सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया जा रहा. खदानों में फेंसिंग और सुरक्षा दीवार भी नहीं है. इस इलाक़े में स्वीकृत माइनिंग लीज के विवरण के अनुसार, कंपनियों/फर्मों/व्यक्तियों द्वारा स्वीकृत माइनिंग लीज क्षेत्र एवं समीपवर्ती इलाक़ों में भारी भरकम मशीनों तथा मध्य प्रदेश के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय तथा खनिज मंत्रालय के मंत्रियों की मिलीभगत से प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन किया जा रहा है. पूर्व में भी इस संबंध में शासन स्तर पर अनेक व्यक्तियों/संगठनों द्वारा शिकायतें प्रस्तुत की गई थीं. परंतु अधिकारियों द्वारा राजनीतिक दबाव में इन शिकायतों को दबा दिया गया. भारत सरकार के पर्यावरण एवं वन मंत्रालय क्षेत्रीय कार्यालय भोपाल के डीसीएफ (एमआईएफ) सुजाय बैनर्जी (वन संरक्षण अधिनियम 1980 के तहत वन ज़मीन के डायवर्सन अधिकारी) ने राज्य सरकार को आगाह भी किया था कि इस तरीक़े से खनन की अनुमति देने से रिजर्व फॉरेस्ट को भारी नुक़सान पहुंचेगा.

माइनिंग लीजधारी कंपनियों द्वारा इस खनिज का प्रदेश व देश के बाहर निर्यात किया जा रहा है. प्रत्येक रेलवे रेक के केमिकल ऍनालिसिस (ब्लू डस्ट) के मुताबिक़, उसमें 62 प्रतिशत से 66 प्रतिशत आयरन होता है. लेकिन हाई ब्लू डस्ट की रॉयल्टी 78 रुपये प्रति टन की जगह 48 रुपये प्रति टन लो ब्लूडस्ट के हिसाब से जमा कराई जा रही है. इस हिसाब से जमकर रॉयल्टी चोरी की जा रही है. पैसिफिक एक्सपोर्ट प्राइवेट लि. कटनी को प्रतिवर्ष 80 हज़ार मीट्रिक टन आयरन और खनन की अनुमति दी गई थी.

इस पूरे प्रकरण का एक दिलचस्प पहलू है अवैध खनन के मामले में सत्ताधारी और विपक्ष दोनों दलों के लोग शामिल हैं. मसलन, सिहोरा से भारतीय जनता पार्टी के पूर्व विधायक ने जबलपुर कलेक्टर और वन एवं पर्यावरण मंत्री को इस पूरे मामले में एक शिकायत पत्र भेजा. पूर्व विधायक ने 17 अक्टूबर को भेजे अपने पत्र में निर्मला मिनरल्स एवं आनंद माइनिंग कारपोरेशन (दिग्विजय मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री रहे सत्येंद्र पाठक, वर्तमान मे उनके विधायक पुत्र व प्रदेश कांग्रेस महामंत्री और कटनी नगर निगम में महापौर निर्मला पाठक की भागीदारी वाली कंपनियों) के खिला़फ शिकायत की. जबकि स्वयं शिकायतकर्ता, भाजपा के पूर्व विधायक, उनके पुत्र व परिजन पैसेफिक एक्सपोर्ट प्रा. लि. से जु़डे हुए हैं और ट्रेडिंग एजेंट के रूप में कार्य कर रहे हैं. साथ ही अवैध खनन, अवैध परिवहन और रॉयल्टी चोरी को संरक्षण दे रहे हैं.

  • नेताओं, अधिकारियों और खनिज माफियाओं का गठजोड
  • अरसे से जारी है मध्य प्रदेश में अवैध खनन का गोरखधंधा
  • करो़डों के सरकारी राजस्व का नुक़सान, पर्यावरण को क्षति
  • शिकायत पर कार्रवाई नहीं, खनिज मंत्री भी संदेह के घेरे में

बहरहाल, अवैध खनन की शिकायत राज्य सरकार से लेकर केंद्र तक भी की जा चुकी है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर अब तक कुछ नहीं हुआ है. जनता दल (यू) के कुछ लोगों ने इसकी शिकायत प्रधानमंत्री से भी की है और गंभीर पर्यावरण क्षति तथा शासन को अरबों रुपये के राजस्व नुक़सान संबंधी शिकायत की जानकारी प्रधानमंत्री तक पहुंचाई है. प्राकृतिक संसाधनों की मची इस लूट को एनडीए के संयोजक और जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव द्वारा केंद्रीय खनिज मंत्री दिनशा पटेल के समक्ष 2 सितंबर, 2011 को लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान भी उठाया गया था. बहरहाल, इतना सब कुछ होने के बाद अब कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह भी भ्रष्टाचार की परतें खुलने और अवैध खनन से कई सौ करोड़ का खनिज घोटाला सामने आने की बातें करने लगे हैं. अभी हाल में मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया सेल के प्रभारी मानक अग्रवाल ने प्रथम श्रेणी दंडाधिकारी की कोर्ट में एक याचिका दायर की है, जिसमें जबलपुर की सिहोरा तहसील में 600 करो़ड रुपये के माइनिंग घोटाले का आरोप लगाया गया है. लेकिन सबसे ब़डा सवाल है कि क्या सचमुच इस महाघोटाले के सूत्रधारों और दोषियों के खिला़फ कार्रवाई हो पाएगी या फिर माइनिंग का यह महाघोटाला भी राजनीति की भेंट च़ढ जाएगा?

