देश का पहला शाओलिन वॉरियर कनिष्क शर्मा : अपनी रक्षा अपने हाथ

भारत के इतिहास में 26/11 का दर्दनाक हादसा काले अक्षरों में दर्ज है. पूरा देश इस आतंकवादी हमले का साक्षी रहा है. हमले की शुरुआत से लेकर वीरों को गंवाने तक देशवासियों, सेना, पुलिस और सरकार ने केवल अ़फसोस ही जताया है. हादसे ने कई मांओं के कलेजे के टुक़डों को छीना, कई पिताओं की आंख के तारे तोड़ दिए, कई पत्नियों की मांग सूनी कर दी. उन हमलावरों को सबक़ सिखाने के लिए हमने क्या किया? आधुनिक हथियारों से लैस कसाब जैसे आतंकवादी को पक़डने के लिए फौजियों की टीम को लाठियों के साथ घटनास्थल पर भेजा गया. परिणाम सामने है, तुकाराम जैसे वीर देशभक्त हमारे बीच नहीं हैं. आतंकवादी हमलों की धमकियों से देश अब भी थर्रा उठता है. हमने तुकाराम और उन जैसे दूसरे देशभक्त सिपाहियों को खोया न होता, अगर उनकी ट्रेनिंग में कमी न होती. यह कहना है देश के पहले शाओलिन वॉरियर कनिष्क शर्मा का. दरअसल, हम सबमें खुद को किसी भी स्थिति में बचा पाने की ताक़त होती है. महत्वपूर्ण है उसकी जानकारी और उसका इस्तेमाल.

शाओलिन एक मार्शल आर्ट है, जिसका मूलमंत्र है सरवाइवल यानी किसी भी स्थिति में अपनी सुरक्षा और बचाव. सिल्क रूट का हिस्सा शाओलिन चीन के कई प्राचीन मठों में एक कुंग फू मठ है, जिसे छठी शताब्दी में हिंदुस्तानी बौद्ध धर्मगुरु बातुनी ने शुरू किया था. छठी शताब्दी के अंत में एक और बौद्ध धर्मगुरु बौद्धिधर्मा भारत से शाओलिन मठ गए और उन्होंने शाओलिन मार्शल आर्ट बनाकर कुछ शिष्यों को सिखाया. जब चीन के राजा टैंग को तेरह शाओलिन शिष्यों ने लाठी के सहारे बचाया, तबसे शाओलिन शिष्यों को वॉरियर कहा जाने लगा. इस ऐतिहासिक कहानी को प्रस्तुत करते हुए जेटली की एक बहुत प्रसिद्ध फिल्म आई थी शाओलिन टेंपल द थर्टिन मंक सेव द टैंग एम्पेरर. एक और फिल्म आई 36 चेंबर्स ऑफ शाओलिन टेंपल, जिसे देखकर कनिष्क को बचपन में ही शाओलिन सीखने की इच्छा हुई और शाओलिन सीखने का सपना देखते हुए उन्होंने बचपन से ही भारत में उपलब्ध मार्शल आर्ट जैसे ताइक्वांडो, कुंग फू तुआ, कराटे इत्यादि सीखा और 2000 में एमबीए करने के बाद रिलायंस कंपनी की नौकरी छो़डकर चीन के शाओलिन मठ चले गए. छह साल की तपस्या के बाद कनिष्क 31वें जेनरेशन शाओलिन वॉरियर बनकर भारत वापस आए. बचपन से शर्मीले कनिष्क नई ऊर्जा, आत्मविश्वास और उत्साह के साथ वतन लौटे और शाओलिन में रुचि रखने वाले लोगों को ट्रेनिंग देने लगे.

