उत्तर प्रदेशः घोटालों के गुरुघंटाल

Share Article

सामाजिक एवं राजनीतिक मंच पर एक-दूसरे की टांग खींचने और खून के प्यासे लगने वाले नेताओं का असली चेहरा जनता कभी-कभी देख पाती है. सबके अपने-अपने स्वार्थ हैं, जो उन्हें एक-दूसरे के क़रीब लाते हैं. नेताओं की मिलीभगत के चलते उत्तर प्रदेश की पहचान आज घोटालों के प्रदेश के रूप में होती है. पिछले 20-25 वर्षों में तो घोटालों की बाढ़ सी आ गई. केंद्र और राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर शुरू की गईं विभिन्न योजनाओं में शायद ही कोई ऐसी रही होगी, जिस पर घोटालेबाज़ों की छाया नहीं पड़ी. लगता है कि राजधानी लखनऊ से लेकर गांव तक घोटालों के गुरुघंटाल बैठे हैं. कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है, जो घोटाला मुक्त हो. भूमि, स्वास्थ्य, खाद्यान्न, खनन, शिक्षा, मिड डे मील, मनरेगा, पुलिस भर्ती और न जाने कौन-कौन से घोटाले. बात पिछली दो सरकारों की करें तो मुलायम राज के अनाज घोटाले और माया राज में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) घोटाले ने खूब नाम कमाया. दोनों मामलों में लाखों करोड़ रुपये का घपला हुआ. इनमें राजनेताओं के अलावा नौकरशाह भी शामिल थे. पहले तो इन घोटालों पर पर्दा डालने की कोशिश हुई, लेकिन जब बात नहीं बनी तो सीबीआई को जांच का ज़िम्मा सौंप दिया गया. दोनों घोटाले आजकल सुर्खियों में हैं. कुछ नेताओं एवं अधिकारियों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है. सीबीआई जितने काग़ज़ खंगाल रही है, मामला उतना ही गंभीर होता जा रहा है.

पिछली सपा सरकार के समय पुलिस भर्ती और अनाज घोटाले सबसे अधिक चर्चा में रहे थे. पिछली सपा सरकार में ग़रीबी रेखा से नीचे बसर करने वाले लोगों के लिए अन्त्योदय अन्न योजना, संपूर्ण ग्रामीण स्वरोजगार योजना और काम के बदले अनाज योजना के तहत केंद्र सरकार से भेजे गए खाद्यान्न में भारी घोटाला हुआ था. 2004 में यह घोटाला सुर्खियों में आया था. खाद्य एवं रसद विभाग के विशेष सचिव हरिशंकर पांडेय ने गोंडा में 400 करोड़ रुपये के खाद्यान्न घोटाले की रिपोर्ट दर्ज कराई. तत्कालीन मुलायम सिंह सरकार को का़फी फज़ीहत उठानी पड़ी थी. विपक्ष के दबाव के चलते मुलायम सिंह ने 2005 में मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा को सौंप दी थी.

अनाज घोटाले में सीबीआई को अदालत की फटकार भी लगी, लेकिन उसने अपना रवैया नहीं बदला. बसपा राज में स्वास्थ्य घोटाले के सहारे तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती की मुश्किलें बढ़ाने वाली सीबीआई आजकल खाद्यान्न घोटाले में तेज़ी लाकर सपा सरकार के लिए समस्या खड़ी कर रही है. कहीं यह दबाव की राजनीति का हिस्सा तो नहीं है? पिछले क़रीब डेढ़ वर्षों से (जबसे यह लगने लगा कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनेगी) अनाज घोटाले में सीबीआई की तेज़ी कुछ ज़्यादा देखी जा रही है. सीबीआई अभी तक एक सपा विधायक सहित केवल 12 लोगों को हिरासत में ले सकी, जिनमें विधायक सहित कई की ज़मानत भी हो चुकी है.

