खेल मंत्रालय का पेंच

वर्ल्ड हॉकी सीरीज (डब्लूएसएच) को खेल मंत्रालय ने ध्यान चंद स्टेडियम तो उपलब्ध करा दिया है, लेकिन इसे उसने निजी संस्था के आयोजन का दर्जा दिया है. स्टेडियम देने के बदले मंत्रालय कामर्शियल रेट पर किराया वसूलेगा. हाल में खेल मंत्री अजय माकन ने मंत्रालय के अधीन आने वाले दिल्ली के स्टेडियमों को सरकारी स्कूल-कॉलेजों के लिए खोलने की घोषणा की. खेल आयोजन के लिए उन्हें महज़ एक हज़ार रुपये प्रतिदिन किराया चुकाना होगा, लेकिन इसकी भरपाई मंत्रालय कॉरपोरेट या निजी संस्थाओं के आयोजन पर मोटी वसूली के ज़रिए करेगा. डब्लूएसएच को 10 हज़ार रुपये प्रतिदिन किराए के अलावा बिजली, पानी, एसी, सफाई, पार्किंग एवं इलेक्ट्रॉनिक स्कोर बोर्ड का ख़र्च देना होगा. इसके अलावा लाइव कवरेज के लिए 25 हज़ार रुपये प्रतिदिन के साथ स्टेडियम में बैनर लगाने के भी चार्ज देने होंगे. माकन ने यह भी कहा कि ओलंपिक क्वालीफायर तक वह हॉकी इंडिया और आईएचएफ के विलय के मामले को तूल नहीं देना चाहते हैं. भारत ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर जाए, इसके बाद वह इस मामले में दख़ल देंगे. उन्होंने कहा कि विलय का विरोध आईओए और आईएचएफ ने किया, जबकि मंत्रालय आईएचएफ को निर्देश नहीं दे सकता है. नेशनल चैंपियनशिप कराने के लिए भी खेल संघों को पांच हज़ार रुपये प्रतिदिन किराया देना होगा. निजी स्कूलों-विश्वविद्यालयों को स्टेडियमों के लिए मोटी रकम देनी होगी.

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