प्रार्थना

श्री साई बाबा, साई बाबा

तुम हो दाता, एक विधाता

तुम थे ईसा ईसाइयों के

नाम पलट कर बन गए साई

हिंदुओं के तुम हो श्रीराम

साई राम कह सभी पुकारें

मस्जिद में तुझको अल्लाह पुकारें

नानक गूंजे हर गुरुद्वारा

ऐसे बाबा जग में आए

जिनकी महिमा कोई न जाने

कोई न जाने तेरा बचपन

साल पूरे सोलह तक

जग उद्धार के लिए प्रकट

हो गए गांव शिरडी में

दत्ता जैसे किए गुरु अनेक

कबीर, गोपाल और जाविर

लालन-पालन किए थे गोपाल

सत्य की दीक्षा पूरी दी

दीक्षा-शिक्षा पाकर पूरी

साई बाबा बन गए

साई श्रीराम बन गए

साई ईसू बन गए

साई अल्लाह बन गए

साई नानक बन गए

साई जगत में छा गए

ऐसे बाबा जग में आए

जिनकी महिमा कोई न जाने

वृक्ष नीम था तेरा आश्रम

लेंडी जंगल तेरा बगीचा

पोशाक तेरी फटी कफनी

सिर को साजे एक साफ़ा

करो में तेरे छड़ी-कमंडल

चरणों में तेरे जीर्ण पादुका

रूप तेरा है मनोहर

वाणी जैसे मुरली मनोहर

नयन हैं तेरे प्रेम से भरे

हृदय है तेरा दया से भरा

पत्थर है तेरा सिंहासन

चिथड़ा गूनी तेरा आसन

जीर्ण गूनी तेरा बिस्तर

ईंट ही तेरा सिरहाना

ऐसे बाबा जग में आए

जिनकी महिमा कोई न जाने.

चांद भाई पाटिल आए

बालक साई बाबा के पास

खोई घोड़ी देकर बाबा

चिमटे से चिलम जला दिए

म्हाल्सापति को ज्ञानी बनाकर

नाना को दिया गीतोपदेश

बायजाबाई ने उदृत कर ली

खाना देकर तुझको निरंतर

दासों के दास हैं दास गणू

बन गए तेरे कीर्तनकार

अब्दुल्लाह ने की बड़ी सेवा

तन-मन देकर तुझको अपना

ऐसे बाबा जग में आए

जिनकी महिमा कोई न जाने.

कड़वी नीम को मीठा करके

सिद्धि पहले क़ायम की

तेल न पाकर पानी ही से

ज्योति उत्तम जलाई

नीम की पत्ती धूनी से उदी

सबको हरदम देते थे

शक्ति इनमें ऐसी होती

दु:ख सारा हर लेती थी

भिक्षा लाकर पांच घरों से

उसे सबको देते थे

ऐसे उसे देते रहते

जो ख़त्म नहीं होती थी

तेरे साथी दीन-दु:खी जन

अंधे, लंगड़े शूद्र व रोगी

तुम्हीं थे उनके सच्चे साथी

माता-पिता व गुरु परमात्मा

ऐसे बाबा जग में आए

जिनकी महिमा कोई न जाने

कुष्ठ रोगी भागोजी शिंदे

आए साई बाबा के पास

जीवन भर निज सेवा में रखकर

उनके रोग को हर लिया

आम्लपित रोग वह हैज़ा से

बड़े ही पीड़ित थे बूटी

धूनी से उदी देकर बाबा

उन्हें रोग से मुक्त किया

अतिसार की बीमारी थी

काका महाजनी को

स्वस्थ किया उनको बाबा ने

मूंगफली खिलाकर

बड़े ही पीड़ित थे श्यामा

बवासीर रोग से

दया के सागर साई ने

हर लिया बवासीर को

चौदह वर्षों के उदर रोग से

थे बड़े पीड़ित दत्तोपंत

ऐसे दु:खी को देखकर

उनको रोग से मुक्त किया

भीमा जी पाटिल महानुभाव थे

नारायण गांव के क्षय रोगी

ऐसे भयंकर रोग को

दूर किया जगीश्वर ने

ऐसे बाबा जग में आए

जिनकी महिमा कोई न जाने.

क्रमश:

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