सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्र की गरिमा को पुनर्स्थापित किया

एक बार फिर उच्चतम न्यायालय ने देश की प्रतिष्ठा बचाई और उसका मान रखा. जहां एक तऱफ देश की कार्यपालिका भ्रष्ट मंत्रियों के ख़िला़फ कार्रवाई करने में असफल रही, वहीं एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट ने देश के सम्मान को बचाया और उसकी गरिमा को पुनर्स्थापित किया. पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने 2-जी के सभी लाइसेंस निरस्त कर दिए. सुप्रीम कोर्ट ने जिस तरह बुद्धिमानी का परिचय देते हुए निष्पक्षता दिखाई, वह इस देश के लोकतंत्र के लिए एक बेहतरीन उदाहरण है. सुप्रीम कोर्ट का दूसरा निर्णय भी काफी महत्वपूर्ण है, जिसमें उसने उच्च प्रतिमान स्थापित किए. अब किसी के ख़िला़फ अभियोजन की कार्रवाई चलाने के लिए सरकार को चार महीने के भीतर निर्णय लेना होगा. यदि सरकार ऐसा नहीं कर पाती है तो स्वत: यह मान लिया जाएगा कि स्वीकृति मिल गई है और फिर अभियोजन की कार्रवाई चलाई जा सकेगी.

भारतीय राजनीति फिलहाल मुश्किलों के दौर से गुजर रही है. आम जनता राजनेताओं को अपराधियों की शक्ल में देख रही है. अगर एक भी व्यक्ति की छवि राजनेता के रूप में ख़राब हो जाती है तो जनता सभी को एक ही नज़रिए से देखती है. वह नेता को जिस रूप में देखती है, दरअसल उसी रूप में लोकतंत्र को भी देखने लगती है.

भारतीय राजनीति फिलहाल मुश्किलों के दौर से गुजर रही है. आम जनता राजनेताओं को अपराधियों की शक्ल में देख रही है. अगर एक भी व्यक्ति की छवि राजनेता के रूप में ख़राब हो जाती है तो जनता सभी को एक ही नज़रिए से देखती है. वह नेता को जिस रूप में देखती है, दरअसल उसी रूप में लोकतंत्र को भी देखने लगती है. इसके लिए स्वयं राजनीतिज्ञ दोषी हैं, क्योंकि उन्होंने अपनी शक्ति का ग़लत इस्तेमाल किया है. ख़ासकर वे राजनेता दोषी हैं, जो सत्ता में है और जो ग़लत को ठीक कर सकते हैं, लेकिन वे ऐसा नहीं करते.

इस एक मामले में ख़ास तौर पर यूपीए सरकार को ही दोषी ठहराया जाना चाहिए. बड़े अफसोस की बात है कि सीएजी रिपोर्ट में दोषी पाए गए मंत्री का सरकार के वरिष्ठ मंत्री बचाव कर रहे थे और सीएजी द्वारा बताए गए घाटे को ग़लत ठहराते रहे और कहते रहे कि 2-जी घोटाले में सरकार को नुक़सान नहीं हुआ. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उसी मंत्री ने बाक़ायदा प्रेसवार्ता आयोजित करके घोटाले का ठीकरा पूर्व की एनडीए सरकार के सिर पर फोड़ा और उसे ज़िम्मेदार ठहराया. प्रधानमंत्री को चाहिए कि वे भ्रष्ट मंत्रियों को कैबिनेट से बाहर करें. ज़ाहिर है, सरकार के पास कोई विकल्प नहीं है, सिवाय सुप्रीम कोर्ट का आदेश मानने के.

कुछ महीने पूर्व मैंने लिखा था कि सरकार को चाहिए कि वह ग़लत और अवैध तरीक़े से कमाए गए धन को ज़ब्त कर ले. महाराष्ट्र सरकार को चाहिए कि वह आदर्श हाउसिंग सोसायटी में हुए फ्लैट आवंटन को तत्काल रद्द करे और उन सभी लोगों के पैसे वापस कर दे, जिन्हें उक्त फ्लैट आवंटित हुए हैं. सुप्रीम कोर्ट को चाहिए कि वह एक ऐसी व्यवस्था बनाए, जिससे भ्रष्ट अधिकारियों की संपत्तियां ज़ब्त की जा सकें. वहीं प्रधानमंत्री को भी चाहिए कि वह भ्रष्ट मंत्रियों को बाहर करके एक सही उदाहरण प्रस्तुत करें, सक्षम एवं प्रतिभावान लोगों की एक टीम बनाएं. अगर वह ऐसा करते हैं, तभी उनकी प्रतिष्ठा बची रह पाएगी.

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