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बिहारः सेवा यात्रा में सुशासन की पोल खुली

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की चार दिवसीय चंपारण सेवा यात्रा ने सुशासन की पोल खोल दी है. मुख्यमंत्री के मोतिहारी पहुंचते ही पंचायत शिक्षकों द्वारा मानदेय भुगतान के लिए किया गया हंगामा, पुतला दहन, बिजली का ग़ायब होना, पंचायती राज के जन प्रतिनिधियों का आंदोलन एवं अभियंत्रण महाविद्यालय में व्याप्त कुव्यवस्था को लेकर छात्रों का हंगामा तथा सभाओं में जनता के बीच उत्साह न होना साबित करता है कि लोग सरकार से खुश नहीं हैं. ज़िले के पंचायत शिक्षक जहां तेरह महीनों से मानदेय नहीं मिलने से परेशान रहे हैं, वहीं सेवा यात्रा के नाम पर लाखों रुपये पानी की तरह बहाए जा रहे हैं. शिक्षकों का मानदेय छह हज़ार रुपये है और वह भी समय पर नहीं मिल पा रहा है. सेवा यात्रा के दूसरे दिन 21 अप्रैल को मुख्यमंत्री एक तऱफ छतौनी में डॉ. राजेंद्र प्रसाद की आदमक़द प्रतिमा का अनावरण कर रहे थे, तो दूसरी तऱफ हज़ारों शिक्षक हाथ में कटोरा लेकर भिक्षाटन कर रहे थे. जब उन पर मुख्यमंत्री की नज़र पड़ी तो उन्होंने इसके लिए शिक्षा विभाग के अधिकारियों को दोषी क़रार दिया और कहा कि शीघ्र मानदेय का भुगतान होगा. इस बाबत अधिकारियों को आवश्यक हिदायतें दे दी गई हैं. पिछले छह महीनों से बिहार नगर पंचायत प्रारंभिक शिक्षक संघ के बैनर तले शिक्षक धरना एवं प्रदर्शन कर रहे हैं और जिलाधिकारी समेत शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारियों को ज्ञापन दे रहे हैं. ऐसे में ग़लती किसकी है? शिक्षा विभाग की या शिक्षकों की? लोग इस मामले में शिक्षा विभाग को दोषी बताते हुए लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं. मानदेय नहीं मिलने से परेशान शिक्षकों के पास अब कोई विकल्प नहीं बचा था. जब उन्हें मुख्यमंत्री की सेवा यात्रा की सूचना मिली तो उन्होंने आंदोलन तेज़ कर दिया तथा मुख्यमंत्री की मौजूदगी में जिलाध्यक्ष प्रमोद यादव, रामपुकार सिन्हा एवं केशव कुमार के नेतृत्व में सड़क पर आ गए. शिक्षक सेवा यात्रा पर सवाल खड़े करने लगे और मानदेय नहीं मिलने तक आंदोलन की चेतावनी देते रहे. हालांकि अधिकारियों के साथ हुई बैठक में भी मानदेय का मामला उठा और प्रधान सचिव को दोषी अधिकारियों के खिला़फ कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया. दूसरी तऱफ 22 अप्रैल को गांधी मैदान में जनता दरबार लगा था, जहां मुख्यमंत्री शिकायतें सुन रहे थे. हज़ारों फरियादियों के साथ-साथ अभियंत्रण महाविद्यालय के दर्जनों छात्र भी वहां पहुंच गए और उन्हें महाविद्यालय की कुव्यवस्था से अवगत कराने लगे. मुख्यमंत्री ने जैसे ही छात्रों का आवेदन विभागीय सचिव को कार्रवाई करने के लिए दिया, वैसे ही उनका ग़ुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और वे हंगामा करने लगे. छात्र सूरज प्रकाश, सुदर्शन कुमार, धीरज कुमार, विशाल एवं राजीव ने बताया कि महाविद्यालय में छात्रावास बनवाने, शिक्षकों की बहाली करने तथा प्रयोगशाला बनवाने की मांग तीन वर्षों से की जा रही है और सरकार एवं विभाग झूठा वादा कर छात्रों को बरगला रहे हैं.