मिलिट्री ट्रेनिंग

कमांडोज और मिलिट्री के पास वक़्त की कमी का ध्यान रखते हुए उन्हें पीकिडी टरसिया काली का क्लोज्ड क्वार्टर कॉमबैट सिस्टम सिखाया जाता है. इसमें फास्ट स्टंट करते हैं, जिससे दुश्मन को पता भी नहीं चलता कि कब उस पर वार हो जाता है और व्यक्ति किसी भी वार से बच जाता है. कॉमबैट मतलब काउंटर ऑन मोशन बिफोर अटैक टाइम यानी दुश्मन की तऱफ से होने वाले प्रथम वार से पहले ही उसे गिरा देना. पीकिडी अन्य मार्शल आट्‌र्स से अलग है, क्योंकि इसमें ऐसे तरीक़े सिखाए जाते हैं, जिससे खुद को बचाने में अपनी क्षति नहीं होती, जबकि अन्य मार्शल आट्‌र्स में खुद को चोट पहुंच सकती है. ऐसी ही चीज़ों का एक सेगमेंट बनाकर कनिष्क ने मिथ्स ऑफ नाइफ बनाया है, जिसमें वह अन्य मार्शल आर्ट में चा़कू और दूसरे हथियारों से ल़डने के लिए सिखाए गए तरीक़ों में खामियां बताते हैं. इसकी जगह वह पीकिडी टरसिया का नाइफ ट्रैपिंग ड्रिल सिखाते हैं. इसमें सामने वाले के चाक़ू के मूवमेंट का ध्यान रखते हुए उसे रोकते हुए खुद को बचाना होता है. कमांडो को सिखाने वाले पीकिडी टरसिया में एक फिटनेस रेजीम कनिष्क ने खुद जो़डा है, जो जिम्नास्टिक से जु़डा है. इसमें फुर्तीले तरीक़े से चक्कर खाते हुए दुश्मन के किसी भी वार से बचने की ट्रेनिंग दी जाती है. एक और सेगमेंट ग्रेनियन फुटवर्क स्ट्रेटजी है, जिससे दुश्मन के किसी भी वार से स़िर्फ शारीरिक मूवमेंट के ज़रिये बचा जा सकता है. मिलिट्री फोर्सेस को दुश्मन को मार गिराने की पूरी आज़ादी होती है, इसलिए इसमें हथियार का इस्तेमाल जायज़ है. पीकिडी में इस्तेमाल होने वाले हथियार भी खास हैं, जैसे गिनंगिंटंग, यह तलवारनुमा हथियार फिलीपींस में फोर्स रेकॉन मरीन अलक़ायदा के खिला़फ ल़डने में इस्तेमाल करते हैं. आजकल की ल़डाई साइकलॉजिकल है, इसमें जान लेने से ज़्यादा डर फैलाया जाता है, जिससे खतरा ज़्यादा महसूस होता है. इसलिए इसके हथियार भी बेहद खतरनाक दिखने वाले हैं. वीपन ट्रांसफर टेकनोलॉजी सिस्टम भी केवल पीकिडी में है, जिसकी खास बात यह है कि खुद को बचाने वाले जो भी स्टंट बंदूक़ के साथ करते हैं, वहीं चाक़ू या किसी अन्य हथियार के साथ भी कर सकते हैं. अक्सर दुश्मन ल़डते हुए गिरा देता है, ऐसे में उसके हाथ-पैर लॉक कर सकते हैं. इसे ग्राउंड फाइटिंग कहते हैं. नर्व ब्रेकिंग सिस्टम में केवल हाथ से ही ल़डते हुए गर्दन और दूसरी जगहों की हड्डियों-पसलियों को तो़ड सकते हैं या अंधा कर सकते हैं. काउंटर री काउंटर ही पीकिडी का मुख्य अंश है. इससे आप कम वक़्त में एक से ज़्यादा व्यक्तियों से ल़डने में सक्षम होते हैं. मिलिट्री में अरेस्ट प्रोसिजर भी सिखाते हैं.

पीकिडी टरसीया काली

कनिष्क ने शाओलिन के साथ फिलीपींस का पीकिडीटरसीया काली भी सीखा है. यह मार्शल आर्ट फिलीपींस का सिस्टम है, जो फोर्थ रेकॉन मरीन और फिलिपिनो नेशनल कमांडो फॉलो करते हैं. पीकिडी यानी बंद, टरसिया मतलब क्वार्टर और काली मतलब तीन सेकेंड में व्यक्ति को जान से मार डालना. इसमें शरीर में मौजूद नसों के ज़रिये जान ली जाती है. इसमें क्लोज क्वार्टर और एक्ट्रीम क्लोज क्वार्टर स्टंट का इस्तेमाल होता है. पिछले तीस सालों से साठ देशों में अलग-अलग काउंटर टेरेरिस्ट फोर्स द्वारा इसे फॉलो किया जा रहा है. यह वह सिस्टम है, जिसने इतिहास में अकेले तीन-तीन ल़डाइयां जीती हैं. फिलीपींस को स्पेन, जापान और अमेरिका ने रूल किया और फिलीपींस ने इन सबसे खुद को आज़ाद कराया, पीकिडी टरसीया काली सिस्टम का इस्तेमाल करके. भारत में कनिष्क इस फिलीपींस मार्शल आर्ट के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं, जो अलग-अलग काउंटर टेरेरिस्ट फोर्सेस को 2008 से ट्रेनिंग दे रहे हैं. कनिष्क मार्शल आर्ट के ज़रिये पुलिस और सैन्यबलों के अलावा दूसरे सभी सुरक्षाबलों को मज़बूत करने का लक्ष्य रखते हैं. कम से कम पचास ऐसे तरीक़े हैं, जिनसे आप निहत्थे भी खुद को बचाते हुए सामने वाले को मार गिरा सकते हैं. वह सैन्य-सुरक्षाबलों, आम नागरिकों और पुलिस को अलग-अलग तरह की ट्रेनिंग देते हैं.

