मेहनत रंग लाएगी, लेकिन…

जहां चाह है वहां राह है, लेकिन अपनी मंज़िल की ओर बढ़ना जितना आसान है उतना ही कठिन भी. कुछ ऐसा ही हाल है अंबेडकर इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च (आईपी यूनिवर्सिटी, दिल्ली) के 13 छात्रों का, जिन्होंने अपने सपने को साकार करने के लिए दिन रात मेहनत की मगर हर बार निराशा ही हाथ लगी. दरअसल, पूरा माजरा यह है कि ये छात्र एक ऐसे रोबोट पर काम कर रहे हैं, जो पानी के अंदर सक्रिय होगा, जिसे एयूवी यानी एकोयूस्टिक अंडरवाटर व्हेकिल्स कहा जाता है. इस टीम में बिहार के औरंगाबाद के कमलेश कुमार (टीम लीडर), हिमांशु गुप्ता, आशीष शर्मा, हिमांशु जैन, राहुल चौहान, अभिषेक जय कुमार, हिमांशी भारद्वाज, अश्विन अग्रवाल, मानव कपूर, रोहित शर्मा, आदित्य नागर, भारत त्रिपाठी और सुमित गुप्ता शामिल हैं. उनकी टीम का नाम है, टीम समुद्र. 13 जून, 2011 को चेन्नई में एनआईओटी द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित प्रतियोगिता में उत्तर भारत से यही एकमात्र टीम थी, जिसने प्रतियोगिता में अपनी जगह बनाई और रनर-अप भी रही. उनके इस जोश को देखकर एनआईओटी के वैज्ञानिक भी दंग रह गए, क्योंकि मुक़ाबला इतना आसान नहीं था. इस मुक़ाबले में देश भर से आए आईआईटी और एनआईटी के छात्रों को टीम समुद्र ने कड़ी टक्कर दी. अब उन्हें प्रोत्साहन के साथ-साथ ज़रूरत थी थोड़ी सी आर्थिक मदद की. ज़ाहिर सी बात है कि किसी प्रोजेक्ट पर काम करने के लिए मेहनत, निष्ठा, ईमानदारी के अलावा पैसों की भी उतनी ही आवश्यकता होती है. इन छात्रों ने अपनी तऱफ से पूरी कोशिश की कि कोई उनके साथ खड़ा हो, लेकिन किसी ने उनकी एक न सुनी. शायद इस वजह से क्योंकि उनका कॉलेज कोई नामी गिरामी कॉलेज नहीं था. फिर भी इन छात्रों ने अपना प्रयास निरंतर जारी रखा और इस रोबोट पर काम करते रहे. सबसे बड़ी बात तो यह है कि इस रोबोट को बनाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक मैकेनिक्स एंड इमेज प्रोसेसिंग की गहन जानकारी होना आवश्यक है. लेकिन इनमें से किसी भी छात्र का मैकेनिक्स प्रमुख विषय नहीं है.

प्रतिभा है, निष्ठा है और ईमानदारी भी. लेकिन आर्थिक कमी की वजह से इनका सपना पूरा होते-होते रह जाता है. यह कहानी है, उन नौजवानों की जिनके पास एक सपना है. उस सपने को पूरा करने का जज़्बा भी है. ऐसा उन्होंने अपने प्रयास से साबित करके दिखाया है. लेकिन इनके सपनों को पंख लगें, इसके लिए ज़रूरत है कि कोई आगे आए और उनकी मदद करे. क्या कोई इस सपने को पूरा करने के लिए आगे आएगा?

फिर भी इन छात्रों के पास इतनी जानकारी है कि ये अपनी जानकारी की बदौलत इस रोबोट को बनाकर खड़ा कर सकते हैं. इन छात्रों का कहना है कि उन्होंने इस रोबोट को बनाने के लिए दिन रात एक कर दिया. तारी़फ तो सबने की, लेकिन मदद करने के लिए कोई आगे नहीं आया. एयूवी बनाने का प्रयास हालांकि 2008 में ही शुरू हो चुका था, लेकिन राह इतनी आसान न थी. इसे बनाने के लिए होनहार छात्रों की ज़रूरत थी, जिनके क़दम किसी भी परिस्थिति में न डगमगाएं. आख़िरकार फाइनल टीम का चुनाव कर लिया गया. इन छात्रों में जोश था, उमंग थी और कुछ कर गुज़रने की चाह भी, जो इस प्रोजेक्ट के लिए बेहद ज़रूरी थी. सब मिले और उन्होंने इस पर काम करना शुरू भी कर दिया. ये अब अपने एयूवी को पानी के अंदर उतारने के लिए पूरी तरह से तैयार थे, लेकिन अफ़सोस उन्हें जगह तक नहीं मिली. इतनी कठिन परिस्तिथियों से दो चार होने के बावजूद उनके हौसलों में कोई कमी नहीं आई है और अब उन्होंने सारा ज़िम्मा अपने ही कंधों पर उठा लिया है. इसे बनाने के लिए सभी ज़रूरी चीज़ों को ये खुद ही खरीदेंगे और इस रोबोट को आ़खिरी रूप देंगे. अब ये छात्र एयूवीएसआई संस्थान और ऑफिस ऑफ नेवल रिसर्च (ओएनआर) द्वारा 17 से 22 जुलाई, 2012 तक आयोजित होने वाली 15वें अंतरराष्ट्रीय रोबो सब प्रतियोगिता में हिस्सा लेंगे. यह प्रतियोगिता सैन डियेगो अमेरिका में होगी. अगर इन होनहार छात्रों की मेहनत रंग लाती है तो ये न स़िर्फ विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होगी, बल्कि पूरे देश के लिए भी गर्व की बात होगी.