जांच में पता चला कि यह अनाज सरकारी गोदामों में पहुंचा ही नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल और नेपाल भेज दिया गया. पूरा प्रदेश खाद्यान्न घोटाले की ज़द में था और घोटाले का केंद्र बिंदु लखनऊ था. इस मामले में कई आईएएस एवं पीसीएस अधिकारियों की मिलीभगत उजागर हुई थी. 2006 जाते-जाते कोर्ट ने इस मामले में सीबीआई जांच की अपेक्षा की, लेकिन मुलायम सरकार ने उसे टाले रखा. कुछ समय बाद सत्ता परिवर्तन हो गया. बसपा की सरकार बनते ही मुख्यमंत्री मायावती ने खाद्यान्न घोटाले की जांच सीबीआई को सौंप दी, लेकिन जब तक प्रदेश में मायावती की सरकार रही, तब तक सीबीआई ने कोई खास तेज़ी नहीं दिखाई. सीबीआई जिस तरह जांच कर रही थी, उससे लगा कि वह दबाव में थी. विपक्ष ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी ने केंद्र सरकार को समर्थन दे रखा है, इसलिए जांच कछुआ चाल से चल रही है. इस दौरान सीबीआई ने कुछ ज़िलों में घोटालेबाज़ों के खिला़फ मुक़दमे ज़रूर दर्ज कराए, लेकिन बड़े मगरमच्छों पर हाथ डालने का साहस वह नहीं जुटा सकी. माया राज में हुए एनआरएचएम घोटाले पर वह तेज़ी से काम कर रही थी. सीबीआई की तेज़ी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती को चैन से नहीं बैठने दिया. इस घोटाले ने सरकार की इतनी बदनामी कराई कि मायावती को जवाब देना मुश्किल हो गया. यह घोटाला बसपा के सत्ता से दूर होने की वजह भी बना. अनाज घोटाले में सीबीआई को अदालत की फटकार भी लगी, लेकिन उसने अपना रवैया नहीं बदला. बसपा राज में स्वास्थ्य घोटाले के सहारे तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती की मुश्किलें बढ़ाने वाली सीबीआई आजकल खाद्यान्न घोटाले में तेज़ी लाकर सपा सरकार के लिए समस्या खड़ी कर रही है.

कहीं यह दबाव की राजनीति का हिस्सा तो नहीं है? पिछले क़रीब डेढ़ वर्षों से (जबसे यह लगने लगा कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनेगी) अनाज घोटाले में सीबीआई की तेज़ी कुछ ज़्यादा देखी जा रही है. सीबीआई अभी तक एक सपा विधायक सहित केवल 12 लोगों को हिरासत में ले सकी, जिनमें विधायक सहित कई की ज़मानत भी हो चुकी है. 18 लोगों के खिला़फ अभियोजन की स्वीकृति मांगी गई, जिनमें 6 के खिला़फ उसे स्वीकृति भी मिल गई है. बीते 21 अप्रैल को सीबीआई ने खाद्यान्न घोटाले से जुड़े 13 लोगों के ठिकानों पर लखनऊ में छापे मारे. इसके बाद 23 अप्रैल को उसने मोहनलालगंज (लखनऊ) में एक गोदाम प्रभारी सुरेश धर दुबे एवं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के नेता दलजीत सिंह चौधरी को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया तो विभिन्न दलों के भ्रष्टाचारी नेताओं के गठजोड़ का पता चला. सीबीआई का कहना है कि दलजीत ने गोदाम प्रभारियों और कोटेदारों की मदद से रैकेट चलाया. दलजीत को इस पूरे घोटाले की धुरी माना जाता है. अभी तक सीबीआई की जांच का दायरा लखीमपुर खीरी, सीतापुर एवं पूर्वांचल के कुछ ज़िलों तक सीमित था, पहली बार घोटाले की ज़द में लखनऊ आया. दलजीत और सुरेश को जेल भेज दिया गया. कहा जा रहा है कि दलजीत एवं सुरेश अनाज उठाने के लिए कोटेदारों के नाम से पैसा जमा कराते थे और अनाज बाहर निकलते ही उसे बाज़ार में बेच देते थे. सीबीआई का कहना है कि दलजीत ने स्वीकार किया कि उसकी कई गोदाम प्रभारियों से मिलीभगत थी, वह उनका हिस्सा भी पहुंचाता था.

