संपत्ति का ब्योरा कब देंगे

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बाबुओं के बीच फैले भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए जो क़दम उठाए, वे कई दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्रियों के लिए आधार बने. भले ही नीतीश कुमार को इसमें कुछ हद तक सफलता मिली है, लेकिन उनका प्रयास का़फी नहीं है. उन्हें इसके लिए और प्रयास करने की ज़रूरत है. सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बिहार के मुख्य सचिव नवीन कुमार को उन अधिकारियों के बारे में जो अपनी संपत्ति का ब्योरा देने वाले हैं, पत्र लिखा है. ग़ौरतलब है कि नीतिश कुमार ने बिहार के अधिकारियों को अपनी संपत्ति की घोषणा करने का निर्देश जारी किया था, लेकिन कई अधिकारियों ने अभी तक इस निर्देश का पालन नहीं किया है. जिन अधिकारियों ने अभी तक अपनी संपत्ति का ब्योरा नहीं दिया है, उसमें कई पुलिस अधिकारी शामिल हैं. देखा जाए तो नीतिश कुमार को आईएएस अधिकारियों की अपेक्षा आईपीएस अधिकारियों से संपत्ति का ब्योरा प्राप्त करने में ज़्यादा परेशानी हो रही है. अभी तक बिहार के 71 आईपीएस अधिकारियों ने अपनी संपत्ति की घोषणा नहीं की है. इन अधिकारियों में मनोज नाथ, श़फी आलम, सुनीत कुमार और एनसी धोंधिया का नाम शामिल है. जनवरी के अंत तक सभी को अपनी संपत्ति का ब्योरा देना है तो अब उन पर इसके लिए दबाव डाला जा सकता है.

सेवानिवृत्त बाबुओं से परेशानी

आजकल कई वरिष्ठ आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारी सेवानिवृत होने के बाद निजी क्षेत्र की कंपनियों में नौकरी करने लगे हैं. इससे सरकार को परेशानी होती है. वैसे तो सरकारी अधिकारियों को सेवानिवृत्ति के बाद एक निश्चित समय तक किसी निजी संस्थान में नौकरी नहीं करना होता है. लेकिन इस समय सरकार इस मामले को कुछ ज़्यादा ही गंभीरता से ले रही है. कैबिनेट सचिव अजीत सेठ ने इस मुद्दे को मंत्रिमंडल के सामने उठाया है. सूत्रों का कहना है कि तीन वित्तीय विशेषज्ञ अधिकारियों को सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद ऐसे काम मिले हैं. सा़फ तौर पर रिजर्व बैंक के पूर्व डिप्टी गवर्नर श्यामल गोपीनाथ, तेरहवे वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष विजय केलकर और पूर्व व्यय सचिव सुषमा नाथ का मुद्दा उछला है. अधिकारियों के बीच इस बात की कानाफूसी चल रही है. सबसे महत्वपूर्ण वजह कुछ गुप्त सुचनाओं का लीक होना है. इन अधिकारियों के पास बहुत सारी सूचनाएं होती हैं, जिसका लाभ निजी कंपनियां उठाती हैं.

कथनी और करनी में अंतर

जहां केंद्रीय सतर्कता आयोग असफल हो जाता है, वहां सीबीआई उसकी जगह लेती है. सीबीआई ने केंद्रीय आबकारी आयुक्त अनूप कुमार श्रीवास्तव को गिरफ्तार किया. उन पर कर चोरी का आरोप लगाया गया है. इसी महीने उनके घर सीबीआई का छापा पड़ा था. इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इससे पहले सीवीसी ने भी उनके बारे में कुछ छानबीन की थी. सीवीसी ने स़िफारिश की थी कि अनूप श्रीवास्तव का स्थानांतरण किसी ग़ैर संवेदनशील पद पर किया जाए. इसे सीवीसी की कमी ही कही जा सकती है कि उसने जो पत्र केंद्रीय उत्पाद और सीमा शुल्क बोर्ड के अध्यक्ष के पास भेजा था, वह वित्त मंत्रालय के पास पहुंच गया. वित्त मंत्रालय को इसकी जानकारी होने के बाद सीवीसी को कुछ परेशानी भी हुई है. जब सीवीसी (केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड) के प्रमुख एसके गोयल और अन्य सदस्य श्रीवास्तव का स्थानांतरण जयपुर करने को सहमत हो गए तो वित्त मंत्रालय के कुछ बाबुओं द्वारा इसमें बाधाएं डाली गईं. सूत्रों का कहना है कि इस बात की संभावना है कि अनूप श्रीवास्तव को उसी पद पर रखा जा सकता है.

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