राष्ट्रमंडल खेल का खुमार

राष्ट्रमंडल खेल समाप्त हुए डेढ़ साल से अधिक समय हो गया, लेकिन अभी भी उससे जुड़े बाबुओं की चर्चा जारी है. हालांकि उसमें शामिल अधिकांश अधिकारियों को उनके पुराने विभाग या मंत्रालय में भेज दिया गया है, लेकिन अभी सब कुछ दांव पर है. 1987 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी लीना नंदन को होस्ट ब्रॉडकास्टर टीम कामनवेल्थ गेम के प्रोजेक्ट डायरेक्टर के तौर पर सेवा विस्तार मिल गया है. कुछ लोग इस बात पर आश्चर्य जता रहे हैं कि उन्हें सेवा विस्तार क्यों दिया गया. ऐसे तो लीना नंदन के पास करने को बहुत कुछ है. ग़ौरतलब है कि प्रसार भारती के पूर्व प्रमुख बीएस लाली पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं. लाली पर राष्ट्रमंडल के प्रसारण अधिकार देने में गड़बड़ी का आरोप है, लेकिन सबसे आश्चर्य की बात यह है कि कार्मिक विभाग ने इस बात का ज़िक्र ही नहीं किया है कि लीना नंदन का राष्ट्रमंडल खेल के साथ कोई संबंध रहा है. उनके सेवा विस्तार से संबंधित आदेश में कहा गया है कि वह दूरदर्शन में हैं. पर्यटन विभाग के पूर्व संयुक्त सचिव लीना लंदन की नियुक्ति 2009 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में हुई थी.

अस्थिर प्रवर्तन निदेशालय

वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राजन एस कटोच को प्रवर्तन निदेशालय का प्रमुख बनाया गया है. 1979 बैच के मध्य प्रदेश कैडर के इस आईएएस अधिकारी के सामने कई चुनौतियां हैं. शर्मीले स्वभाव के कटोच एक सख्त और तेज़ दिमाग़ वाले अधिकारी माने जाते हैं. इससे पहले वह वाणिज्य मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव और वित्तीय सलाहकार थे. प्रवर्तन निदेशालय कई घोटालों की जांच कर रहा है, जिनमें 2-जी स्पेक्ट्रम का मामला भी है. इन कारणों से कटोच सरकार की पहली पसंद नहीं थे. माथुर की सेवानिवृत्ति के बाद सरकार अमिताभ रंजन को प्रवर्तन निदेशालय का प्रमुख बनाना चाहती थी, लेकिन बाद में राकेश सिंह को एक महीने के लिए इसका प्रमुख बना दिया गया. अब यह निदेशालय कटोच के पास है. अब देखना यह है कि आगे वह क्या करते हैं. उनसे का़फी उम्मीदें हैं.

रमन सिंह और केंद्र के बीच टकराव

प्रधानमंत्री कार्यालय और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह के बीच एक आईएएस अधिकारी को लेकर विवाद चल रहा है. 1987 बैच के छत्तीसगढ़ कैडर के आईएएस अधिकारी बी वी आर सुब्रह्मण्यम को पिछले 12 सालों से केंद्रीय डेपुटेशन पर रखा गया है. इस दौरान वह प्रधानमंत्री कार्यालय में रहे, कुछ समय तक विश्व बैंक में भी रहे और अब फिर प्रधानमंत्री कार्यालय में आ गए हैं. सूत्रों के अनुसार, रमन सिंह ने प्रधानमंत्री को इस बारे में लिखा है कि सुब्रह्मण्यम को वापस छत्तीसगढ़ भेजा जाए, लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय ने उनकी मांग अस्वीकार कर दी. अब मुख्यमंत्री ने धमकी दी है कि सुब्रह्मण्यम की नई नियुक्ति की जाएगी. अब यह देखना बाक़ी है कि छत्तीसगढ़ और केंद्र के बीच के इस विवाद का अंत कितने दिनों में होगा.

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