प्रदेश में विभिन्न घोटालों और उनमें शामिल अ़फसरों के खिला़फ सीबीआई और ईओडब्ल्यू की जांच चल रही है. एनआरएचएम घोटाले, आयुर्वेद घोटाले एवं दवा घोटाले की जांच से सा़फ हो चुका है कि घोटाला करने में नेताओं को महारथ हासिल है. ताज़ा मिसाल है कांग्रेस नेता दलजीत सिंह की गिरफ्तारी. ईओडब्ल्यू ने गोंडा में अनाज घोटाले की जांच की तो तत्कालीन सीडीओ होरीलाल की भूमिका संदिग्ध पाई गई. उनकी गिरफ्तारी होती, इससे पहले ही वह स्टे ऑर्डर ले आए. सपा नेता एवं मंत्री विनोद सिंह उ़र्फ पंडित सिंह भी जांच के दायरे में हैं. सीतापुर में पूर्व विधायक ओम प्रकाश गुप्ता जेल जा चुके हैं तो मंत्री रघुराज प्रताप सिंह भी जांच के दायरे में है. मामला ऊपरी अदालत में चल रहा है. गोंडा के समाजवादी नेता शिवबख्श भी अनाज घोटाले में जेल जाने को मजबूर हो गए. एनआरएचएम घोटाला तो खूनी साबित हुआ. स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारियों-कर्मचारियों को जान से हाथ धोना पड़ा. इस घोटाले में सीबीआई ने बीते 23 अप्रैल को मुरादाबाद के व्यवसायी एवं पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के क़रीबी विवेक जैन को गिरफ्तार कर लिया. वह कुशवाहा के क़रीबी सौरभ जैन का चचेरा भाई है, जो पहले से सला़खों के पीछे है. सीबीआई ने चुनाव से पहले बहराइच के प्रयागपुर से विधानसभा प्रत्याशी मुकेश श्रीवास्तव (अब विधायक) के घर छापा मारा था. उनकी और उनके भाई की फर्म की जांच चल रही है.

घोटाला मुलायम राज का, संकट में कांग्रेस

खाद्यान्न घोटाला पिछली सपा सरकार में हुआ था, लेकिन इसकी धमक समाजवादी पार्टी से अधिक कांग्रेस में सुनाई दे रही है. घोटाले में कुछ कांग्रेसियों का नाम क्या आया, कांग्रेसी आपस में सिर फुटव्वल करने लगे. अनाज घोटाले में दलजीत की गिरफ्तारी से कांग्रेस बैकफुट पर आ गई. पार्टी के भीतर पूछा जा रहा है कि राज्य में बजट सत्र के दौरान वह सपा सरकार को किस आधार पर घेरेगी, जबकि उसका भी दामन दाग़दार है. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार से कांग्रेस उबर भी नहीं पाई थी, तभी उसके दामन पर भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने का दाग़ लग गया. बात दिल्ली तक पहुंच गई, आलाकमान ने फौरन छानबीन शुरू कर दी. ज़्यादातर नेता दलजीत से अपना दामन बचाते दिखे. प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी ने चुप्पी साध ली. एआईसीसी सदस्य अशोक सिंह ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर यह जांच कराने की मांग की है कि किसके कहने पर दलजीत को पार्टी में महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी मिली. दलजीत की गिरफ्तारी के बाद रीता बहुगुणा जोशी विरोधियों के निशाने पर आ गईं. इसी बहाने कुछ लोगों ने प्रदेश प्रभारी दिग्विजय सिंह के खिला़फ मोर्चा खोल रखा है. कांग्रेसियों का एक दल पिछले दिनों दिल्ली पहुंचा और प्रदेश में राहुल की तमाम कोशिशों के बाद भी जनाधार न बढ़ने की जानकारी देने वाला एक पत्र उन्हें थमा आया.

आरोप लगाया गया कि क़रीब एक वर्ष से सीबीआई दलजीत से पूछताछ कर रही थी, फिर भी उसे नज़रअंदाज कर दिया गया. दिल्ली गई कांग्रेसियों की टीम ने सवाल खड़ा किया कि एआईसीसी सदस्य बनाते समय किसी बड़े नेता ने विरोध क्यों नहीं किया? जब सीबीआई ने दलजीत को गिरफ्तार किया तो निष्कासन का ड्रामा कर उससे पीछा छुड़ाने का प्रयास क्यों किया जा रहा है? प्रतिनिधि मंडल ने राहुल से कहा कि अगर वह 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को सुधरता हुआ देखना चाहते हैं तो रीता बहुगुणा जोशी, दिग्विजय सिंह एवं परवेज़ हाशमी को तत्काल उनके पदों से हटाया जाए. आलाकमान ने सबकी बातें गंभीरता से सुनीं. उसके रु़ख से यही लगता है कि दिग्विजय सिंह के विदेश से लौटने के बाद प्रदेश कांग्रेस संगठन में बड़ा फेरबदल हो सकता है. नया प्रदेश अध्यक्ष तय होने के अलावा कांग्रेस विधान मंडल दल का गठन भी होना है. प्रदेश संगठन को चार इकाइयों में बांटने के साथ-साथ कांग्रेस की कमान किसी केंद्रीय मंत्री को सौंपे जाने की चर्चा है. इसके लिए आरपीएन सिंह एवं जतिन प्रसाद के नाम तेज़ी से उभर कर सामने आए हैं. जतिन को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए सबसे  योग्य माना जा रहा है. वह युवा हैं और राहुल गांधी का उन पर पूरा भरोसा है. कहीं-कहीं राशिद अल्वी एवं राजेश मिश्रा की पैरोकारी भी हो रही है.

