बिहारः आरटीआई कार्यकर्ता सुरक्षित नहीं

सूचना के अधिकार के सिपाही रामविलास सिंह अपनी जान की सुरक्षा की गुहार लगाते रहे, पर लखीसराय सहित बिहार का सारा पुलिस अमला आराम से सोता रहा. राज्य मानवाधिकार आयोग में भी उनकी फरियाद अनसुनी रह गई. अपराधी उन्हें जान से मारने की धमकी दे रहे थे और प्रशासन ने आंखें मूंद लेने में भलाई समझी. रामविलास की दुविधा यह हो गई कि वह कई मोर्चे पर एक साथ लड़ने को मजबूर हो गए थे. अपराधियों से कहीं ज़्यादा पुलिस-प्रशासन की उदासीनता उन्हें परेशान करने लगी. आख़िरकार वही हुआ, जिसका डर था. बीते आठ दिसंबर को वह दिनदहाड़े गोलियों से भून डाले गए. जिसकी गिरफ्तारी के लिए वह चिल्लाते रहे, उसी बमबम सिंह के ख़िला़फ उनकी हत्या की प्राथमिकी दर्ज की गई है. दु:ख की बात यह है कि अब तक वह शातिर पकड़ा नहीं गया है. शायद पकड़ा भी न जाए. ऐसा इसलिए, क्योंकि बमबम सिंह की पुलिस से मिलीभगत की एक बानगी रामविलास सिंह द्वारा बिहार मानवाधिकार आयोग को लिखे एक पत्र में मिलती है. बमबम सिंह की गिरफ्तारी के संबंध में उन्होंने लिखा था कि पुलिस अधीक्षक लखीसराय द्वारा भेजा गया जांच प्रतिवेदन सही है, लेकिन उसके साथ लगा अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी लखीसराय का जांच प्रतिवेदन दोषपूर्ण है. उक्त दोनों मामलों में कुर्की-जब्ती लखीसराय थाने को ही करनी है.

अपराधियों से कहीं ज़्यादा पुलिस-प्रशासन की उदासीनता उन्हें परेशान करने लगी. आख़िरकार वही हुआ, जिसका डर था. बीते आठ दिसंबर को वह दिनदहाड़े गोलियों से भून डाले गए. जिसकी गिरफ्तारी के लिए वह चिल्लाते रहे, उसी बमबम सिंह के ख़िला़फ उनकी हत्या की प्राथमिकी दर्ज की गई है. दु:ख की बात यह है कि अब तक वह शातिर पकड़ा नहीं गया है. शायद पकड़ा भी न जाए. ऐसा इसलिए, क्योंकि बमबम सिंह की पुलिस से मिलीभगत की एक बानगी रामविलास सिंह द्वारा बिहार मानवाधिकार आयोग को लिखे एक पत्र में मिलती है.

अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी लखीसराय के जांच प्रतिवेदन में कहा गया है कि उक्त दोनों मामलों में कुर्की-जब्ती हो चुकी है, जबकि ऐसा आज तक नहीं हुआ. अगर कुर्की-जब्ती हुई है तो लखीसराय कोर्ट से उसकी सूची की नकल मांगने पर अनुमंडल पुलिस  पदाधिकारी का काला चेहरा सामने आ जाएगा. 25 सितंबर को लिखे गए इस पत्र में कहा गया है कि दो-दो हत्याओं का दोषी लखीसराय पुलिस द्वारा नहीं पकड़ा जा रहा है. पत्र में आरोप लगाया गया है कि लखीसराय थानाध्यक्ष संतोष कुमार सिंह मोटी रकम लेकर अभियुक्त को राहत दिए हुए हैं. थानाध्यक्ष लखीसराय के मोबाइल की एक वर्ष की काल डिटेल निकाल कर देखने से पता चल जाएगा कि वह अपराधियों को किस तरह संरक्षण देते हैं. पत्र में रामविलास सिंह ने लिखा कि मेरी मांग पर पुनर्विचार करके अभियुक्त को पकड़ कर मेरी जान-माल की सुरक्षा का प्रबंध किया जाए, वरना यह भ्रष्ट थानाध्यक्ष कभी भी मुझे झूठे मामले में फंसा सकता है या किसी अपराधी से मरवा सकता है.