किसे कितना मिला है

इस इलाक़े में स्वीकृत माइनिंग लीज के विवरण के अनुसार, माइनिंग लीजधारी मै. पेसेफिक एक्सपोर्ट  प्रा. लि., 15 डन मार्केट बरगवां, कटनी को ग्राम झीटी के खसरा नंबर 426, 412 (पी-26) में क्रमश: 6.40 हेक्टेयर और 20.65 हेक्टेयर के रक़बे में लीज स्वीकृत है. इस जगह पर काम चालू है. इसी तरह मै. निर्मला मिनरल्स पाठक वार्ड, कटनी को ग्राम अगरिया के खसरा नंबर 1093, 628 /1,(पी.- 32) में 20.141 हेक्टेयर और ग्राम दुबियारा के 32.374 हेक्टेयर रक़बे में लीज स्वीकृत है, जहां अभी काम चालू है. मै. आनंद माइनिंग कारपो., पाठक वार्ड, कटनी को ग्राम टिकरिया, दुबियारा व प्रतापपुर के खसरा नंबर 372, 495, 496, 497 में क्रमश: 20.002 हेक्टेयर व 11.578 हेक्टेयर में लीज स्वीकृत है. यहां भी काम चालू है. जबकि माया सिंह तोमर, ग्राम झीटी और ग्वालियर में 04.000 हेक्टेयर ज़मीन पर खनन प्रारंभ होना है. दूसरी ओर निवेदन भारद्वाज, ग्राम झीटी में 12.000 हेक्टेयर ज़मीन पर भी खनन कार्य शुरू होना है. लक्ष्मी नरसिंग को ग्राम झीटी में 04.000 हेक्टेयर ज़मीन पर खनन के लिए लीज दिया गया है और अभी इस ज़मीन पर भी कार्य शुरू होना है. मै. खजुराहो मिनरल्स, छतरपुर को भी 4.950 हेक्टेयर ज़मीन पर खनन के लिए लीज दिया गया है और यहां खनन का काम चालू है.

मंत्री भी शक के घेरे में हैं

मध्य प्रदेश में इतना सब कुछ चल रहा है, मगर इस दौरान एकाएक बहुत त़ेजी से उभरे-पनपे अवैध खनन उद्योग एवं इसके संचालक खनिज माफिया पर किसी तरह के कड़े अंकुश कीबजाय उसे एक तरह से क्लीन चिट दिए जाने में भी शिवराज मंत्रिमंडल के खनिज मंत्री राजेंद्र शुक्ला को कहीं कोई हिचक तक नहीं हो रही है. शुक्ला यह तो मानते हैं कि प्रदेश का एक बड़ा इलाक़ा, विशेषकर कटना ज़िला अवैध खनन का सबसे बड़ा केंद्र है. उनके ही अनुसार, विगत एक अरसे में उनके पास तत्संबंधी राज्य भर सबसे अधिक शिकायतें पहुंची हैं. लेकिन कार्रवाई के नाम पर वह न तो कुछ कहते हैं और न कुछ करते हैं. और करें भी क्यों, जब खुद मंत्री जी पर ही सवाल ख़डे हो रहे हों. लोकायुक्त की जांच की ज़द में आए राज्य सरकार के दो ब़डे मंत्री राजेंद्र शुक्ला और नागेंद्र सिंह के संबंध में राज्य के एक वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी ने एक रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी है. इस रिपोर्ट में इन मंत्री पर खनिज मा़फिया को सहयोग देने और इसकी वजह से एक भारी भरकम घोटाले की संभावना जताई गई है. अतिरिक्त मुख्य वन संरक्षक जगदीश प्रसाद शर्मा द्वारा तैयार इस रिपोर्ट में पीडब्ल्यूडी मंत्री नागेंद्र सिंह और खनिज मंत्री राजेंद्र शुक्ला को नागौद, उचेहरा क्षेत्र में दर्जन भर से अधिक अवैध खदानों के संचालन की पृष्ठभूमि में शामिल बताया गया है. ज़ाहिर है, जब खनिज संपदा की रक्षा के लिए ज़िम्मेदार व्यक्ति पर ही सवाल उठ रहे हों तो भला खनिज माफिया पर कार्रवाई की उम्मीद भी कैसे की जा सकती है?

– अरविंद वर्मा