दिल्ली का बाबू : भरे जाने लगे खाली पद

सरकार भले ही देर से जागी, लेकिन अब लगता है कि विभिन्न मंत्रालयों में खाली पड़े कई पदों पर नियुक्ति बहुत जल्द की जाएगी. इसके लिए सरकार ने शुरुआत कर दी है. जवाहर सरकार को प्रसार भारती का सीईओ बनाया जाना इस दिशा में उठाया गया क़दम माना जा सकता है. ग़ौरतलब है कि बहुत दिनों से प्रसार भारती के लिए स्थायी सीईओ की नियुक्ति लंबित थी और यह पद खाली पड़ा था. सूत्रों का कहना है कि सूचना-तकनीक विभाग के सचिव के लिए खोज जारी है और दूरसंचार सचिव आर चंद्रशेखर, जो सूचना-तकनीक सचिव का काम भी संभाल रहे थे, को इस अतिरिक्त प्रभार से मुक्त कर दिया गया है. सरकार नियुक्ति में बहुत सावधानी बरत रही है, क्योंकि 2-जी मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को वह भूल नहीं पाई है. इसी तरह पी के मिश्रा को कार्मिक सचिव तो बना दिया गया है, लेकिन अभी तक वह स्टील सचिव का काम भी देख रहे हैं, क्योंकि अभी तक स्टील मंत्रालय ने उनकी जगह किसी को नियुक्त नहीं किया है. हालांकि अभी भी बहुत सारे पद खाली पड़े हैं, लेकिन उम्मीद बरक़रार है.

बाबुओं की चिंता

ऐसा कभी नहीं हुआ है कि किसी बाबू को सचिव के पद के लिए विचार किए बिना सेवानिवृत्ति की सूची में शामिल कर लिया गया हो. 1978 बैच के नागालैंड कैडर के अधिकारी वी एन गौर पहले अधिकारी हैं, जिन्हें इस तरह का संदेहास्पद सम्मान दिया जाने वाला है. गौर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत खाद्य एवं सुरक्षा मानक प्राधिकरण के सीईओ हैं, जो कि अतिरिक्त सचिव के समकक्ष पद है. स्वाभाविक है कि यह मामला वरिष्ठ बाबुओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. वे इस बात को लेकर चिंतित हैं कि कहीं उनके साथ भी इसी तरह की घटना न घट जाए.

सूचना आयोग और बाबू

आरटीआई कार्यकर्ताओं की सरकार से हमेशा यह शिकायत रही है कि वह पूर्व अधिकारियों को केंद्रीय सूचना आयुक्त (सीआईसी) और राज्य सूचना आयुक्त (एसआईसी) नियुक्त करती रही है. उनका कहना है कि पूर्व अधिकारियों का एक तरह से इन पदों पर क़ब्जा हो गया है. यह एक तरह से इस बात का संकेत है कि सरकार अपने पसंदीदा अधिकारियों को सेवानिवृत्ति के बाद भी अपने पास रखना चाहती है, ताकि उसका उल्लू सीधा होता रहे. अभी जिन सूचना आयुक्तों की नियुक्ति हुई है, उससे तो यही लगता है कि सरकार आरटीआई कार्यकर्ताओं की बात पर कोई ध्यान नहीं दे रही है.सरकार ने अभी केंद्रीय सूचना आयुक्त के लिए जिन नामों की घोषणा की है, वे अधिकारी ही हैं. इस बार पूर्व आईबी प्रमुख राजीव माथुर और पूर्व पर्यावरण सचिव विजय शर्मा का नाम केंद्रीय सूचना आयुक्त के लिए घोषित किया गया है.

बाबू संगठन और केरल सरकार

केरल आईएएस अधिकारी संगठन सरकार से ख़फा है, क्योंकि कुछ वरिष्ठ बाबुओं को भूमि आवंटन मामले में आरोपी बनाया गया है. संगठन का मानना है कि जिन बाबुओं के नाम इस घोटाले में आए हैं, उनकी इसमें कोई भूमिका नहीं है. इसलिए आईएएस अधिकारी संगठन ने केरल के मुख्यमंत्री ओमान चांडी से इसकी शिकायत की है और इस तरह की कार्रवाइयों के प्रति विरोध भी जताया है. जिन अधिकारियों के नाम भूमि आवंटन घोटाले में आए हैं, उनमें पूर्व मुख्य सचिव शीला थॉमस, पूर्व भूमि आयुक्त के आर मुरलीधरन, दो पूर्व जिलाधिकारी आनंद सिंह और कृष्णन कुट्टी शामिल हैं. अब यह तो न्यायालय तय करेगा कि कौन दोषी है और कौन निर्दोष, लेकिन सूत्रों का कहना है कि इस मामले के फैसले का इंतज़ार कर रहे बाबुओं की बेचैनी बढ़ गई है.