शैलेंद्र दुबे हंसमुख और मिलनसार व्यक्ति थे

शैलेंद्र दुबे जिस उम्र में थे, वह उम्र जाने की नहीं होती. वह बहुत हंसमुख, मिलनसार और ठोस ख्याल के व्यक्ति थे. उन्होंने बहुत ही सादगीपूर्ण जीवन जिया और सादगी के ही रास्ते ईश्वर के पास चले गए. उनकी मित्र मंडली में जिन लोगों की संख्या बहुत ज़्यादा थी, वे पत्रकार थे. शैलेंद्र जी के निधन का समाचार पाकर जिस तरह पत्रकार बिरादरी उनके पार्थिव शरीर के आसपास खड़ी हो गई और दोनों दिन उनके साथ रही, वह यह दर्शाता है कि शैलेंद्र जी पत्रकारों के बीच कितने लोकप्रिय थे. उनका परिवार मुंबई में रहता था. शैलेंद्र जी जहां रहते थे, वह सातवीं मंजिल का फ्लैट था. उस सोसायटी में लिफ्ट की सुविधा नहीं थी. शैलेंद्र जी इस उम्र में आकर कुछ बीमारियों के शिकार हो गए थे. इसके बावजूद उन्होंने ग्राउंड फ्लोर का फ्लैट नहीं लिया. अगर वह चाहते तो ऐसा फ्लैट ले सकते थे. दिन में तीन-चार बार ऊपर चढ़ना और नीचे उतरना उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक था, पर इसके बावजूद वह अपने स्वास्थ्य की चिंता किए बिना सात मंजिल चढ़ते और उतरते थे. शैलेंद्र जी कमल मोरारका के काफी विश्वसनीय सहयोगी थे. वह कमल जी को प्यार से बापू कहते थे और कमल जी की आंख का इशारा समझते थे. शैलेंद्र जी अक्सर अपने यहां पत्रकारों को बुलाते थे. वह शाम इतनी शानदार और यादगार होती थी, वह आयोजन इतना भव्य होता था कि पत्रकार बिरादरी उसका इंतजार करती थी. यह सब शैलेंद्र जी के व्यक्तित्व का ही असर था.

शैलेंद्र दुबे चौथी दुनिया के पहले प्रकाशक थे. चौथी दुनिया जब 1986 में शुरू हुआ तो कमल मोरारका ने उन्हें बुनियादी सुविधाएं जुटाने, बुनियादी ज़मीन बनाने और चौथी दुनिया की टीम को कोई दिक्कत और परेशानी न हो, इसकी ज़िम्मेदारी सौंपी. शैलेंद्र दुबे इसी कोशिश में रहते थे कि चौथी दुनिया के पत्रकारों को कभी कोई परेशानी न हो. शैलेंद्र जी अब हमारे बीच नहीं रहे. समूची पत्रकार बिरादरी, ख़ासकर चौथी दुनिया परिवार के लिए उनका जाना एक अपूरणीय क्षति है. चौथी दुनिया परिवार ईश्वर से प्रार्थना करता है कि शैलेंद्र जी की आत्मा को शांति मिले और उनकी यादें हमारे दिलों में सदा बनी रहें.