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बच गया स्विट्ज़रलैंड

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स्विट्‌ज़रलैंड फुटबॉल के सिर से निलंबन की तलवार हट गई है. फीफा ने कहा है कि वह दिसंबर के अपने फैसले से उलट स्विट्‌ज़रलैंड को संस्था की सदस्यता से निलंबित नहीं करेगा. अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल संगठन फीफा ने हाल में एक बयान में कहा कि उसकी इमरजेंसी कमेटी ने फैसले पर विचार किया है और स्विस फुटबॉल संघ (एसएफवी) को फीफा की कार्यकारिणी के 16 दिसंबर के फैसले के संबंध में निलंबित नहीं किया जाएगा. फीफा ने एसएफवी से कहा है कि वह इस मामले में आगे की कार्रवाई के बारे में जानकारी देता रहे. विश्व संस्था से निलंबन की तलवार हटाने के लिए स्विट्‌ज़रलैंड को विद्रोही क्लब सियोन के 36 प्वाइंट्‌स काटने पड़े हैं. सियोन ने अयोग्य खिलाड़ियों के सवाल को सिविल कोर्ट में ले जाकर फीफा और उएफा की नाराज़गी मोल ले ली थी. फीफा ने जापान में हुई कार्यकारिणी बैठक में स्विट्‌ज़रलैंड को बाहर निकालने की धमकी दी थी. इसके पहले फीफा ने एसएफवी से सियोन के विरोधी क्लब को 3-0 की जीत देने का निर्देश दिया था, जिसे एसएफवी ने यह कहकर ठुकरा दिया था कि इससे दूसरे क्लबों को प्वाइंट देने से लीग में गड़बड़ी पैदा हो जाएगी. स्विट्‌ज़रलैंड पर पाबंदी लगाने का मतलब यह होता कि वह कोई भी अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेल पाता और एफसी बाजेल की टीम चैंपियंस लीग के मैच नहीं खेल पाती. उसे अंतिम 16 वाले दौर में जर्मनी के प्रतिष्ठित क्लब बायर्न म्यूनिख के ख़िला़फ खेलना है. फीफा के इस फैसले की कड़ी आलोचना हुई है. पेशेवर खिलाड़ियों के विश्व संगठन फिफप्रो ने भी कहा है कि सियोन की ग़लती की सज़ा बाजेल के खिलाड़ियों को देना भूल होगी. सियोन ने ऐसे छह खिलाड़ियों को साइन कर लिया था, जिन पर फीफा ने मिस्र के एक क्लब के खिलाड़ी को लुभाने की कोशिश का दोषी पाने पर प्रतिबंध लगा रखा था. बाद में उक्त खिलाड़ी अदालत चले गए, जिसने उनके हक़ में फैसला सुनाया और सियोन ने उन्हें घरेलू लीग में खिलाया.

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