मिर्गी के साइड इफेक्ट

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अज्ञानता, अंधविश्वास और जागरूकता न होना मिर्गी रोग के बढ़ने का सबसे बड़ा कारण है, जिसके चलते आज विश्व में लगभग सात करोड़ और भारत में एक करोड़ 20 लाख लोग इस रोग से पीड़ित हैं. डॉ. नवनीत कुमार ने बताया कि अभी भी देश के ग्रामीण इलाक़ों और क़स्बों में लोग मिर्गी का दौरा पड़ने पर डॉक्टर के पास जाने के बजाय ओझा, मंदिरों और मजारों के चक्कर लगाते हैं. लोग इसे झाड़-फूंक से ठीक हो जाने वाला रोग मानते हैं और जब सब जगह से निराश हो जाते हैं. जब रोग बढ़ जाता है तो वह डॉक्टर के पास पहुंचते हैं. मिर्गी के अधिकतर रोगी इलाज से ठीक हो जाते हैं, लेकिन यह इलाज थोड़ा लंबा चलता है. इस रोग के लक्षणों के बारे में उन्होंने बताया कि इसमें रोगी का अचानक बेहोश हो जाना, हाथ-पैर ऐंठ जाना, मुंह से झाग निकलना और रोगी का गिर जाना शामिल है. इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है और वहां लोगों को पर्चे बांटकर और शिविर लगाकर जागरूक किया जा रहा है.

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