रामविलास सिंह का पत्र इस बात की ओर इशारा करता है कि बिहार में आरटीआई कार्यकर्ताओं के लिए काम करना कितना मुश्किल हो गया है. रामविलास सिंह से पहले 2010 में बरौनी में शशिधर मिश्रा की हत्या हो चुकी है. आरटीआई कार्यकर्ता शिवप्रकाश राय बताते हैं कि बिहार में एक सौ से अधिक फर्ज़ी मुक़दमे आरटीआई कार्यकर्ताओं पर दर्ज हो चुके हैं. मानवाधिकार आयोग ने उनमें से 54 मामले वापस लेने और दोषी लोगों को दंडित करने का निर्देश दिया है, पर दु:ख की बात यह है कि यथास्थिति बनी हुई है. रामविलास सिंह ने बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग समेत समस्त आला अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई न किए जाने पर सूचना के अधिकार के तहत उनके विरुद्ध की जा रही कार्रवाई और भ्रष्ट डीएसपी की संपत्ति का ब्योरा भी मांगा था, बावजूद इसके हत्याभियुक्त के ख़िला़फ कोई कार्रवाई न किया जाना हत्या की साजिश में पुलिस पदाधिकारियों के शामिल होने के कयास को पुख्ता करता है. शिवप्रकाश राय की मांग है कि हत्या की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए. जिन पुलिस अधिकारियों पर पूर्व में ही उन्होंने संदेह व्यक्त किया है और जिनके इस हत्या की साजिश में शामिल होने की आशंका है, उनसे इस मामले की जांच कराना न्याय के सिद्धांत के विरुद्ध है. इसलिए संबंधित थानेदार एवं डीएसपी की अपराधियों के साथ साठगांठ की जांच की जाए और कर्तव्य में लापरवाही बरतने के लिए उनके ख़िला़फ विभागीय कार्रवाई भी की जाए. मृतक के परिवारीजनों को आज भी जान का ख़तरा बना हुआ है, उनकी सुरक्षा की उचित व्यवस्था की जानी चाहिए.

नागरिक अधिकार मंच ने हत्या के विरोध में पटना में धरने का आयोजन कर हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग की. नेशनल आरटीआई फोरम की संयोजक डॉ. नूतन ठाकुर ने कहा कि देश में सूचना अधिकार अधिनियम का ठीक ढंग से अनुपालन नहीं हो रहा है. रामविलास सिंह और शशिधर मिश्रा की हत्या यह बताती है कि बिहार में भी स्थिति अच्छी नहीं है. सामाजिक कार्यकर्ता रजनीश कुमार ने रामविलास सिंह की हत्या की उच्चस्तरीय जांच की मांग की. जदयू विधान पार्षद विनोद सिंह कहते हैं कि हत्या किसी की हो, वह निंदनीय है. लोकतंत्र और सभ्य समाज में हिंसा का कोई स्थान नहीं है. राजद सांसद रामकृपाल यादव का कहना है कि यह रामविलास सिंह की नहीं, बल्कि आम जनता को मिले लोकतांत्रिक अधिकारों की हत्या है. ये हत्याएं सरकार की शह पर हो रही हैं, ताकि सच की आवाज़ दबाई जा सके. सच्चाई के लिए लड़ने वालों को सरकार कोई सुरक्षा नहीं दे रही है. राज्य में अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है. लोजपा के प्रदेश अध्यक्ष पशुपति पारस कहते हैं कि रामविलास सिंह की हत्या सरकार की नाकामी का परिणाम है. इस सरकार में जान-माल की सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है.