उत्तर प्रदेश में परिसीमन के कारण कुछ विधानसभा सीटों का सियासी समीकरण बिग़ड गया है. 13 सीटों पर हालत कुछ ऐसे बन गए हैं कि 13 सीटों पर विधायकों की जीत पर संशय पैदा हो गया है. कौन 13 विधायक होंगे, जो अगली विधानसभा का मुंह नहीं देख पाएंगे, इसे लेकर सभी की जिज्ञासा बढ़ी हुई है.
प्रदेश की राजधानी लखनऊ भी इससे अछूती नहीं रही है. लखनऊ पश्चिम से दो वर्तमान विधायक आमने-सामने हैं. इसमें एक भाजपा का और दूसरा कांग्रेस का है. 2007 में यह सीट भाजपा के दिग्गज नेता लालजी टंडन के पास थी. 2009 के लोकसभा चुनाव में लालजी टंडन के जीतने के बाद उन्होंने विधायकी से इस्ती़फा दे दिया. 2009 में हुए उप चुनाव में कांग्रेस ने यह सीट भाजपा से छीन ली और कांग्रेस के श्याम किशोर शुक्ला विधायक चुन लिए गए. वह एक बार फिर कांग्रेस की तऱफ से अपनी क़िस्मत आज़मा रहे हैं. उनके सामने 2007 में लखनऊ मध्य विधानसभा क्षेत्र से जीत हासिल करने वाले भाजपा के सुरेश श्रीवास्तव ताल ठोंक रहे हैं. परिसीमन के बाद उन्होंने अपना विधानसभा क्षेत्र बदल लिया है.
लखनऊ से लगे बाराबंकी ज़िले की तो दो सीटों पर चार विधायक चुनावी मैदान में हैं. सपा के अरविंद सिंह गोप हैदरगढ़ विधानसभा क्षेत्र सुरक्षित होने के बाद रामनगर विधानसभा क्षेत्र से अपनी क़िस्मत आज़माने पहुंचे तो वहां बसपा के विधायक अमरेंद्र शुक्ला भी मैदान में ताल ठोंकते दिखे. अब गोप या शुक्ला में से कौन जीतेगा, यह फैसला जनता को करना है.
लखनऊ से लगे बाराबंकी ज़िले की तो दो सीटों पर चार विधायक चुनावी मैदान में हैं. सपा के अरविंद सिंह गोप हैदरगढ़ विधानसभा क्षेत्र सुरक्षित होने के बाद रामनगर विधानसभा क्षेत्र से अपनी क़िस्मत आज़माने पहुंचे तो वहां बसपा के विधायक अमरेंद्र शुक्ला भी मैदान में ताल ठोंकते दिखे. अब गोप या शुक्ला में से कौन जीतेगा, यह फैसला जनता को करना है. इसी तरह बाराबंकी की ही कुर्सी विधानसभा सीट पर भी बसपा और सपा के दो विधायक आमने-सामने हैं. बसपा से पाला बदलकर सपा में आए फरीद मह़फूज़ किदवई और बसपा से मीता गौतम चुनाव मैदान में उतर चुके हैं. कुर्सी सीट इस बार नई विधानसभा सीट है. फरीद पिछली बार बाराबंकी की मसौली सीट से विधायक चुने गए थे, जबकि मीता गौतम बाराबंकी के फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र की विधायक थीं.
कानपुर की सीसामऊ सीट से सपा ने इऱफान सोलंकी और कांग्रेस ने संजीव दरियाबादी को चुनाव मैदान में उतारा है. संजीव दरियाबादी इससे पहले कानपुर शहर से विधायक थे. इस बार चुनाव जीतना दोनों विधायकों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बना हुआ है. दोनों हार भले ही जाएं, लेकिन जीत एक की ही होगी. परिमसीन के बाद कानपुर में ही नई बनी सीट महाराजपुर विधानसभा क्षेत्र पर भी दो विधायकों के बीच लड़ाई हो रही है. यहां पिछली बार कैंट विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे भाजपा के सतीश महाना और सरसौल विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहीं सपा की महिला नेत्री अरुणा तोमर आमने-सामने हैं.
इलाहाबाद की बात की जाए तो यहां उत्तरी विधानसभा क्षेत्र से दो विधायकों के बीच टक्कर हो रही है. इसमें कांग्रेस के अनुग्रह नारायण और भाजपा के उदयभान करवरिया शामिल हैं. उदयभान पहले बारा से जीते थे. मिर्ज़ापुर में भी दो विधायक अपनी क़िस्मत आज़मा रहे हैं. इसमें माध्यमिक शिक्षा मंत्री रहे रंगनाथ मिश्रा बसपा से और कैलाश चौरसिया चुनावी जंग में आमने-सामने हैं. रंगनाथ मिश्रा पहले संत रविदास नगर की औराई विधानसभा सीट से विधायक थे, लेकिन नए परिसीमन में औराई सीट सुरक्षित हो गई. सहारनपुर में भी दो विधायक आमने-सामने हैं. ये हैं कांग्रेस के इमरान मसूद और बसपा सरकार में बेसिक शिक्षा मंत्री रहे धर्म सिंह सैनी. देखना यह है कि जनता की कसौटी पर कौन विधायक खरा उतरता है. इमरान मसूद कांग्रेस नेता रशीद मसूद के भतीजे हैं. इससे पहले उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी. आज़मगढ़ सदर से भी दो विधायक आमने-सामने हैं. ये हैं सपा के दुर्गा यादव और बसपा के सर्वेश कुमार सिंह. इसी तरह जौनपुर की शाहगंज सीट से सपा के शैलेंद्र सिंह ललई औेर बसपा से विधायक धर्मराज निषाद आमने-सामने हैं. मेरठ के किठौर विधानसभा क्षेत्र से सपा के विधायक शाहिद मंज़ूर के सामने बसपा के मंत्री और विधायक लखीमल नागर खड़े हैं. लखीराम इससे पहले मेरठ की खरकौंदा सीट से विधायक थे. उधर, बरेली की बिथरी चैनपुर विधानसभा सीट पर भी दो विधायक आमने-सामने हैं. यहां समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र कश्यप और बहुजन समाज पार्टी के वीरेंद्र सिंह चुनावी दंगल में हैं. हरदोई की सांडी विधानसभा सीट से बसपा विधायक विरेंद्र वर्मा और समाजवादी पार्टी से राजेश्वरी देवी हैं. कुल 26 विधायक आमने-सामने हैं, लेकिन कम से कम 13 की हार तो निश्चित है. कहीं-कहीं हालात बदले तो दोनों विधायक अपनी सीट गंवा सकते हैं. ऐसे में हारने वाले विधायकों की संख्या 13 से ऊपर जाकर 26 तक भी पहुंच सकती है.
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