वूमेन सेल्फ डिफेंस

एक्जीक्यूटिव्स की तरह महिलाओं को एलीमेंट ऑफ एस्केप और सराउंडिंग अवेयरनेस सिखाया जाता है. इसमें विपन ऑफ अपॉरचुनिटी के तहत कंघी, हेयरपिन, क्लिप, ना़खून, सैंडिल जैसी चीज़ें आम महिलाओं और पेनड्राइव, मोबाइल फोन, सन ग्लासेस, क्रेडिट कार्ड, लैपटॉप इत्यादि महिला प्रोफेशनल्स के हथियार होते हैं. यह भी कॉमबैट सरवाइवल प्रोग्राम है, जिसमें कुछ खास फास्ट मूवमेंट स्टंट हैं. यह टेकनीक ईजी, एफेक्टिव और इकोनॉमिकल सिद्धांतों पर आधारित है. इसमें शाओलिन मार्शल आर्ट से एडॉप्ट कर मेडिटेशन और अपने अंदर की सोई हुई ऊर्जा जागृत करने का तरीक़ा सिखाया जाता है.

पुलिस कुंग फू

जनता के बीच जाने वाले पुलिसकर्मियों को कनिष्क पुलिस कुंग फू मार्शल आर्ट सिखाते हैं, जिसे वह क्रेडलिंग कहते हैं. क्रेडल सिस्टम मतलब कि आदमी को चोट पहुंचाए बिना और बग़ैर हथक़डी के अरेस्ट करना. इस सिस्टम में यह करने के पचास से भी अधिक तरीक़े हैं. इस सिस्टम में शाओलिन से चीन ना यानी छीनने की कला और काली से डिफेंग द स्नेक सिस्टम लिया गया है. इसके अलावा व्हीकल एक्सट्रैक्शन सिस्टम भी सिखाया जाता है. व्हीकल एक्सट्रैक्शन का एक खास तरीक़ा है, जिसमें सामने वाले के खतरनाक हथियार के वार से बचते हुए उसे अरेस्ट किया जा सकता है. कनिष्क कहते हैं कि अगर कसाब को पक़डने गई टीम को इस तकनीक की जानकारी होती तो शायद आज वे हमारे बीच होते. इस तकनीक को बिना जाने किसी को भी ऐसी खतरनाक सिचुएशन में नहीं आना चाहिए. विपेन ऑफ अपॉरचुनिटी भी एक तरीक़ा है, जिसमें आपके पास हथियार न हो और दुश्मन के पास कितना भी खतरनाक हथियार हो, तो ऐसे में उसके हथियार को अपने पाले में लिया जा सकता है. ऐसे दस हज़ार तरीक़े हैं, जिनमें निहत्थे होकर भी खुद को बचाया जा सकता है. यह सिस्टम किसी भी बैरियर को काटना सिखाता है. पुलिस में लॉकिंग सिस्टम और पुलिस डिफेंसिव टैक्टिक्स होते हैं, जिसमें अपराधी को ढूंढकर उसे अरेस्ट करना सिखाया जाता है और तीसरा सिस्टम है रायट कंट्रोल, जिसमें बिना किसी तरह की चोट पहुंचाए भी़ड को तितर-बितर कर स्थिति कंट्रोल में की जा सकती है. शरीर के किसी भी प्रेशर प्वाइंट को दबाकर दंगे में सक्रिय या धरने पर बैठे व्यक्ति पर क़ाबू पाया जा सकता है. पुलिस को वह पैरिंग भी सिखाते हैं, जिसमें निहत्थे रहकर भी बलपूर्वक सामने वाले को धराशायी कर अरेस्ट करते हैं. स़िर्फ हथियार के वार से खुद को बचाते हुए अपराधी को अरेस्ट कर और हथियार को अपने पाले में ले लेना इसका उद्देश्य है. एक्सट्रीम अरेस्ट प्रोसिजर और गन डिसइंगेजमेंट हर पुलिसवाले को आनी चाहिए, ताकि एक लाठी के साथ या निहत्था भी पुलिस वाला अपराधी को अरेस्ट कर सके. एडवांस नाइफ टेकनीक्स में डिगासो टरसिया का इस्तेमाल भी करते हैं, जिसमें किसी भी चीज़ का इस्तेमाल हथियार के तौर पर किया जा सकता है, मसलन पेन, लाठी, टॉर्च इत्यादि. कमांडो और पुलिस के अलावा कनिष्क प्रोफेशनल एक्जीक्यूटिव्स, महिलाओं, बच्चों और बॉलीवुड की चर्चित हस्तियों को भी ट्रेनिंग देते हैं.

