पंसारी पंचायत : जिसने लोगों की ज़िंदगी बदल दी

गांव के विकास में पंचायत की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, लेकिन अक्सर यह देखा जाता है कि पंचायतें अपनी भूमिका का निर्वहन सही तरीक़े से नहीं करती हैं, जिसके कारण लोगों के मन में यह धारणा घर कर गई है कि पंचायत के स्तर पर कुछ नहीं किया जा सकता है. लोगों की यह धारणा गुजरात की पंसारी पंचायत के विकास के बारे में जानकर बदल जाएगी. पंसारी गांव की आबादी 6000 है. इस गांव की विशेषता यह है कि गांव होते हुए भी यह शहरी सुविधाओं से संपन्न है. इस गांव में वे सारी सुविधाएं हैं, जो किसी शहर में होती हैं. चाहे लोगों को शुद्ध पानी उपलब्ध कराने की बात हो या फिर अच्छी शिक्षा देने की या फिर नालियों की व्यवस्था की, इस गांव में जिस तरह की सुविधाएं उपलब्ध हैं, वे कई शहरों में नहीं हैं. यह पंचायत स्थानीय स्वशासन की नज़ीर बन गई है. ग्रामसभा की नियमित बैठकें यहां होती हैं. केंद्र एवं राज्य सरकार के सहयोग से यहां के सरपंच हिमांशु नरेंद्र भाई पटेल ने 14 करोड़ रुपये के विकास कार्य कराए हैं. यह पंचायत देश की अन्य पंचायतों के लिए रोल मॉडल बन सकती है. इस पंचायत को तृतीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर सर्वश्रेष्ठ ग्रामसभा का पुरस्कार दिया गया. गुजरात सरकार ने भी 2011 का सर्वश्रेष्ठ पंचायत पुरस्कार इस पंचायत को दिया है.

इस पंचायत ने लोगों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के लिए 5.5 लाख रुपये खर्च करके एक आरओ प्लांट लगवाया है. इस प्लांट से एक तऱफ तो यहां के युवाओं को रोज़गार मिला, वहीं दूसरी तऱफ लोगों को शुद्ध पानी. 20 लीटर पानी का जार मात्र 4 रुपये में उपलब्ध कराया जाता है, जिसकी क़ीमत बाज़ार में 20 से 25 रुपये है. बस पड़ाव पर वाटर कूलर की व्यवस्था भी पंचायत की ओर से की गई है. यही नहीं, पंचायत शादी या किसी तरह के समारोह के लिए 100 रुपये में पानी का टैंक भी लोगों को मुहैया कराती है. इस तरह की व्यवस्था से लोगों को का़फी राहत मिली है. यहां सरपंच के साथ संवाद स्थापित करने के लिए बहुत अच्छी व्यवस्था है. लगभग 120 वाटरप्रूफ स्पीकर गांव के विभिन्न स्थानों पर लगाए गए हैं, जिन्हें सरपंच कार्यालय से जोड़ दिया गया है. इन स्पीकरों का इस्तेमाल सुबह-शाम भजन एवं श्लोक आदि प्रसारित करने के लिए किया जाता है, साथ ही सरपंच गांव वालों को अपना संदेश भी इसके माध्यम से देते हैं. ग्रामसभा की बैठक होनी हो या फिर किसी विकासात्मक कार्य के लिए लोगों को सूचना देनी हो तो सरपंच इनका इस्तेमाल करते हैं.

सखी मंडल नामक स्वयं सहायता समूह बनाए गए हैं. इस पंचायत में लगभग 100 सखी मंडल हैं, जिनमें 1000 से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं. उन्होंने 32 लाख रुपये इकट्ठा किए हैं, जिनसे कंवेनियंस स्टोर और शॉपिंग सेंटर बनाने की योजना है.

जब कभी सरपंच को गांव या गुजरात से बाहर जाना होता है तो वह गांव वालों को सूचित कर देते हैं, ताकि उन्हें अगर सरपंच से कोर्ई काम हो तो वे उनके बाहर जाने से पहले उसे करा लें. सरपंच के पास गांव के सभी लोगों के मोबाइल नंबर हैं. जब उन्हें गांव वालों को कोई सूचना देनी होती है तो वे एसएमएस करके सूचित कर देते हैं. इस गांव में अंडरग्राउंड ड्रैनेज सिस्टम है. नाली का पानी गलियों में नहीं जाता, जैसा कि अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में देखा जाता है. पंचायत लोगों को बस सुविधा भी उपलब्ध करा रही है. अटल एक्सप्रेस नाम से चलाई जा रही इस बस सेवा का फायदा पंचायत के लोग उठा रहे हैं. दूध पहुंचाने के लिए पंचायत के अन्य गांवों की महिलाओं को पंसारी दुग्ध केंद्र तक पैदल जाना पड़ता था, लेकिन अब पंचायत की बस उन्हें दुग्ध केंद्र तक ले जाती है और इसके लिए उन्हें मात्र 3 रुपये देने पड़ते हैं. यही नहीं, यह बस लड़कियों को मुफ्त में स्कूल तक ले जाती है. यह सुविधा उन्हें गुजरात सरकार की कन्या केलवानी योजना के तहत दी जाती है.

पंचायत में महिला सशक्तिकरण के लिए भी काम किया जा रहा है. सखी मंडल नामक स्वयं सहायता समूह बनाए गए हैं. इस पंचायत में लगभग 100 सखी मंडल हैं, जिनमें 1000 से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं. उन्होंने 32 लाख रुपये इकट्ठा किए हैं, जिनसे कंवेनियंस स्टोर और शॉपिंग सेंटर बनाने की योजना है. यहां की महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं, जिसके कारण उनकी कई समस्याओं का निपटारा आसानी से हो जाता है. यहां 65 केवी का एक सब स्टेशन भी है, जहां से बिजली आपूर्ति की जाती है. इस पंचायत में बच्चों की शिक्षा की उत्तम व्यवस्था है. सभी पांच प्राथमिक विद्यालयों में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं. गांव का कोई भी व्यक्ति किसी भी समय विद्यालय जाकर क्लास रूम में जाए बिना यह देख सकता है कि पढ़ाई हो रही है या नहीं अथवा शिक्षक कैसा काम कर रहे हैं. इस पंचायत में स्कूल ड्रॉप रेट शून्य है यानी कोई भी विद्यार्थी प्रवेश लेने के बाद अपनी पढ़ाई पूरी किए बग़ैर स्कूल नहीं छोड़ता.

इस पंचायत ने तीन साल के लिए दुर्घटना बीमा करा रखा है. इसके लिए उसे 6.5 लाख रुपये बतौर प्रीमियम देने पड़ते हैं. यदि पंचायत के किसी व्यक्ति की दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है तो इस योजना के तहत उसके परिवार को एक लाख रुपये दिए जाते हैं और घायल होने पर पच्चीस हज़ार रुपये मिलते हैं. गांव की गलियों में सोलर लाइट की व्यवस्था है. भारत गांवों का देश है और इसका विकास गांवों के विकास के साथ ही होगा. गांवों के विकास के लिए पंचायतों को सशक्त और जागरूक करना होगा. पंसारी ने एक मॉडल पेश किया है. अगर हर पंचायत पंसारी की तरह सशक्त और जागरूक हो जाए तो देश के लगभग सात लाख गांवों की तस्वीर बदल सकती है.