बीते एक अगस्त से मणिपुर के दोनों राष्ट्रीय राजमार्गों (एनएच-39 एवं 53) पर यूनाइटेड नगा काउंसिल (यूएनसी) ने आर्थिक नाकेबंदी कर रखी थी. इस 100 दिनों की बंदी ने यहां के जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया. हर वस्तु के दाम आसमान छूने लगे. पेट्रोल 250 रुपये प्रति लीटर मिलने लगा और रसोई गैस का सिलेंडर 2100 रुपये में. आसमान छूती क़ीमतें एक तऱफ, रसोई गैस के लाले तक पड़ गए. पेट्रोल के लिए लोगों को तीन-चार किलोमीटर लंबी लाइन लगानी पड़ी. रोजमर्रा के जीवन में इस्तेमाल होने वाली चीजों, जीवनरक्षक दवाओं और ऑक्सीजन आदि का अभाव हो गया. इन सबके बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बीते 3 दिसंबर को मणिपुर का एक दिवसीय दौरा किया. प्रधानमंत्री का यह तीसरा दौरा था. इस बार उन्होंने कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उद्घाटन किया और कई अन्य योजनाओं की घोषणा की. आईएसबीटी, एमएफडीसी ऑडिटोरियम, सिटी कन्वेंशन सेंटर, एसेंबली कांप्लेक्स एवं हाईकोर्ट भवन के उद्घाटन के साथ कई घोषणाएं की गईं. मणिपुर में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं. प्रदेश में कांग्रेस की यह दूसरी सरकार है. ऐसे में प्रधानमंत्री की मणिपुर यात्रा चुनाव प्रचार का एक हिस्सा मानी जा रही है.
मणिपुर की आबादी 27 लाख से ज़्यादा है. नौ ज़िलों में से चार घाटी में हैं और पांच पहाड़ में. आतंकवाद यहां की स्थायी समस्या है. यहां सक्रिय आतंकवादी अलगाव की मांग करते हैं, वे भारत से अलग होने की लड़ाई लड़ते हैं. वहीं राज्य के अंदर विभिन्न जातियों के बीच भी तनाव है.
जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह आने वाले थे, तब सुप्रा स्टेट की ख़ूब चर्चा हुई. स्थानीय अख़बारों ने लिखा कि केंद्र सरकार आगामी 25 दिसंबर को नगाओं को क्रिसमस गिफ्ट के तौर पर सुप्रा स्टेट देगी. सुप्रा स्टेट का मतलब पूर्वोत्तर के चारों राज्यों (असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और नगालैंड) में जितने नगा बसे हैं, उनकी एक अलग सरकार बनाना. नगाओं की यह मांग समझ में नहीं आती. इससे पहले वे नगालिम की मांग कर रहे थे और अब सुप्रा स्टेट की मांग कर रहे हैं. स्वाभाविक है कि अगर सुप्रा स्टेट को स्वीकृति मिलेगी तो नगालिम की स्थापना ख़ुद-बख़ुद हो जाएगी. नगाओं की इन मांगों ने स्थानीय लोगों में काफी तनाव पैदा किया. असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने सुप्रा स्टेट को लेकर खुला विरोध जताया कि चारों राज्यों की सहमति के बिना केंद्र नगाओं को कुछ नहीं दे सकता. मणिपुर के मुख्यमंत्री ओक्रम इबोबी ने भी लोगों को आश्वासन दिया कि ऐसी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. यह मांग ठुकराते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इंफाल में एक जनसभा में कहा कि सुप्रा स्टेट का कोई प्रस्ताव नहीं है. मणिपुर में आर्थिक नाकेबंदी से किसी को लाभ नहीं हुआ. पूर्वोत्तर में नगा समुदाय के लिए स्वायत्त राज्य बनाने की कोई योजना नहीं है. उन्होंने कहा कि आर्थिक नाकेबंदी से राज्य की अर्थव्यवस्था पर विपरीत प्रभाव पड़ा. मणिपुर की अखंडता अक्षुण्ण रखी जाएगी, यह देश का महत्वपूर्ण हिस्सा है. जब उन्होंने कहा कि मणिपुर में क्षेत्रीय सुरक्षा का मुद्दा बहुत संवेदनशील है तो वहां मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर उनका समर्थन किया. प्रधानमंत्री ने कहा कि मणिपुर के विकास के लिए अमन की ज़रूरत है. विभिन्न समुदाय यहां सदियों से रह रहे हैं और उनके बीच कोई ग़लत़फहमी नहीं होनी चाहिए. प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र मणिपुर के विकास के लिए कुछ भी करने को तैयार है. केंद्र सरकार मणिपुर का विकास चाहती है, जिसके लिए वह प्रदेश सरकार के साथ मिलकर काम कर रही है. उन्होंने कहा कि वह मणिपुर में परियोजनाओं के उचित कार्यान्वयन से ख़ुश हैं. पर्वतीय ज़िलों में क़रीब 20 सालों के बाद स्वायत्त ज़िला परिषदों के चुनाव होने पर प्रधानमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि स्थानीय निकायों को पर्याप्त अधिकार मिलेंगे. मनमोहन सिंह ने मणिपुर के खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में श्रेष्ठ प्रदर्शन किया है.
यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि आर्थिक नाकेबंदी से लोग प्रभावित हुए हैं. युवाओं को राज्य की स्थिति सामान्य करने की दिशा में काम करना चाहिए. केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करने की बात करते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि नई दिल्ली इंफाल से दूर हो सकती है, लेकिन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार बहुत संवेदनशील है. बातचीत के माध्यम से सभी समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है. सोनिया ने कुकी उग्रवादियों समेत कुछ उग्रवादी संगठनों को बातचीत हेतु तैयार करने के लिए राज्य सरकार का आभार व्यक्त किया. प्रधानमंत्री ने अपनी इस यात्रा के दौरान आश्वासन तो ख़ूब दिए, लेकिन यहां के सबसे ज्वलंत मुद्दे अफसपा के बारे में एक भी शब्द नहीं कहा और न पिछले 11 सालों से इस मुद्दे को लेकर भूख हड़ताल कर रहीं शर्मिला के बारे में कोई बात कही. हो सकता है कि ऐसा उन्होंने आगामी विधानसभा चुनावों को मद्देनज़र रखते हुए किया हो.
मणिपुर मूल रूप से दो भागों में विभाजित है, पहला घाटी और दूसरा पहाड़ी. मणिपुर की आबादी 27 लाख से ज़्यादा है. नौ ज़िलों में से चार घाटी में हैं और पांच पहाड़ में. आतंकवाद यहां की स्थायी समस्या है. यहां सक्रिय आतंकवादी अलगाव की मांग करते हैं, वे भारत से अलग होने की लड़ाई लड़ते हैं. वहीं राज्य के अंदर विभिन्न जातियों के बीच भी तनाव है. मणिपुर में लगभग 29 जातियां हैं. उनकी अलग-अलग बोली, संस्कृति और परंपराएं हैं. बड़े समुदायों में नगा, कुकी और मैतै हैं. नगा और कुकी की अनेक उपजातियां हैं, जो हमेशा एक-दूसरे से लड़ती रहती हैं. ऐसे में प्रधानमंत्री की यात्रा विकास से कोसों दूर मणिपुर को राष्ट्र की मुख्य धारा से जोड़ सकेगी, इसमें संदेह है.
एमपीपी यूथ फ्रंट का प्रदर्शन
सुप्रा स्टेट बॉडी के बारे में केंद्र सरकार द्वारा आधिकारिक तौर पर कोई सफाई न देने और तीन महीने से अधिक आर्थिक नाकेबंदी के संबंध में कोई क़दम न उठाने के विरोध में एमपीपी (मणिपुर पीपुल्स पार्टी) यूथ फ्रंट के कार्यकर्ताओं ने निर्वस्त्र होकर प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों में ओ जोय, डॉ. एन जी विजय, डॉ. आई इबोहलबी एवं आर के आनंद आदि प्रमुख थे. एमपीपी ने कहा था कि मणिपुर की जनता सुप्रा स्टेट स्वीकार नहीं करेगी और अगर ऐसा कोई फैसला हुआ तो प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान विरोध प्रदर्शन किया जाएगा. कार्यकर्ताओं ने एक पोस्टर के साथ विरोध प्रदर्शन किया, जिस पर लिखा था, वेलकम पीएम ऑफ इंडिया विथ ब्लैक कॉर्पेट. उन्होंने लांग लिव मणिपुर, वी कंडेम्न इंडियन पॉलिसी और गो बैक पीएम एंड सोनिया आदि नारे भी लगाए. एमपीपी यूथ फ्रंट के अध्यक्ष मुतुम मनितोन ने कहा कि सुप्रा स्टेट के बारे में केंद्र सरकार को कई ज्ञापन भेजे गए, मगर उनका कोई जवाब नहीं मिला. मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी के आने पर हमें कोई आपत्ति नहीं है और न हम भारत विरोधी भावना रखते हैं. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार मणिपुर और पूर्वोत्तर की जनता की भावनाओं को समझ नहीं सकी. अगर वह नाकेबंदी नहीं हटा सकती तो कम से कम ज़रूरी सामान पहुंचाने के लिए संसाधन तो उपलब्ध करा सकती है. अगर लीबिया और इराक में राहत अभियान चलाए जा सकते हैं तो मणिपुर में क्यों नहीं?
केंद्र की नई घोषणाएं
- 12वीं पंचवर्षीय योजना में 6,000 करोड़ रुपये का मुख्य पैकेज
- सुप्रा स्टेट बॉडी बनाने की कोई योजना नहीं
- मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता बरकरार रखी जाएगी
- 13वें वित्त आयोग के तहत 13,600 करोड़ रुपये दिए जाएंगे
- 2011-12 के योजना बजट में पिछले बजट की तुलना में तीन गुना वृद्धि
- एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया तुलिहल एयरपोर्ट के इंफ्रास्ट्रक्चर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपग्रेड करेगी
- जिरी-इंफाल रेल मार्ग का निर्माण कार्य 2016 में पूरा हो जाएगा
- एनएच-53 का निर्माण कार्य 2013 में पूरा हो जाएगा
- ओल्ड काछार रोड बनाने के प्रस्ताव को स्वीकृति
- मराम-पेरेन रोड को डबल लेन करने का काम आगामी मार्च तक पूरा हो जाएगा
- मालोम में ऑयल डिपो की स्थापना
- सेकमाई बॉटलिंग प्लांट की क्षमता 600 से बढ़ाकर 1200 मीट्रिक टन की जाएगी
- टिपाइमुख हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की शुरुआत की जाएगी
- हर जिले में कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों की स्थापना
- उख्रूल और सेनापति जिले में नवोदय विद्यालय के निर्माण को स्वीकृति
- रिम्स (रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस) अस्पताल अपग्रेड किया जाएगा
- पुलिस के आधुनिकीकरण के लिए 12वीं पंचवर्षीय योजना में हर साल 50 करोड़ रुपये मिलेंगे
- इंफाल-मंदले बस टर्मिनल के लिए म्यांमार सरकार से बातचीत की जाएगी
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