शिक्षकों का मानदेय छह हज़ार रुपये है और वह भी समय पर नहीं मिल पा रहा है. सेवा यात्रा के दूसरे दिन 21 अप्रैल को मुख्यमंत्री एक तऱफ छतौनी में डॉ. राजेंद्र प्रसाद की आदमक़द प्रतिमा का अनावरण कर रहे थे, तो दूसरी तऱफ हज़ारों शिक्षक हाथ में कटोरा लेकर भिक्षाटन कर रहे थे. जब उन पर मुख्यमंत्री की नज़र पड़ी तो उन्होंने इसके लिए शिक्षा विभाग के अधिकारियों को दोषी क़रार दिया और कहा कि शीघ्र मानदेय का भुगतान होगा.

छात्रों ने स्थल पर ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिला़फ नारेबाज़ी करनी शुरू कर दी. इन छात्रों को समझाने का प्रयास किया गया, किंतु वे अपनी ज़िद पर अ़डे रहे और अंत में जब कोई सफलता नहीं मिली, तब सदर के डीएसपी सुशांत कुमार सरोज के नेतृत्व में पुलिस पहुंची और का़फी मशक्क़त के बाद उन्हें सभा स्थल से हटाया गया. छात्रों की मांगें भी जायज़ थीं और वे तीन वर्षों से शिकायतें करते-करते थक चुके थे. दूसरी तऱफ जानकार सूत्र बताते हैं कि भ्रष्ट अधिकारियों के खिला़फ शिकायतें करने कई लोग पहुंचे थे, किंतु उनकी एक न चली और मजबूरन वे वापस चले गए. हालांकि इस बार की सेवा यात्रा में भी मुख्यमंत्री ने घोषणाओं की बौछार लगा दी. महान लेखक जॉर्ज ऑरवेल की जन्म भूमि को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने, शहर में स्थित मोतीझील को राष्ट्रीय स्तर पर विकसित करने, डॉ. राजेंद्र प्रसाद बाल उद्यान सह स्मारक परिसर को विकसित करने तथा भ्रष्ट अधिकारियों के खिला़फ कठोर कार्रवाई करने आदि घोषणाएं की गईं. मोतीझील को विकसित करने की घोषणा तो उन्होंने कर दी, किंतु इस पर हो रहे अतिक्रमण को हटाने की बात नहीं कही.

मोतीझील के चारों तऱफ अतिक्रमण किया गया है, जिससे इसके सौंदर्यीकरण में बाधा पैदा हो सकती है. जब तक अतिक्रमण नहीं हटेगा, तब तक इसका विकास कैसे होगा? जनता तरह-तरह के सवाल खड़े कर रही है. ये तमाम घोषणाएं पूरी होंगी या नहीं, यह तो समय बताएगा, किंतु मुख्यमंत्री की सेवा यात्रा के दौरान जिस तरह का माहौल बना और विरोध एवं हंगामे का दौर चला तथा सभा स्थल के निकट पुतला जला, बिहार के इतिहास में शायद यह पहली घटना है. भ्रष्टाचार का मामला तो तमाम सरकारों में उठता है, किंतु इस तरह नहीं. अभी जो सेवा यात्रा के दौरान हुआ इससे प्रशासनिक पदाधिकारियों समेत राजनेताओं एवं जन प्रतिनिधियों को नसीहत लेने की ज़रूरत है. दूसरी तऱफ राजद एवं कांग्रेस ने नीतीश कुमार की इस सेवा यात्रा को उनकी अपनी सेवा यात्रा क़रार दिया है और कहा है कि सरकारी खजाने को लुटाया जा रहा है. युवा राजद के जिलाध्यक्ष ई सैयद एहतेशाम हुसैन, वरिष्ठ नेता बजरंगी नारायण ठाकुर, जिलाध्यक्ष बच्चा प्रसाद यादव, पूर्व विधायक ई राणा रणधीर सिंह, लोजपा विधायक दल के पूर्व नेता महेश्वर सिंह आदि बताते हैं कि एसीडीसी डील में फंसी बिहार की सरकार सेवा यात्रा के नाम पर एक बार फिर जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रही है. अब जनता सब कुछ समझ चुकी है और अगले चुनाव में करारा जवाब देगी. भ्रष्टाचार का चारों तऱफ बोलबाला है और पंचायत से लेकर सचिवालय तक भ्रष्टाचारियों की चांदी कट रही है तथा जनता का शोषण हो रहा है.

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