पार्टियों का लगातार बढ़ता फ़ंड

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हाल के कुछ वर्षों में देश की माली हालत भले ही खराब हुई हो, लेकिन प्राय: सभी राजनीतिक दलों की आर्थिक स्थिति बेहतर हुई है, उनका फंड लगातार ब़ढा है. इस समय चुनाव आयोग काले धन पर लगाम लगाने के लिए पूरी तरह कमर कसे हुए है. दरअसल, पैसा राजनीति की मेन पॉवर है. यह सारा पैसे का ही खेल है. अब एक नज़र डालते हैं कि राजनीतिक दलों के पार्टी फंड पर. किस पार्टी के पास कितना पैसा है, कितनी संपत्ति है. यह आंक़डा विभिन्न पार्टियों द्वारा प्रस्तुत किए गए इनकम टैक्स रिटर्न से लिया गया है. राजनीतिक दलों के फंड कई बड़ी कंपनियों की फंडिंग को भी मात देते दिख रहे हैं.

एग्रीगेट इनकम 2002-2003-2010

  • वित्तीय वर्ष 2002-03 से 2009-10 के सात साल की समयावधि के दौरान कांग्रेस को 1518 करोड़ रुपये की आय हुई.
  • दूसरे स्थान पर मौजूद भाजपा की आय 754 करोड़ रुपये रही. यह कांग्रेस की आमदनी से लगभग आधी है.
  • तीसरा स्थान बसपा का है. 2002-03 से 2009-10 के दौरान बसपा की आय 358 करोड़ रुपये रही है.
  • इसी समयावधि के लिए सीपीएम की कमाई 339 करोड़ रुपये, समाजवादी पार्टी की कमाई 263 करोड़ रुपये,  एनसीपी की कमाई 109 करोड़ रुपये रही, जबकि आरजेडी ने इस दौरान 15 करोड़ रुपये और सीपीआई ने 7 करोड़ की कमाई की.

एक साल की कमाई

  • 31 मार्च, 2009 तक वित्तीय वर्ष 2009-10 के लिए सबसे अधिक कमाई कांग्रेस की दिख रही है. इसी समयावधि के लिए कमाई के मामले में दूसरे स्थान पर भाजपा है. भाजपा ने इस दौरान अपनी वार्षिक आय 220 करोड़ रुपये दिखाई है. तीसरा स्थान क्षेत्रीय दल से नेशनल पार्टी बनने की कोशिश कर रही बसपा का है. बसपा की इस समयावधि के लिए वार्षिक आय 182 करोड़ रुपये है.
  • दूसरी पार्टियों की बात करें तो वित्तीय वर्ष 2009-2010 के लिए सीपीएम की वार्षिक आय 63 करोड़ रुपये रही. एनसीपी ने इस समयावधि में 40 करोड़ रुपये की कमाई की, जबकि समाजवादी पार्टी की वार्षिक आय 39 करोड़ रुपये बताई गई है.
  • वित्तीय वर्ष 2009-2010 के लिए सबसे कम कमाने वालों में सीपीआई और आरजेडी रहे. आरजेडी ने इस समयावधि के लिए अपनी वार्षिक आय 4 करोड़ रुपये दिखाई है, जबकि सीपीआई की कमाई 1 करोड़ रुपये दिखाई गई है.

कौन कितना संपन्न

  • किसी की संपन्नता का अंदाज़ा उसके पास मौजूद संपत्ति से लगाया जाता है. हमारे देश के राजनीतिक दलों के पास भी खूब संपत्तियां हैं. उनके इनकम टैक्स रिटर्ंस बताते हैं कि 31 मार्च, 2009 तक कांग्रेस के पास 612 करोड़ की संपत्ति थी. संपत्ति के मामले में बसपा ने भाजपा को पीछे कर दिया और 31 मार्च, 2009 तक उसके पास 286 करोड़ रुपये की संपत्ति थी. तीसरा स्थान भाजपा का रहा, जिसके पास 261 करोड़ रुपये की संपत्ति थी.
  • अन्य पार्टियों में 31 मार्च, 2009 तक सीपीएम के पास 185 करोड़ रुपये, समाजवादी पार्टी के पास 178 करोड़ रुपये, एनसीपी के पास 32 करोड़ रुपये, सीपीआई के पास 7 करोड़ रुपये और आरजेडी के पास 3 करोड़ रुपये की संपत्ति थी.

विकास दर

  • अगर राजनीतिक दलों की संपत्तियों या संपन्नता में विकास की बात करें तो सबसे आगे बसपा रही है. बसपा ने वित्तीय वर्ष 2002-03 से 2009-10 के बीच 59 प्रतिशत की वृद्धि की. वित्तीय वर्ष 2002-03 में बसपा के पास 10.92 करोड़ रुपये की संपत्ति थी, जो 2009-10 तक ब़ढकर 286.15 करोड़ रुपये तक पहुंच गई.
  • इसी समयावधि में एनसीपी कुल संपत्ति में 51 प्रतिशत, आरजेडी की 35 प्रतिशत, सीपीएम की 20 प्रतिशत, भाजपा की 18 प्रतिशत और सीपीआई की संपत्ति में 4 प्रतिशत की वृद्धि हुई.

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