इंडिया अगेंस्‍ट करप्‍शनः अन्‍ना चर्चा समूह, सच बोलना अपराध नहीं है

सेवा में,

श्री वीरभद्र सिंह जी,

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री

1, जंतर मंतर रोड,

नई दिल्ली-110001

 

श्री वीरभद्र सिंह जी,

 

आपका पत्र मिला, जिसमें आपने लिखा है कि मैंने आपके सम्मान को ठेस पहुंचाई है, इसलिए या तो मैं आपसे माफी मांगू या आप मेरे खिला़फ कोर्ट में मानहानि का दावा करेंगे. मुझे बचपन में सिखाया गया है कि अगर कोई ग़लती हो जाए तो अपनी ग़लती कबूल करके माफी मांग लेने में कोई हर्ज नहीं है. अपनी ग़लती मानना और माफी मांगना महानता की निशानी है. लेकिन यदि अन्याय और भ्रष्टाचार के खिला़फ आवाज़ उठाने पर कोई धमकी दे कि माफी मांगो, नहीं तो कोर्ट में मानहानि कर दूंगा, ऐसे में निर्भय होकर भ्रष्टाचार के खिला़फ आवाज़ बुलंद रखी जाए, यही धर्म है.

कुछ वर्ष पहले शिमला के एक पुलिस थाने में आपके खिला़फ इस मामले में एफआईआर तक दर्ज हुई है. इस सीडी में आप और आपकी धर्मपत्नी शिमला के पूर्व आईएएस अधिकारी श्री महेंद्र सिंह से कुछ पैसे के लेन-देन की बात कर रहे हैं, जो क़ानून की नज़रों में ग़लत है. आपका कहना है कि इस सीडी में आपकी आवाज़ नहीं है, पर अख़बारों के हिसाब से चंडीगढ़ की सरकारी लैब में इसकी जांच कराई गई है और जांच की रिपोर्ट के मुताबिक़ तो आवाज़ आपकी ही पाई गई है. ऐसा पता चला है कि मामले में जांच पूरी हो गई है. जल्द ही कोर्ट में आरोप तय होने वाले हैं. इस दौरान आपने हाईकोर्ट में भी जांच खारिज करने की याचिका दायर की थी. कोर्ट ने आपकी दलील नामंजूर कर दी है.

इस मामले में मैंने काफी सोचा. मैंने जो कुछ भी कहा, वह तो अख़बारों में ख़ूब छपता ही रहा है. मैंने यही तो कहा था कि अख़बारों के मुताबिक़ एक ऐसी सीडी है, जिसमें आप एक आईएएस अधिकारी से कुछ ग़ैरक़ानूनी पैसे के लेन-देन की बात कर रहे हैं. इसकी जांच होनी चाहिए. बताइए क्या झूठ है? क्या ऐसी सीडी नहीं है? इस सीडी की प्रति संलग्न मैं कर रहा हूं. इस पर तो अख़बारों में ही कितना कुछ लिखा जा चुका है. मैंने तो केवल तथ्य जनता के सामने रखे. कुछ भी ग़लत नहीं कहा. ऐसे में यदि मैं आपके मानहानि के नोटिस से डरकर माफी मांगता हूं, तो यह सरासर ग़लत होगा. मेरी आत्मा मुझे आपसे माफी मांगने की इजाज़त नहीं देती.

कुछ वर्ष पहले शिमला के एक पुलिस थाने में आपके खिला़फ इस मामले में एफआईआर तक दर्ज हुई है. इस सीडी में आप और आपकी धर्मपत्नी शिमला के पूर्व आईएएस अधिकारी श्री महेंद्र सिंह से कुछ पैसे के लेन-देन की बात कर रहे हैं, जो क़ानून की नज़रों में ग़लत है. आपका कहना है कि इस सीडी में आपकी आवाज़ नहीं है, पर अख़बारों के हिसाब से चंडीगढ़ की सरकारी लैब में इसकी जांच कराई गई है और जांच की रिपोर्ट के मुताबिक़ तो आवाज़ आपकी ही पाई गई है. ऐसा पता चला है कि मामले में जांच पूरी हो गई है. जल्द ही कोर्ट में आरोप तय होने वाले हैं. इस दौरान आपने हाईकोर्ट में भी जांच खारिज करने की याचिका दायर की थी. कोर्ट ने आपकी दलील नामंजूर कर दी है. ऐसे में इस मामले की जनता के बीच चर्चा करने को मानहानि समझा जा सकता है?

