सूचना क़ानून: कुछ अहम सवाल

सूचना कौन देगा

सभी सरकारी विभागों के एक या एक से अधिक अधिकारियों को लोक सूचना अधिकारी नियुक्त किया गया है. आपको अपना आवेदन उनके पास ही जमा कराना है. यह उनकी ज़िम्मेदारी है कि वे आपके द्वारा मांगी गई सूचना विभाग की विभिन्न शाखाओं से इकट्ठा करके आप तक पहुंचाएं. इसके अलावा बहुत से सहायक लोक सूचना अधिकारी नियुक्त किए गए हैं.

पते की जानकारी कैसे मिलेगी

यह पता लगाने के बाद कि आपको किस विभाग से सूचना मांगनी है, लोक सूचना अधिकारी के विषय में जानकारी उसी विभाग से मांगी जा सकती है, लेकिन यदि आप उस विभाग में नहीं जा पा रहे हैं या विभाग आपको जानकारी नहीं दे रहा है तो आप अपना आवेदन इस पते पर भेज सकते हैं, लोक सूचना अधिकारी, द्वारा विभाग प्रमुख, विभाग का नाम एवं पता. यह उस विभाग प्रमुख की ज़िम्मेदारी होगी कि वह आवेदन को संबंधित लोक सूचना अधिकारी के पास पहुंचाए.

क्या कोई पीआईओ आवेदन अस्वीकार कर सकता है

नहीं, वह ऐसा नहीं कर सकता. अनुच्छेद (6) के अनुसार, वह संबंधित विभाग के पास आपका आवेदन भेजने और उसके बारे में आपको सूचित करने के लिए बाध्य है.

क्या पीआईओ सूचना देने से मना कर सकता है

लोक सूचना अधिकारी सूचना के अधिकार क़ानून के अनुच्छेद 8 में बताए गए विषयों से संबंधित सूचनाएं देने से मना कर सकता है. इसमें विदेशी सरकारों से प्राप्त गोपनीय सूचनाएं, सुरक्षा अनुमानों से संबंधित सूचनाएं, रणनीतिक, वैज्ञानिक या देश के आर्थिक हितों से जुड़े मामलों, विधान मंडल के विशेषाधिकार हनन से संबंधित मामलों से जुड़ी सूचनाएं शमिल हैं. अधिनियम की दूसरी अनुसूची में ऐसी 18 एजेंसियों की सूची दी गई है, जहां सूचना का अधिकार लागू नहीं होता है. फिर भी यदि सूचना भ्रष्टाचार के आरोपों या मानवाधिकारों के हनन से जुड़ी हुई है तो इन विभागों को भी सूचना देनी पड़ेगी.

किसी विभाग ने पीआईओ नियुक्त न किया हो तो क्या करना चाहिए

अपना आवेदन लोक सूचना अधिकारी द्वारा विभाग प्रमुख के नाम से तय शुल्क के साथ संबंधित सरकारी अधिकारी को भेज दें. आप अनुच्छेद 18 के तहत राज्य के  सूचना आयोग से भी शिकायत कर सकते हैं. सूचना आयुक्त के पास ऐसे अधिकारी पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाने का अधिकार है, जिसने आपका आवेदन लेने से इंकार किया हो. शिकायत करने के लिए आपको स़िर्फ सूचना आयोग को एक साधारण पत्र लिखकर यह बताना है कि फलां विभाग ने अभी तक लोक सूचना अधिकारी की नियुक्ति नहीं की है और उस पर जुर्माना लगना चाहिए.

क्या इसके लिए कोई शुल्क भी लगेगा

हां, इसके लिए शुल्क निम्नलिखित है:-

केंद्रीय विभागों के लिए आवेदन शुल्क 10 रुपये. कुछ राज्यों ने अपने यहां अलग-अलग शुल्क की भी व्यवस्था की है. सूचना देने का ख़र्च 2 रुपये प्रति पृष्ठ, लेकिन कुछ राज्यों में ज़्यादा भी है.

दस्तावेज़ों की जांच करने का शुल्क:-

जांच के पहले घंटे का कोई शुल्क नहीं, पर उसके बाद हर घंटे का पांच रुपये शुल्क देना होगा. यह शुल्क केंद्र एवं कई राज्यों के लिए अलग-अलग है.

शुल्क कैसे जमा कराया जा सकता है

आवेदन शुल्क के लिए हर राज्य की अपनी अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं. आम तौर पर आप अपना शुल्क निम्नलिखित तरीक़ों से जमा करा सकते हैं:

स्वयं नक़द जमा कराकर (उसकी रसीद लेना न भूलें), डिमांड ड्राफ्ट, भारतीय पोस्टल ऑर्डर, मनी ऑर्डर से (कुछ राज्यों में लागू), बैंकर्स चेक से, केंद्र सरकार से संबंधित मामलों में इसे एकाउंट ऑफिसर के नाम देय होना चाहिए. कुछ राज्य सरकारों ने इसके लिए निश्चित खाते खोले हैं. आपको उस खाते में शुल्क जमा करना होता है. इसके लिए स्टेट बैंक की किसी भी शा़खा में नक़द शुल्क जमा करके उसकी रसीद आवेदन के साथ नत्थी करनी होती है या आप उस खाते के पक्ष में देय पोस्टल ऑर्डर या डीडी भी आवेदन के साथ संलग्न कर सकते हैं. कुछ राज्यों में आप आवेदन के साथ निर्धारित मूल्य के कोर्ट स्टांप भी लगा सकते हैं.

आवेदन कैसे जमा करें

आप व्यक्तिगत रूप से स्वयं लोक सूचना अधिकारी या सहायक लोक सूचना अधिकारी के पास जाकर या किसी को भेजकर आवेदन जमा करा सकते हैं. आप उसे लोक सूचना अधिकारी या सहायक लोक सूचना अधिकारी के पते पर डाक द्वारा भी भेज सकते हैं. केंद्र सरकार के सभी विभागों के लिए 629 डाकघरों को केंद्रीय सहायक लोक सूचना अधिकारी बनाया गया है. आप इनमें से किसी भी डाकघर में जाकर आवेदन और शुल्क जमा कर सकते हैं. वहां जाकर जब आप सूचना का अधिकार काउंटर पर आवेदन जमा करेंगे तो वे आपको रसीद एवं एक्नॉलेजमेंट देंगे. यह उस डाकघर की ज़िम्मेदारी है कि तय समय सीमा में आपका आवेदन संबंधित लोक सूचना अधिकारी तक पहुंचाया जाए.

क्या सूचना प्राप्त करने की कोई समय सीमा है

हां, यदि आपने लोक सूचना अधिकारी के पास आवेदन जमा कर दिया है तो आपको हर हाल में 30 दिनों के भीतर सूचना मिल जानी चाहिए. यदि आपने आवेदन सहायक लोक सूचना अधिकारी के पास डाला है तो यह समय सीमा 35 दिनों की है. यदि सूचना किसी व्यक्ति के जीवन और स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकती है तो ऐसी सूचना 48 घंटों में उपलब्ध कराई जाती है. द्वितीय अनुसूची में शामिल संगठनों के लिए यह सूचना 45 दिनों में और तृतीय पक्ष में 40 दिनों में उपलब्ध कराने का प्रावधान है.

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