बॉलीवुड कनेक्शन 

अपने फिल्म डॉन में प्रियंका चोप़डा को स्टंट परफॉर्म करते हुए चेन से शाहरु़ख खान को औंधे मुंह गिराते हुए देखा होगा. प्रियंका की ये कातिल अदाएं कनिष्क शर्मा की ट्रेनिंग का नतीजा थीं. सिर्फ प्रियंका ही नहीं, शाहरु़ख खान, बोमन ईरानी और अर्जुन रामपाल को भी खतरनाक स्टंट करते देख आप हैरान हुए होंगे. कनिष्क शर्मा ने ही इन्हें शाओलिन जैसी खास मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग दी थी. इसके अलावा फिल्म गेम में अभिषेक बच्चन के स्टंट भी कनिष्क ने ही कोरियोग्राफ किए हैं. फिल्म गोल में हवा में उ़डकर छल्ले की तरह घूमते हुए गोलपोस्ट पर आ़खिरी गोल करके जॉन अब्राहम की टीम को जिताने वाले कनिष्क ही थे. कई हॉलीवुड और बॉलीवुड फिल्मों की स्टंट कोरियोग्राफी कनिष्क के नाम है. आगे भी कई फिल्मों की स्टंट कोरियाग्राफी के ऑफर हैं.

एक्जीक्यूटिव रिस्क कंट्रोल स्ट्रेटजी

कम्यूटर इंजीनियर माइकल रास्ते से गुज़रते हुए पीछा कर रहे व्यक्ति पर भी ध्यान दे रहे थे. माइकल अपनी कार तक पहुंचते, इससे पहले ही गुंडे ने उन पर हमला कर दिया. हाथ में प़डे मैग्जीन रोल को घुमाते हुए उन्होंने काउंटर किया तो गुंडा औंधे मुंह स़डक पर गिर प़डा और माइकल भाग निकले. दरअसल सतर्कता ही इस प्रोग्राम की खासियत है. इस प्रोग्राम की ट्रेनिंग लेकर स़डक पर होने वाले किसी भी खतरे से बचा जा सकता है. उन चीज़ों की मदद से, जो एक एक्जीक्यूटिव अपने साथ रखता है, जैसे पेनड्राइव, मोबाइल फोन, सन ग्लासेस, क्रेडिट कार्ड, लैपटॉप इत्यादि. उन्हें ही व्यक्ति हथियार के खिला़फ इस्तेमाल कर सकता है. इसे विपन ऑफ अपॉरचुनिटी कहते हैं. यह कॉमबैट सरवाइवल प्रोग्राम है, जिसमें कुछ खास फास्ट मूवमेंट स्टंट हैं. इसके लिए शरीर को ज़्यादा ताक़तवर बनाने के बजाय दिमाग़ को हालात से ल़डने के लिए तैयार करने की ज़रूरत है. इसमें अपने सराउंडिंग्स को लेकर अवेयर रहना एक एटीट्यूट बन जाता है. जिम में 4 से 5 घंटे पसीना बहाकर व्यक्ति स़डक पर सरवाइव करना नहीं सीख सकता. आप दुनिया के बेस्ट फाइटर हो सकते हैं, लेकिन यदि आपके पास एलीमेंट ऑफ एस्केप यानी बच निकलने का मूलमंत्र न हो तो आप बच नहीं सकते. इस प्रोग्राम में कनिष्क ने अपने 26 सालों की मेहनत का निचो़ड दिया है, जिसमें बताया जाता है कि 3 सेकेंड में व्यक्ति खुद को कैसे बचा सकता है. इस प्रोग्राम को सीखने में 25-30 दिन लगते हैं.

रीतिका सोनाली

युवा वर्ग की नब्ज़ को पढ़ने में माहिर और उनकी आकांक्षाओं को अभिव्यक्ति दे पाने में कुशल रीतिका सोनाली हमेशा कुछ हट कर करने में जुटी रहती हैं।
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रीतिका सोनाली

युवा वर्ग की नब्ज़ को पढ़ने में माहिर और उनकी आकांक्षाओं को अभिव्यक्ति दे पाने में कुशल रीतिका सोनाली हमेशा कुछ हट कर करने में जुटी रहती हैं।