भ्रष्टाचार को लेकर देश भर में आम लोगों में भारी गुस्सा है. कितनी ही चर्चाओं में ए राजा, कनिमोझी, कलमाडी के भ्रष्टाचार की चर्चा होती है. क्या इसका मतलब राजा, कनिमोझी, कलमाडी उन सबके खिला़फ मानहानि का दावा करेंगे, जो उनके भ्रष्टाचार की चर्चा करते हैं? एक तो हमारे देश में न्याय प्रक्रिया इतनी सुस्त है कि किसी भी मामले को निपटने में वर्षों लग जाते हैं और ऊपर से आप धमकी देते हैं कि किसी के द्वारा किए गए भ्रष्टाचार की चर्चा भी मत करो, नहीं तो कोर्ट में मानहानि कर देंगे. ऐसे कैसे चलेगा? आप तो केंद्र सरकार में मंत्री हैं. मंत्री होने के नाते आपकी ज़िम्मेदारी बनती है कि आप भ्रष्टाचार के मामलों के लिए एक सख्त लोकपाल क़ानून पारित करवाते, ताकि जांच और न्याय प्रक्रिया एक से दो साल के बीच पूरी हो जाती. यदि किसी भी मामले में जांच और न्याय प्रक्रिया जल्द समाप्त हो जाए तो निराधार अफवाहों को फैलने से रोका जा सकता है. आपके खिला़फ यह सीडी 2007 में निकली और आज पांच साल हो गए, अब जाकर जांच पूरी हुई है. अदालत में तो पता नहीं, अभी कितना समय और लगेगा. जब तक यह मामला अदालत में चलेगा, तब तक लोग इस मामले के बारे में बात तो करेंगे ही. आप इस तरह की धमकियां देकर किस-किस का मुंह बंद करेंगे?

आप तो राज परिवार से हैं, आपके पुरखे तो बुशाहर के राजा होते थे. आपकी रगों में तो राजाओं का ख़ून है. इस तरह मानहानि के नोटिस की धमकी देकर जनता का मुंह बंद करना एक राजा को शोभा नहीं देता. आपको तो जनता की भावनाओं को गंभीरता से लेकर उस पर कार्रवाई करनी चाहिए. यदि आप वाकई निर्दोष हैं तो क्यों नहीं अपनी पार्टी में सख्त लोकपाल क़ानून के लिए आवाज़ उठाते? आप क्यों नहीं न्याय प्रक्रिया को दुरुस्त करते? आप तो कई वर्षों तक हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे. हिमाचल प्रदेश में भी आपने भ्रष्टाचार रोकने के लिए और न्याय प्रक्रिया को दुरुस्त करने के लिए कोई ठोस क़दम नहीं उठाया. अगर उस व़क्त आपने भ्रष्टाचार निरोधक तंत्र और न्याय प्रक्रिया को दुरुस्त किया होता तो आपके मामले की जांच और मुक़दमा अभी तक पूरा हो गया होता. दूध का दूध और पानी का पानी हो गया होता. जनता को सच्चाई पता चल गई होती कि वाकई आप भ्रष्टाचार के दोषी हैं या नहीं.

  • आप अपनी प्रतिक्रिया हमें 09718500606 पर फोन करके या पर ई-मेल करके भेज सकते हैं.
  • इस बार आपके चर्चा समूह में कितने लोग आए, यह आप हमें SMS करके ज़रूर बताएं. SMS करने का वही तरीका है-DF<space> आपका पिन कोड <space> चर्चा समूह में कितने लोग आए.
  • जैसे मान लीजिए, आपका पिन कोड 110001 है और आपके समूह में मान लीजिए, पांच लोग आए तो आप 09212472681 नंबर पर निम्न SMS करेंगे- DF 1100015

 

