बिहार : नीतीश की सभा में कुर्सियां क्यों उछलीं

सत्ता की राजनीति में कुर्सियों का हिलना-डुलना शुभ नहीं माना जाता है. ऐसे में अगर कुर्सियां उछाली जाने लगें तो उसे ख़तरे की घंटी ही समझिए. सेवा यात्रा के दौरान बिक्रमगंज में मुख्यमंत्री की सभा में जब नाराज़ लोगों ने कुर्सियां लहरानी शुरू कर दीं तो सभी अवाक रह गए. पटना में फोन की घंटियां घनघनाने लगीं. एक ही सवाल, यह क्या हो गया. सुशासन में इस तरीक़े का विरोध अपने आप में ऐसा सवाल है कि क्या कोरे वायदों से लोगों का भ्रम टूट रहा है और बिहार की जनता अब यह समझने लगी है कि अभी ज़मीनी विकास के रास्ते में बहुत सारी बाधाएं हैं. कुर्सी उछाल कर जिस विरोध का एहसास कराने की कोशिश की गई, दरअसल वह गुस्सा शाहाबाद में दुर्गावती एवं इंद्रपुरी जलाशय परियोजनाओं सहित जनहित के कई मसलों, जैसे कि चावल एवं पत्थर उद्योग पर सरकार की वायदाख़िला़फी, लेटलतीफी और वोट की राजनीति को लेकर जनता के दिल व पेट पर लगी चोट की एक झलक मात्र है. अगर नीति और नीयत साफ न हुई तो तख्त-ओ-ताज बदलने के लिए शाहाबाद की धरती पहले भी नाम कमा चुकी है.

इस बार सेवा यात्रा के दौरान नीतीश कुमार को कई ज़िलों में जनता की नाराज़गी का शिकार होना पड़ रहा है. बेतिया, मुज़फ्फरपुर और सहरसा की कहानी सभी जानते हैं. इसी क्रम में सुरक्षा के बड़े तामझाम और पुख्ता प्रबंधों के बीच रोहतास में भी सेवा यात्रा हुई. शुरुआती दौर में ठीकठाक चली यात्रा में लोग नई घोषणाओं की आस में सुशासन बाबू की ओर टकटकी लगाए बैठे थे. मुख्यमंत्री ने दुर्गावती जलाशय परियोजना, इंद्रपुरी सोन बैराज, रोहतासगढ़ किला, जलालपुर और तेनुअज के खेत-खलिहानों में अपने काफिले के साथ किसानों के बीच जाकर उनकी बात सुनी.

दरअसल, इस बार सेवा यात्रा के दौरान नीतीश कुमार को कई ज़िलों में जनता की नाराज़गी का शिकार होना पड़ रहा है. बेतिया, मुज़फ्फरपुर और सहरसा की कहानी सभी जानते हैं. इसी क्रम में सुरक्षा के बड़े तामझाम और पुख्ता प्रबंधों के बीच रोहतास में भी सेवा यात्रा हुई. शुरुआती दौर में ठीकठाक चली यात्रा में लोग नई घोषणाओं की आस में सुशासन बाबू की ओर टकटकी लगाए बैठे थे. मुख्यमंत्री ने दुर्गावती जलाशय परियोजना, इंद्रपुरी सोन बैराज, रोहतासगढ़ किला, जलालपुर और तेनुअज के खेत-खलिहानों में अपने काफिले के साथ किसानों के बीच जाकर उनकी बात सुनी. अंत में बिक्रमगंज की सभा में लोग इसलिए जुटे कि यही वह समय है, जब मुख्यमंत्री रोहतास को कुछ देने की घोषणा करेंगे. सभा की शुरुआत होते ही भीड़ ने ऐसे तेवर दिखाए कि मुख्यमंत्री की चार दिवसीय सुखद यात्रा दु:खद पहलू में बदल गई. मंच पर काराकाट के जदयू सांसद महाबली के आते ही भीड़ ने उनसे वापस जाने की मांग करते हुए नारेबाज़ी शुरू कर दी. इसी के साथ सुशासन की बखिया उधेड़ने का काम शुरू हो गया. यह गुबार रोहतास के ज़िला मुख्यालय सासाराम में आयोजित जनता दरबार में पत्थर उद्यमियों को सुनाई गई खरी-खोटी और कई समस्याओं का निराकरण न होने के कारण बाहर निकल रहा था.

