दिल्ली का बाबू : पटनायक का भ्रष्टाचार विरोधी अभियान

ओडिसा के मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार विरोधी छवि बनाने के लिए कुछ क़दम उठाए हैं. उन्होंने दाग़ी आईएएस अधिकारियों को काम से अलग रखा है. हालांकि इन अधिकारियों को वेतन और सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं, लेकिन उन्हें काम से अलग रखा गया है यानी ये अधिकारी ऑफिसर विदाउट ड्यूटी हैं. राज्य सरकार ने अखिल भारतीय सेवा के सात अधिकारियों को ऑफिसर विदाउट ड्‌यूटी के तौर पर नियुक्त किया है. इनमें चार आईएएस अधिकारी पी पटनायक, एसके मिश्रा, रमेश बहेरा और ऋषिकेश पांडा शामिल हैं. इसके अलावा दो आईएफएस अधिकारी एसके आचार्य तथा अमरेंद्र जायसवाल और एक आपीएस अधिकारी एके उपाध्याय को भी बिना ड्यूटी के अधिकारी के तौर पर नियुक्त किया गया है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार ने कोई नियम-क़ानून घोषित नहीं किया है कि दाग़ी अधिकारियों को ऑफिसर विदाउट ड्यूटी घोषित करने का आधार क्या होगा. अब प्रश्न यह उठता है कि नवीन पटनायक अधिकारियों को दंडित करने की अपनी इस नीति को कैसे न्यायसंगत सिद्ध करेंगे. इसके अलावा एक छोटा सवाल यह भी उठता है कि इस तरह बिना काम कराए करोड़ों रुपये इन अधिकारियों पर क्यों खर्च किए जा रहे हैं. इन सवालों का जवाब तो नवीन पटनायक को ही देना होगा.

विधिक समस्या

गुवाहाटी के एक विशेष न्यायालय ने यह निर्देश दिया कि जिन अधिकारियों पर क़रीब एक दशक पहले किसी बड़े घोटाले में शामिल होने का आरोप लगाया गया था, उन पर चार्जशीट दायर की जाए. लेकिन 17 आईएएस और 11 राज्य कैडर के आधिकारियों पर मुक़दमा नहीं चलाया जा सकता है, क्योंकि राज्य सरकार ने 2009 में एक शासकीय आदेश जारी किया था, जिसमें इन अधिकारियों पर मुक़दमा चलाने को मना कर दिया गया था. इन अधिकारियों में कई अधिकारी अभी महत्वपूर्ण पदों पर हैं. इसमें अवकारी सचिव गायत्री बरुआ, प्लेन ट्राइव और बैकबर्ड कल्याण विभाग के सचिव और आयुक्त एल फांगचू, असम सरकार के सचिव अजय तिवारी जीडीडी और फिनांस आयुक्त और सचिव आशीष कुमार का नाम शामिल है. बाबुओं के बीच इस बात की चर्चा है कि अब आगे क्या होगा?

महिला कैबिनेट सचिव के लिए लंबा इंतज़ार

सूजना आयोग की वर्तमान सदस्य सचिव सुधा पिल्लई 2009 में पहली महिला कैबिनेट सचिव बनने के का़फी नज़दीक थीं, लेकिन तत्कालीन कैबिनेट सचिव केएम चंद्रशेखर को सेवा विस्तार मिलने के कारण सुधा पिल्लई को इस अवसर से वंचित रहना पड़ा. कैबिनेट सचिव एके सेठ का कार्यकाल 2013 में खत्म होगा. लेकिन 1975 बैच की कुछ महिला अधिकारी, जो कैबिनेट सचिव की उम्मीदवार हो सकती थीं, वे सेठ के कार्यकाल समाप्त होने से पहले ही सेवानिवृत हो जाएंगी. इन महिला अधिकारियों में टेक्सटाइल सचिव किरण धींगरा, स्कूल एजुकेशन सचिव अंशु वैश और स्पोर्ट सचिव सिद्धूश्री खुल्लर शामिल थीं. लेकिन इसके बाद 1976 बैच की अधिकारी और भूमि संसाधन सचिव अनीता चौधरी तथा सीनियर एजुकेशन सचिव विभा पूरी महिला कैबिनेट सचिव बन सकती हैं. लेकिन यह तभी होगा अगर सेठ को सेवा विस्तार नहीं मिलता है. अगर उन्हें सेवा विस्तार मिल गया, जैसा यूपीए सरकार में मिलता रहता है तो फिर किसी महिला आईएएस अधिकारी को कैबिनेट सचिव बनने के लिए लंबा इंतज़ार करना पड़ेगा.

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