आपके खिला़फ तो भ्रष्टाचार के कितने ही आरोप लगे, ज़मीन हड़पने के आरोप, चिटों के आधार पर ग़ैर क़ानूनी रूप से सरकारी नियुक्तियां करने के आरोप, कत्था घोटाला, वनों से अवैध रूप से पेड़ काटने के आरोप इत्यादि. क्या सभी आरोप निराधार थे? कौन इनकी जांच करेगा? कौन सच्चाई का पता लगाएगा? आप कह सकते हैं कि आरोप झूठे हैं, मनगढ़ंत हैं, निराधार हैं. आप यह भी कहेंगे कि सभी आरोप राजनीति से प्रेरित हैं. पर मन में प्रश्न उठता है कि आज तक ए के एंटनी, नीतीश कुमार आदि पर भ्रष्टाचार के आरोप क्यों नहीं लगे? ये लोग भी तो उच्च पदों पर हैं और राजनीति में हैं. पर इनकी व्यक्तिगत ईमानदारी पर कभी प्रश्न नहीं उठे. पर आप पर तो ढेरों आरोप लगे हैं और जो दस्तावेज मौजूद हैं, उनमें प्रथम दृष्टि में आरोप गंभीर नज़र आते हैं. पर यह कैसे तय होगा कि आप पर लगे आरोप ठीक हैं या ग़लत. इसके लिए निष्पक्ष जांच तो करानी होगी. दुर्भाग्यवश हमारे देश में निष्पक्ष जांच कराने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है. आज जितनी भी जांच एजेंसियां हैं, सभी सरकार के नियंत्रण में हैं. ये एजेंसियां आप ही लोगों के नियंत्रण में है. ये आपके खिला़फ कैसे जांच कर सकती हैं? राज्य में या तो बीजेपी की सरकार आती है या कांग्रेस की. हिमाचल की जनता कहती है कि आप दोनों की पार्टियों में अच्छा तालमेल है. ऐसा है क्या? ऐसा शक तो होता है, क्योंकि दोनों पार्टियां जमकर भ्रष्टाचार करती हैं और कोई पार्टी सरकार में आने के बाद दूसरी पार्टी के नेताओं की निष्पक्ष जांच नहीं करती, उन्हें दंड नहीं दिलाती. पिसती है तो हिमाचल की जनता. लुटती है तो हिमाचल की जनता.

हिमाचल में एक बार कांग्रेस की सरकार आती है और एक बार बीजेपी की. उस हिसाब से इस बार आपकी बारी है. वैसे तो बीजेपी सरकार ने भी सीडी कांड में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, पर यदि आपकी अपनी सरकार बनती है तो साफ है कि पूरा सीडी मामला रफा-दफा हो जाएगा. अन्य पुराने मामलों की तरह इस बार भी जनता को सच्चाई नहीं पता चलेगी. कोई दोषी नहीं होगा, किसी को दंड नहीं मिलेगा. मैं एक आम आदमी हूं. जनता का हिस्सा हूं. जनता तो सवाल करेगी ही. आप

किस-किस का मुंह बंद करेंगे? आपका सम्मान मेरे माफी मांगने से नहीं बढ़ेगा, पर यदि आप भ्रष्टाचार के खिला़फ सख्त लोकपाल क़ानून के लिए अपनी सरकार और अपनी पार्टी में आवाज़ उठाएं और यदि आपकी सरकार और पार्टी न माने तो आप उन दोनों का त्याग कर दें, ऐसा करने से आपका सम्मान बढ़ेगा. क्या आप ऐसा करने की हिम्मत कर पाएंगे? यदि आप ऐसा करेंगे तो देश की जनता आपको सर-आंखों पर बैठा लेगी.

मुझे नहीं लगता, मैंने ऐसी कोई ग़लती की है, जिसके लिए मुझे माफी मांगनी चाहिए. क्या आपको नहीं लगता कि मेरी बजाय माफी आपको मांगनी चाहिए, हिमाचल की जनता से? उसने आपको इतने विश्वास से इतनी बार मुख्यमंत्री चुना. बदले में उसे क्या मिला, जमीन घोटाले, कत्था कांड, भर्ती घोटाले, सीडी कांड इत्यादि. ज़रा सोचिएगा.

आपका शुभेच्छु

अरविंद केजरीवाल

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