भ्रष्टाचार में कांग्रेसी अव्वल

भारतीय जनता पार्टी की नेता उमा भारती ने कहा कि राज्य में कांग्रेसियों का यह हाल तब है, जब वह 22 वर्षों से सत्ता से बाहर है. भ्रष्टाचार को कांग्रेस में राष्ट्रीय स्तर पर समर्थन मिल रहा है. कांग्रेस शासित राज्यों में कांग्रेस के शीर्ष नेता तक भ्रष्टाचार में डूबे हैं. इस तरह की गिरफ्तारियां हर जगह शुरू हो जाएं तो कांग्रेस के कई बड़े नेता जेल में नज़र आएंगे. समाजवादी पार्टी पर हल्ला बोलते हुए उमा ने कहा कि जिस पार्टी का मुखिया ही आय से अधिक संपत्ति के मामले में फंसा हो, उसके अन्य नेताओं का चरित्र कैसा होगा, इसका सहज अंदाज़ा लगाया जा सकता है. सपा की पिछली सरकार में हुए अनाज घोटाले की तरह पुलिस भर्ती घोटाले की तस्वीर भी लोगों के ज़ेहन में अभी तक क़ैद है. बसपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा, लूट का यह सिलसिला उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली तक चल रहा है. सपा और कांग्रेस के नेता जनता के सामने लड़ने का नाटक करते हैं, लेकिन भीतऱखाने मिलकर भ्रष्टाचार करते हैं. कांग्रेस के मीडिया को-ऑर्डिनेटर एवं विधायक विवेक सिंह ने कहा, भ्रष्टाचार के आरोपियों को सख्त सज़ा मिलनी चाहिए, वह जाहे कांग्रेस का हो या फिर दूसरे किसी दल का. ऐसे लोगों को पार्टी में शरण देने वाले नेताओं के खिला़फ ठोस क़दम उठाए जाने चाहिए.

घोटाले बने जान के दुश्मन

एनआरएचएम घोटाले ने नौ लोगों की जान ली. अब अनाज घोटाले से जुड़े एक मुख्य सूत्रधार ने अपनी जान का खतरा बताकर सीबीआई, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री से सुरक्षा की गुहार की है. जांच में तेज़ी आते ही खाद्यान्न घोटाले के सूत्रधार आर के यादव ने उस मंत्री से अपनी जान को खतरा बताया है, जिसके लिए वह पहले काम करता था. उसके पास जो डायरी बरामद हुई, उसमें घोटाले से जुड़े लेन-देन का पूरा हिसाब-किताब है. यादव सारा हिसाब मंत्री के परिवार को देता था और प्रमाण के तौर पर वह उनके हस्ताक्षर भी लेता था. सीबीआई को उससे कई अहम जानकारियां मिली हैं. वह उक्त मंत्री की एक-एक नब्ज़ पहचानता है. इसलिए उसे अपनी जान का खतरा सता रहा है. मालूम हो कि खाद्यान्न घोटाले में सीबीआई की स्थानीय अदालत ने विश्वनाथ चतुर्वेदी बनाम केंद्र सरकार और राज्य बनाम सैय्यद क़ासिम रज़ा एवं अन्य के मुक़दमे में जांच एजेंसी को छापे मारने का आदेश दिया था.

You May also Like

Share Article

One thought on “उत्तर प्रदेशः घोटालों के गुरुघंटाल

  • May 12, 2012 at 5:19 PM
    Permalink

    गूवेर्न्मेंट इस इन्त्रोदुसिंग सेवेरल गुड प्लान्स बुत गवर्नमेंट इस नोट सुपेर्विसिंग एंड नोट तकिंग एक्शन अगेंस्ट कल्प्रित

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *