बेकारी की समस्या

सामान वित्त वितरण तो दरकिनार, आज तो भारत में सबसे बड़ी समस्या बेकारी की है. तृतीय पंचवर्षीय योजना सफलतापूर्वक संपादित हो जाने के बाद भी योजना आयोग को आशा है कि 2 करोड़ नए रोज़गार पैदा हो जाएंगे, पर तब तक इनसे कहीं ज़्यादा बालिग काम करने वाले पैदा हो चुके होंगे. बेकारी की दशा वैसी की वैसी ही बनी रहेगी. भारत कृषि प्रधान देश है. जिन व्यक्तियों के पास काम है भी, वह साल में क़रीब 4 महीने का ही है. बाक़ी 8 महीने उन्हें बेकार ही बैठे रहना पड़ता है. बेकारी को मिटाने के लिए राष्ट्र को सक्रिय काम करना होगा. एक बार समाजवादी अर्थव्यवस्था को अपनाकर, समान वित्त वितरण पर लक्ष्य केंद्रित कर दिया जाए तो फिर स़िर्फ 2 करोड़ नए रोज़गार या धंधे अगले 5 वर्षों में खड़े कर सकेंगे, ऐसी अर्थहीन और दुर्बल आशा ही ग़लत सिद्ध हो जाती है. जिस तरह देश के हर एक व्यक्ति को रोटी-कपड़ा देना राष्ट्र का काम है, वैसे ही प्रत्येक व्यक्ति कुछ न कुछ करता रहे, यह देखना भी राष्ट्र का ही काम है.

विचित्र बात यही है कि इसके विरुद्ध की गई अपील कोई न्यायाधीश या न्याय विभाग का ऑफिसर नहीं सुनता, बल्कि उसी आयकर विभाग का एक दूसरा ऑफिसर, जो शायद कल तक ऑफिसर की हैसियत से वैसे ही अनेक एसेसमेंट कर चुका होता है, सुनता है. यहां फिर तो भ्रष्टाचार चलता है या वे अपीलेट ऑफिसर भी पर-पीड़न में आनंद का अनुभव करने वाले होते हैं.

बेकारी की समस्या धीरे-धीरे, क्रमश: सुधरने की चीज नहीं है. इसके लिए तो एक साथ बड़ी क्रांति का होना आवश्यक है. भारत की संसद को या राज्य विधानसभाओं को क़ानून बनाकर, निठल्ले बैठे हुए व्यक्तियों को दंडित करने के लिए विधान बनाना होगा. हर बालिग व्यक्ति अपने हिस्से का कुछ न कुछ काम करे, चाहे वह किसी भी किस्म का हो. उसे रुचे, वही काम करे, पर काम करना, श्रम करना अनिवार्य होना ही चाहिए. जिस देश का विकास नहीं हो पाया हो, जिस अविकसित देश में अभी तक हर वस्तु की कमी हो, कम से कम वहां कामों की कोई समस्या होनी ही नहीं चाहिए. आप कहेंगे कि यह तो आप सोवियत रूस के साम्यवाद का ही प्रतिपादन कर रहे हैं. नहीं, यह बात नहीं है. जहां तक काम का सवाल है, शायद साम्यवाद वाले भी यही चाहते हैं कि हर बालिग स्वस्थ व्यक्ति काम करता रहे. पर वहां साम्यवादी पार्टी के नेताओं का जो आतंकवाद है यानी जहां वे ये सब काम बंदूक़ या तोपों के बल पर जोर-ज़बरदस्ती प्रजा से करवाते हैं, वहां मैं प्रजातांत्रिक ढंग से सबको अपना-अपना कर्तव्य समझा कर काम करवाने का हिमायती हूं. वरना बेकारी को आमूल रूप से कैसे उखाड़ कर फेंका जा सकता है?

प्रत्यक्ष कर और करदाता

समान वित्त वितरण का ध्येय प्राप्त करने का मुख्य वैध मार्ग प्रत्यक्ष करों द्वारा है. मार्ग तो और भी अनेक हैं, पर उत्तम मार्ग करों का ही है. आयकर, बहु-आयकर, अतिरिक्त संपत्ति कर, उपहार कर, मृत्यु कर इत्यादि जो सीधे कर हैं, वे वित्त की असमानता दूर करने में सहायक हैं. भारत सरकार ने या शासक कांग्रेस पार्टी ने जबसे समाजवादी अर्थव्यवस्था को अपना ध्येय घोषित कर दिया है, तबसे इस क्षेत्र में कुछ सरगर्मी दिखाई देती है. इसका परिणाम ग़ौर करने लायक़ है. क़ानून बनाने को तो बना दिए गए, पर उनका प्रतिपालन कैसे होगा और कैसे हो रहा है, यह देखने की चीज है. क़ानून बनाने वाले असली कठिनाइयों से इतने अनभिज्ञ हैं कि या तो वे चोर चोरी करके भाग जाए तब ताला बंद करने जैसा क़ानून बनाते हैं या ऐसा क़ानून बना देते हैं, जिससे कोई भी व्यक्ति ईमानदारी से क़ानून मानता हुआ जीवित रह ही नहीं सकता. शासन के अधिकारियों का, ख़ासकर ऑफिसरों का चरित्र या तो भ्रष्टाचार से आप्लावित है और उनका स्तर नीचे गिर चुका है या फिर ऐसे ऑफिसर हैं, जो पर-पीड़न में भी परमानंद का अनुभव करते हैं. भले ही कोई नागरिक ईमानदारी से सही-सही कर चुकाता रहा हो, पर उसे इतना ज़्यादा सताया जाता है, इतना हैरान किया जाता है कि आख़िर वह भी महसूस करने लगता है कि भारत में ईमानदार करदाता होना बड़ी से बड़ी भूल है.

