गुरुवार दिवस गुरु का मानो, सद्गुरु ध्यान चित्त में ठानो.
स्थोथरा पठन हो अति फलदाई, महाप्रभावी सदा सहाई.
व्रत एकादशी पुण्य सुहाई, पठन सुदिन इसका कर भाई.
निश्चय चमत्कार थम पाओ, शुभ कल्याण कल्पतरु पाओ.
उत्तम गति स्तोत्र प्रदाता, सदगुरु दर्शन पाठक पाता.
इह परलोक सभी हो शुभकर, सुख-संतोष प्राप्त हो सत्वर.
स्तोत्र पारायण सद्य: फल दे, मंद बुद्धि को बुद्धि प्रबल दे.
हो संरक्षक अकाल मरण से. हो शतायु जा स्तोत्र पठन से.
निर्धन धन पाएगा भाई, महा कुबेर सत्य शिव साईं.
प्रभु अनुकंपा स्तोत्र समाई. कवि वाणी शुभ सुगम सहाई.
संततिहीन पाएं संतान, दायक स्तोत्र पठन कल्याण.
मुक्त रोग से होगी काया, सुखकर हो साईं की छाया.
स्तोत्र पाठ नित मंगलमय है, जीवन बनता सुखद प्रखर है.
ब्रह्म विचार गहन तर पाओ, चिंतामुक्त जियो हर्षाओ.
आदर उर का इसे चढ़ाओ, अंत दृढ़ विश्वास बसाओ.
तर्क-वितर्क विलग कर साधो, शुद्ध विवेक बुद्धि अवराधो.
यात्रा करो शिरडी तीर्थ की, लगन लगी को नाथ चरण की.
दीन-दु:खी का आश्रय जो हैं, भक्त-काम-कल्प-द्रुम सोहें.
सुप्रेरणा बाबा की पाऊं, प्रभु आज्ञा पा स्तोत्र रचाऊं.
बाबा का आशीष न होता, क्यों यह गान पतित से होता.
शक संवत अठरह चालीसा, भादों मास शुक्ल गौरीशा.
शशिवार गणेश चौथ शुभ तिथि, पूर्ण हुई साईं की स्तुति.
पुण्य धार रेवा शुभ तट पर, माहेश्वर अति पुण्य सुथल पर.
साईंनाथ स्तवन मंजरी, राज्य अहिल्या भू में उतारी.
मांधाता का क्षेत्र पुरातन, प्रगटा स्तोत्र जहां पर पावन.
हुआ मन पर साईं अधिकार, समझो मंत्र साईं उद्गार.
दासगणु किंकर साईं का, रज कण संत साधु चरणों का.
लेखबद्ध दामोदर करते, भाषा गायन भूपति करते.
साईंनाथ स्तवन मंजरी, तारक भवसागर हृदय तंत्री.
सारे जग में साईं छाए, पांडुरंग गुण किंकर गाए.
श्रीहरिहरापर्णमस्तु शुभं भवतु, पुंडलिक वरदा विट्ठल.
सीताकांत स्मरण जय-जय राम, पार्वतीपते हर-हर महादेव.
श्री सद्गुरु साईंनाथ महाराज की जय.
श्री सद्गुरु साईंनाथपर्णमस्तु.
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