नीली टर्फ पर जूझती भारतीय हॉकी टीम

आपने टेनिस और अन्य खेलों को नीली टर्फ पर खेलते हुए देखा होगा, लेकिन अब हॉकी भी नीली टर्फ पर खेली जाने लगी है. लंदन ओलंपिक के दौरान फील्ड हॉकी नीली टर्फ पर खेली जाएगी. लंदन ओलंपिक के ट्रायल इवेंट के दौरान भारतीय पुरुष हॉकी टीम को इसी नीली टर्फ पर कई तरह की परेशानी पेश आई. वह इस नई टर्फ पर तालमेल नहीं बैठा पाई. इस कारण वह प्रतियोगिता में अंतिम पायदान पर रही. नीली टर्फ पर खेल के दौरान पीले रंग की गेंद का इस्तेमाल होता है और मैदान के किनारे गुलाबी रंग की पट्टी बनी होती है, ताकि गेंद सा़फ-सा़फ दिखाई देती रहे. इस टर्फ पर फिसलन और उछाल ज़्यादा है और गेंद की गति भी कम है. इस कारण इसकी आलोचना भी हो रही है. इस साल  मलेशिया में खेली जाने वाली अजलनशाह हॉकी प्रतियोगिता भी नीली टर्फ पर ही खेली जा रही है. वहां भारतीय टीम के प्रदर्शन के बाद ही ओलंपिक में उनके अच्छे प्रदर्शन की आशा की जा सकती है.

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