मान लीजिए, आपकी आय एक लाख रुपया सालाना है. आपने क़ानून के अनुसार यथासमय अपना टैक्स अदा कर दिया. समय पर आपने तख्मीना पेश कर दिया. सारा हिसाब, बही खाते ऑफिसर के सामने रख दिए. किसी भी अज्ञात कारण से उस ऑफिसर के दिमाग़ में आया और चूंकि उसे स्वच्छंद अधिकार है, उसने आपके स्टेटमेंट या तख्मीने या बही खातों को अविश्वसनीय बताकर अपने मन से आपकी आय 3 लाख रुपया अनुमानित कर दी और तदनुसार कर की मांग आपके सामने रख दी. निश्चित है, अगर आप चोरबाज़ारी नहीं करते हैं तो आप वह मांग पूरी कर नहीं सकते. ऑफिसर को अधिकार है कि वह आपके ऊपर उतने ही रुपये का दंड और लगा दे और सरकारी महसूल या लगान वसूल करने के सारे तरीक़ों को इस्तेमाल कर ले. देखा गया है कि आय की कोई भी निजी या व्यक्तिगत संपत्ति हो, उसको फौरन कुर्क करके नीलाम तक किया जा सकता है. निश्चय ही इस तरह जबरन बेची हुई वस्तु औने-पौने में ही बिकती है. बाज़ार में आपकी इज़्ज़त-आबरू ख़त्म हो जाती है.

विचित्र बात यही है कि इसके विरुद्ध की गई अपील कोई न्यायाधीश या न्याय विभाग का ऑफिसर नहीं सुनता, बल्कि उसी आयकर विभाग का एक दूसरा ऑफिसर, जो शायद कल तक ऑफिसर की हैसियत से वैसे ही अनेक एसेसमेंट कर चुका होता है, सुनता है. यहां फिर तो भ्रष्टाचार चलता है या वे अपीलेट ऑफिसर भी पर-पीड़न में आनंद का अनुभव करने वाले होते हैं. मान भी लीजिए, आप अपील जीत गए (जिसकी सुनवाई 4 साल पहले से तो होने से रही), निश्चित भी हो गया कि आपकी आय 1 लाख रुपया ही थी, जैसी आपने नक्शे में भर कर दिखाई और जिसका पूरा-पूरा टैक्स आप अदा भी कर चुके थे, तो क्या हुआ? आपकी दुकान का नीलाम तो हो ही चुका, आपकी व्यक्तिगत या निजी संपत्ति चंद रुपयों में नीलाम हो चुकी, आपकी इज़्ज़त तो बाज़ार में समाप्त हो ही गई. क़ानून से आपको इन सबका कुछ भी मुआवज़ा मिल नहीं सकता और न उस आयकर ऑफिसर पर ही, जिसने इतनी अन्यायपूर्ण कार्रवाई की थी, किसी तरह की अनुशासन की कार्रवाई की जाती है. वह उसी तरह से अपने मन की इच्छा के अनुसार दूसरे अनेक नागरिकों को सताता रहता है या उनकी इज़्ज़त लेता रहता है.

महावीर प्रसाद आर मोरारका का जन्म 12 अगस्त, 1919 को नवलगढ़ (झुंझनू) राजस्थान में हुआ था. उद्योगपति, स्वप्नदृष्टा और लेखक से कहीं अधिक वह उदात्त मानवीय मूल्यों के संवाहक थे. उनकी गणना भारत के प्रमुख उद्योगपतियों में की जाती है.

 

महावीर प्रसाद आर मोरारका

महावीर प्रसाद आर मोरारका का जन्म 12 अगस्त, 1919 को नवलगढ़ (झुंझनू) राजस्थान में हुआ था. उद्योगपति, स्वप्नदृष्टा और लेखक से कहीं अधिक वह उदात्त मानवीय मूल्यों के संवाहक थे. उनकी गणना भारत के प्रमुख उद्योगपतियों में की जाती है.

Latest posts by महावीर प्रसाद आर मोरारका (see all)

महावीर प्रसाद आर मोरारका

महावीर प्रसाद आर मोरारका का जन्म 12 अगस्त, 1919 को नवलगढ़ (झुंझनू) राजस्थान में हुआ था. उद्योगपति, स्वप्नदृष्टा और लेखक से कहीं अधिक वह उदात्त मानवीय मूल्यों के संवाहक थे. उनकी गणना भारत के प्रमुख उद्योगपतियों में की जाती है.

  • hari

    इसने मेरी बहुत मदत की है , मुझे मेरे स्कूल के काम के लिए बेकारी की समस्या पर एक निबन्ध लिखना था इसलिए इसने मेरी बहुत मदत की है! धन्यवाद !

  • yash

    आप बोहोत ही अच्छा व्रिते करते hain

    • hari

      अपनी बात को सही से लिख .