श्रद्धा और धैर्य बहुत ज़रूरी


  • Sharebar

शिरडी पहुंचने के प्रथम दिन ही बाला साहेब और हेमाड पंत के बीच गुरु की आवश्यकता पर वाद-विवाद छिड़ गया. हेमाड पंत इस वाक़िये को कुछ इस प्रकार बयां करते हैं. उस समय मेरा मत था कि स्वतंत्रता त्याग कर पराधीन क्यों होना चाहिए और जब कर्म करना ही पड़ता है, तब गुरु की आवश्यकता ही कहां रही. प्रत्येक को पूर्ण प्रयत्न कर स्वयं को आगे बढ़ाना चाहिए. गुरु शिष्य के लिए करता ही क्या है. वह तो सुख से निद्रा का आनंद लेता है. इस प्रकार मैंने स्वतंत्रता का पक्ष लिया और बाला साहेब ने प्रारब्ध का. उन्होंने कहा कि जो विधि लिखित है, वह घटित होकर रहेगा, उसमें उच्च कोटि के महापुरुष भी असफल हो गए हैं. कहावत है, मेरे मन कछु और है, दाता के कछु और. फिर परामर्शयुक्त शब्दों में बोले, भाई साहब, यह निरी विद्वता छोड़ दो. यह अहंकार तुम्हारी कुछ भी सहायता न कर सकेगा. इस प्रकार दोनों पक्षों के खंडन-मंडन में लगभग एक घंटा व्यतीत हो गया और सदैव की भांति कोई निष्कर्ष नहीं निकल सका.

इसीलिए तंग और विवश होकर विवाद स्थगित करना पड़ा. इसका परिणाम यह हुआ कि मेरी मानसिक शांति भंग हो गई और मुझे अनुभव हुआ कि जब तक घोर दैहिक बुद्धि और अहंकार न हो, तब तक विवाद संभव नहीं. वस्तुत: यह अहंकार ही विवाद की जड़ है. जब अन्य लोगों के साथ मैं मस्जिद गया, तब बाबा ने काका साहेब को संबोधित कर प्रश्न किया कि साठेबाड़ा में क्या चल रहा है, किस विषय में विवाद था? फिर मेरी ओर दृष्टिपात कर बोले, इन हेमाड पंत ने क्या कहा? यह सुनकर मुझे अधिक अचंभा हुआ. साठेबाड़ा और मस्जिद में पर्याप्त अंतर था. सर्वज्ञ या अंतर्यामी हुए बिना बाबा को विवाद का ज्ञान कैसे हो सकता था. मैं सोचने लगा कि बाबा हेमाड पंत के नाम से मुझे क्यों संबोधित करते हैं. यह शब्द तो हेमाद्रि पंत का अपभ्रंश है. हेमाद्रि पंत देवगिरि के यादव राजवंशी महाराजा महादेव और रामदेव के विख्यात मंत्री थे. वह उच्च कोटि के विद्वान, उत्तम प्रकृति और चतुवर्ग चिंतामणि (जिसमें आध्यात्मिक विषयों का विवेचन है) और राजप्रशस्ति जैसे उत्तम काव्यों के रचयिता थे. उन्होंने ही हिसाब-किताब रखने की नवीन प्रणाली को जन्म दिया और कहा था, मैं इसके विपरीत एक अज्ञानी, मूर्ख और मंदमति हूं. अत: मेरी समझ में यह नहीं आ सका कि मुझे इस विशेष उपाधि से विभूषित करने का क्या तात्पर्य है. गहन विचार करने पर मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि कहीं मेरे अहंकार को तोड़ने के लिए ही तो बाबा ने इस अस्त्र का प्रयोग नहीं किया है, ताकि मैं भविष्य में सदैव के लिए अभिमान रहित एवं विनम्र हो जाऊं अथवा कहीं यह मेरे वाक्‌ चातुर्य के लिए मेरी प्रशंसा तो नहीं है. भविष्य पर दृष्टिपात करने से प्रतीत होता है कि बाबा द्वारा हेमाड पंत की उपाधि से विभूषित करना कितना अर्थपूर्ण और भविष्य गोचर था. सर्वविदित है कि कालांतर में दाभोलकर ने श्री साई बाबा संस्थान का प्रबंध कितने सुचारू एवं विद्वतापूर्ण ढंग से किया था. हिसाब-किताब आदि कितने उत्तम प्रकार से रखे और साथ ही साथ महाकाव्य साई सच्चरित्र की रचना भी की. इस ग्रंथ में महत्वपूर्ण और आध्यात्मिक विषयों जैसे ज्ञान, भक्ति वैराग्य, शरणागति एवं आत्मनिवेदन आदि का समावेश है. इस विषय में बाबा ने क्या उद्गार प्रकट किए, इस पर हेमाड पंत द्वारा लिखित कोई लेख या स्मृति पत्र उपलब्ध नहीं है, परंतु काका साहेब दीक्षित ने इस विषय पर उनके लेख प्रकाशित किए हैं. बाबा से भेंट करने के दूसरे दिन हेमाड पंत और काका साहेब ने मस्जिद में जाकर घर लौटने की अनुमति मांगी. बाबा ने स्वीकृति दे दी. किसी ने प्रश्न किया, बाबा, कहां जाएं? उत्तर मिला, ऊपर जाओ. प्रश्न हुआ, मार्ग कैसा है? बाबा ने कहा, अनेक पंथ हैं. यहां से भी एक मार्ग है, परंतु यह मार्ग दुर्गम है और सिंह एवं भेड़िए भी मिलते हैं. काका साहेब ने पूछा, यदि पथ प्रदर्शक भी साथ हो तो? बाबा ने कहा, तब कोई कष्ट नहीं होगा. पथ प्रदर्शक तुम्हारी सिंह, भेड़िए एवं खंदकों से रक्षा कर तुम्हें सीधे निर्दिष्ट स्थान पर पहुंचा देगा, परंतु उसके अभाव में जंगल में मार्ग भूलने या गड्‌ढे में गिर जाने की आशंका है. दाभोलकर भी उपर्युक्त प्रसंग के अवसर पर वहां उपस्थित थे. उन्होंने सोचा कि जैसा बाबा कह रहे हैं उसकी और गुरु की आवश्यकता क्यों है. उन्होंने सदा के लिए मन में यह गांठ बांध ली कि अब कभी इस विषय पर वाद-विवाद नहीं करेंगे कि स्वतंत्र या परतंत्र व्यक्ति आध्यात्मिक विषयों के लिए कैसा सिद्ध होगा. इसके विपरीत यथार्थ में परमार्थ-लाभ केवल गुरु के उपदेश में किया गया है, जिसमें लिखा है कि महान अवतारी होते हुए भी आत्मानुभूति के लिए राम को अपने गुरु वशिष्ठ और कृष्ण को अपने गुरु संदीपनी की शरण में जाना पड़ा था. इस मार्ग में उन्नति प्राप्त करने के लिए केवल श्रद्धा और धैर्य ही दो गुण सहायक हैं.


चौथी दुनिया के लेखों को अपने ई-मेल पर प्राप्त करने के लिए नीचे दिए गए बॉक्‍स में अपना ईमेल पता भरें::

Link for share:

Leave a Reply

कृपया आप अपनी टिप्पणी को सिर्फ 500 शब्दों में लिखें