बसपा का श्वेत पत्र झूठ का पुलिंदा है

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के क्षत्रप श्रीप्रकाश जायसवाल की अहम भूमिका है. केंद्रीय कोयला मंत्री जायसवाल का कद इसलिए भी ऊंचा कहा जा सकता है कि वह ऐसे समय में उत्तर प्रदेश से संसदीय चुनाव जीतकर पहुंचे, जब यहां कांग्रेस हाशिए पर थी. सोनिया और राहुल के लगातार दौरों और केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद प्रदेश के कांग्रेसियों ने ताक़त लगानी शुरू कर दी. कांग्रेस के युवराज राहुल का मिशन यूपी पूरा करने के लिए प्रयासरत श्रीप्रकाश जायसवाल से अजय कुमार  ने एक लंबी बातचीत की. पेश हैं मुख्य अंश:-

कोयला मंत्री के रूप में उत्तर प्रदेश के लिए आपकी क्या भूमिका रही?

भारत की कोयला खानों और उनके उत्पादन, खनन एवं ब्लॉकों को लेकर काफी जटिलताएं थीं, खानों पर दबंग ठेकेदारों का एकछत्र राज था, जिसे काफी हद तक दूर किया जा चुका है. उत्तर प्रदेश के लिए कोयले की कमी न होने पाए, इस पर पूरा ध्यान दिया गया. बाहर के देशों में भी कोयला खनन के लिए योजनाएं बनाई जा रही हैं.

चुनाव सिर पर हैं, अब तक आपका राजनीतिक कौशल कितना कारगर रहा है?

राहुल का मिशन पूरा करने के लिए हरसंभव कोशिश हो रही है. राहुल स्वयं कद्दावर नेता बन चुके हैं. उत्तर प्रदेश में उनके दौरों के दरम्यान जनता का रुझान अच्छा देखा जा रहा है. राजनीति करने की उनकी शैली अपने में एक है. वह गंभीर हैं, तीखा सच बोलते हैं, जिसके कारण दूसरे दल के लोग आहत हो उठते हैं, मगर कांग्रेस को इसकी कोई परवाह नहीं  है, कांग्रेस पुरानी और सर्वजन की पार्टी रही है. दलितों एवं अल्पसंख्यकों को ऊपर उठाने में कांग्रेस का अहम रोल रहा है.

मुस्लिम राजनीति के संबंध में सपा और बसपा से निपटने की रणनीति क्या होगी?

सपा और बसपा की कार्यशैली से जनता आहत हो चुकी है. विकास के नाम पर दोनों दलों ने राजनीति के नाम पर अल्पसंख्यकों के वोट ही झटके, उनके लिए कोई ऐसी योजनाएं नहीं बनाईं, जिनसे उनका स्तर ऊंचा होता. कांग्रेस इस पर लगातार विचार करती चली आ रही है. संप्रदायवादी राजनीति ने प्रदेश के विकास का पहिया रोक दिया है. प्रदेश की इन सरकारों ने विकास के छठे पायदान बैठे प्रदेश को 21वें पायदान पर ढकेल दिया है, जनता इसे बर्दाश्त नहीं करने वाली. जहां अन्य राज्य विकास के शिखर पर पहुंच रहे हैं, वहीं उत्तर प्रदेश सपा और बसपा के कारण आंसू बहा रहा है, जनता घुट-घुटकर जी रही है.

कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश के मुस्लिमों के लिए काफी कुछ किया है. पिछली सरकार में भी उनके लिए कई योजनाएं बनाई गईं. उनकी स्थिति में काफी हद तक सुधार आया है, यह कांग्रेस की देन है. पार्टी मुस्लिमों के उत्थान के लिए प्रयास कर रही है. वह उनकी शिक्षा एवं रोज़गार के लिए कड़ी नज़र रखे हुए है. कांग्रेस हर वह उपाय खोज रही है, जिससे दबे-कुचले लोगों को दो जून की रोटी नसीब हो सके, रोज़गार मुहैया हो सके. मनरेगा के माध्यम से काफी पैसा मिला, लेकिन प्रदेश की बेईमान सरकार ने केंद्रीय पैकेजों और मनरेगा के तहत आने वाला पैसा लूट लिया.

हमारी नज़र स़िर्फ उत्तर प्रदेश के विकास पर टिकी है. पिछले 20 सालों में उत्तर प्रदेश गर्त में चला गया है. किसानों को दो जून की रोटी मिलना दूभर है, रोज़गार के अवसर ख़त्म हो चुके हैं. मेनचेस्टर कहलाने वाले कानपुर की मिलें बंद हो चुकी हैं. लाखों लोग बेरोज़गार होकर दर-दर भटक रहे हैं. केंद्र सरकार ग़रीबों के लिए योजनाएं बनाकर उत्तर प्रदेश को करोड़ों रुपये के पैकेज भेजती रही, लेकिन वह पैसा ग़रीबों तक नहीं पहुंच पाया, सब हाथी का निवाला बनता गया. कभी सपा की सरकार में बैठे मंत्रियों और अफसरों ने खाया तो आज बसपा के मंत्रियों के घर पैसा गिनने की मशीनें लग चुकी हैं. जनता आधा पेट खाकर सो रही है. अगर राज्य में कांग्रेस की सरकार बनी तो वह मनरेगा के एक-एक पैसे का हिसाब लेकर रहेगी और भ्रष्टाचारी जेल जाएंगे.

मुस्लिम आरक्षण की राजनीति चरम पर है, कांग्रेस की नीति क्या रहेगी?

कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश के मुस्लिमों के लिए काफी कुछ किया है. पिछली सरकार में भी उनके लिए कई योजनाएं बनाई गईं. उनकी स्थिति में काफी हद तक सुधार आया है, यह कांग्रेस की देन है. पार्टी मुस्लिमों के उत्थान के लिए प्रयास कर रही है. वह उनकी शिक्षा एवं रोज़गार के लिए कड़ी नज़र रखे हुए है. कांग्रेस हर वह उपाय खोज रही है, जिससे दबे-कुचले लोगों को दो जून की रोटी नसीब हो सके, रोजगार मुहैया हो सके. मनरेगा के माध्यम से काफी पैसा मिला, लेकिन प्रदेश की बेईमान सरकार ने केंद्रीय पैकेजों और मनरेगा के तहत आने वाला पैसा लूट लिया. भ्रष्ट मंत्रियों की माला पहने बैठी सरकार को जनता समझ चुकी है. उत्तम प्रदेश का ढिंढोरा पीटने वाली बसपा ने प्रदेश के लोगों के साथ अन्याय किया. जिस प्रदेश से प्रधानमंत्री बनकर जाते हों, उसे जातिवाद के कैंसर ने घेर लिया है. जाति के नाम पर लोगों को गुमराह किया जा रहा है. सदन में अच्छे लोग चुनकर नहीं पहुंच पा रहे हैं. दबंगों और बाहुबलियों का सिक्का चल रहा है. 16 मिनट के सत्र में प्रदेश के चार टुकड़े करने का विधेयक पेश कर दिया गया, इससे यहां की हालत बख़ूबी समझी जा सकती है. चुनाव में बसपा का दंभ टूटेगा, जनता उसे सज़ा ज़रूर देगी.

राहुल भी मुसलमानों का दामन पकड़ रहे हैं, वह उनके घर और मस्जिदों में गए, इसके पीछे क्या रणनीति है?

यह राहुल का अपना नज़रिया है, वह हर कौम के उत्थान के लिए कई सालों से दर-दर भटक रहे हैं, उनमें चाहे दलित हों, किसान हों, मज़दूर हों या अन्य दबा-कुचला वर्ग, वह सभी को बराबर का दर्जा देते हैं. राहुल स़िर्फ विकास के लिए ऐसे लोगों से मिलते हैं, उनके घर जाकर पूछते हैं कि उन्हें क्या तकलीफें हैं. केंद्र की ओर से उनके लिए जो पैसा भेजा जा रहा है, उसका लाभ उन्हें मिल पा रहा है या नहीं. यह तो स्वर्गीय राजीव गांधी का भी कहना था कि राज्यों को केंद्र की ओर से भेजे गए एक रुपये में से मात्र 15 पैसे ही जनता तक पहुंच पाते हैं. पिता के पदचिन्हों पर चलने वाले राहुल भी उन्हीं बातों पर अमल कर रहे हैं कि जनता को किस तरह पूरा लाभ मिल सके और बिचौलियों से पैसा कैसे बचाया जाए.

बसपा की सोशल इंजीनियरिंग के बारे में आपका क्या नज़रिया है, क्या उसने सभी जातियों के लिए बराबर का धर्म निभाया?

बिल्कुल नहीं. बसपा केवल सरकारी खजाना लूटने का काम कर रही है. मायावती सरकार भ्रष्टों की जमात है. हर मंत्री किसी न किसी घोटाले या काले कारनामे में फंसा हुआ है. कई जेल में हैं, दर्जनों लोकायुक्त की जांच के दायरे में आ चुके हैं. सोशल इंजीनियरिंग ने मुट्ठी भर ठाकुरों, ब्राह्मणों, वैश्यों एवं मुस्लिमों के परिवारों और उनके रिश्तेदारों को ही फायदा पहुंचाया. जनता को दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं. प्रताड़ित लोगों की एफआईआर नहीं लिखी जाती. वे मुख्यमंत्री, मानवाधिकार आयोग और राज्यपाल तक चिट्ठी भेजते हैं, पर उनकी सुनी नहीं जाती. ऐसी सरकार को जनता ही सबक सिखा सकती है और अब वह समय आ गया है.

प्रदेश की क़ानून व्यवस्था के बारे में आपका क्या कहना है?

मायावती ने सत्ता संभालते समय प्रदेश को अन्याय, अपराध, भय एवं भ्रष्टाचार मुक्त और विकास युक्त उत्तम प्रदेश बनाने का संकल्प लिया था, हुआ उसका उलटा. लोगों की एफआईआर तक नहीं लिखी जा रही है. हर जगह भ्रष्टाचार का बोलबाला है, लूट-खसोट जारी है, विकास रुका हुआ है. यह जनता के साथ धोखा है. बसपा ने नौकरशाही को ख़रीद रखा है, मीडिया को दबा रखा है, कोई कुछ बोल नहीं सकता. नौकरशाह नख-दंत विहीन हैं. योग्य पदों पर अयोग्य लोग ठेकेदार बनकर बैठे हैं. शासन की हनक और निष्पक्षता ग़ायब हो चुकी है. प्रशासन जनता के प्रति अपने कर्तव्य, ज़िम्मेदारी और जवाबदेही भुला बैठा है. जिस प्रदेश की मुख्यमंत्री अपनी एक अदद सैंडिल हवाई जहाज से मंगवाए, उसकी हालत क्या होगी, समझना मुश्किल नहीं है.

बसपा के श्वेत पत्र के बारे में आपकी राय?

वह श्वेत पत्र नहीं, काला चिट्ठा है, झूठ का पुलिंदा है.

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