देखते-देखते बिक्रमगंज की सभा कुछ पलों के लिए ऐसी बिगड़ गई कि लोग हवा में कुर्सियां लहराने लगे. वैसे तो सेवा यात्रा की किरकिरी 23 दिसंबर से ही शुरू हो गई थी, जब डेहरी में मुख्यमंत्री द्वारा कर्पूरी ठाकुर की प्रतिमा के अनावरण के बाद अति पिछड़ा संघर्ष मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र ठाकुर ने उसे यह कहकर दूध से धो डाला कि नीतीश कुमार को कर्पूरी ठाकुर की प्रतिमा छूने का कोई अधिकार नहीं है. उन्होंने ज़िले में घूम-घूमकर एक पर्चा वितरित किया, जिसमें लिखा था कि 1978 के वैशाली ज़िला अंतर्गत सराय सम्मेलन में नीतीश कुमार और उनकी टीम ने कर्पूरी ठाकुर द्वारा अति पिछड़ों के संदर्भ में दिए गए आरक्षण फॉर्मूले का विरोध किया था. सेवा यात्रा का विरोध राजद ने 10 दिन पहले से ही शुरू कर दिया था. पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राम बिहारी सिंह एवं पूर्व विधायक ललन पासवान ने दुर्गावती जलाशय परियोजना को लेकर ज़बरदस्त मोर्चाबंदी की. जिस दिन सेवा यात्रा की शुरुआत हुई, उसी दिन इन नेताओं ने ज़िला मुख्यालय में दुर्गावती जलाशय परियोजना के सवाल पर एक बड़ा धरना आयोजित किया, जिसमें शाहाबाद के हितों से जुड़े कई मुद्दे उठाए गए. सेवा यात्रा के दौरान जब मुख्यमंत्री उक्त परियोजना का निरीक्षण करने पहुंचे और उन्होंने उसके संबंध में कोई ठोस वायदा नहीं किया तो राजद की घेराबंदी का असर साफ दिखा.

इन परिस्थितियों के बाद भी लोगों को उम्मीद थी कि बिक्रमगंज की सभा में मुख्यमंत्री ज़रूर कुछ नया कहेंगे, लेकिन जब उन्होंने वहां भी पुराना राग अलापा तो पता चला कि धान के कटोरे रोहतास के लिए सेवा यात्रा में कुछ भी नहीं था. कुछ देर के लिए मुख्यमंत्री रोहतासगढ़ किला ज़रूर गए और उसे पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने की बात कही, लेकिन यह बात पिछले 20 वर्षों से कही जा रही है. मुख्यमंत्री ने सेवा यात्रा के सफल संचालन हेतु प्रशासन को धन्यवाद दिया. उनके चले जाने के बाद रोहतास के लोगों में पत्थर उद्योग को लेकर उनकी तऱफ से मिले जवाब, दुर्गावती जलाशय परियोजना के संबंध में गोलमटोल अंदाज़, रोहतासगढ़ किले और धान ख़रीददारी को लेकर हो रही नाटकबाज़ी की चर्चा ख़ूब है. राजद प्रवक्ता रामबिहारी सिंह कहते हैं कि सेवा यात्रा में शाहाबाद की जनता ठग ली गई. धान के कटोरे में धान की ख़रीददारी में सरकार पूरी तरह विफल रही. जनता को उम्मीद थी कि सेवा यात्रा में नीतीश कुमार शाहाबाद को उसका वाजिब हक देंगे, मगर वह स़िर्फ गोलमटोल बातें करके चले गए. लगता है, झूठे वायदे करने में उन्होंने पीएचडी कर रखी है, लेकिन शाहाबाद की जनता उन्हें समझ चुकी है और वह सही समय पर अपना फैसला ज़रूर सुनाएगी. पूर्व विधायक ललन पासवान कहते हैं कि देखते जाइए, अभी तो विरोध की शुरुआत है. जनता बहुत त्रस्त है और राजद जल्द ही पूरे बिहार में इस सरकार को बेनकाब कर देगा.